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CDS जनरल बिपिन रावत ने बताया- 2022 तक बन जाएगा भारतीय सेना का थियेटर कमांड, पहला कमांड इसी साल हो जाएगा तैयार

देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत ने बताया कि भारत में थियेटर कमांड की संख्‍या 2 से 5 तक हो सकती है.

देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत ने बताया कि भारत में थियेटर कमांड की संख्‍या 2 से 5 तक हो सकती है.

देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat) ने बताया कि भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से अलग तरह की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग थियेटर कमांड बनाए जाएंगे. जरूरत के मुताबिक भारत में 2 से 5 कमांड तक हो सकते है. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के लिए एक अलग कमांड हो सकता है. ट्रेनिंग के लिए भी एक अलग कमांड होगी. इसमें बेसिक ट्रेनिंग होगी, जिसमें तीनों सेनाओं के सैनिक एक साथ प्रशिक्षण लेंगे.

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    नई दिल्‍ली. भारतीय सेना (Indian Army) अपने पड़ोसियों की तरफ से भविष्य के खतरे को देखते हुए तकनीक में बदलाव कर अपनी ताकत बढ़ा रही है. सबसे पहले तीनों सेनाओं के समन्वय (Co-Ordination) को बढ़ाने के लिए सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (CDS) का पद बनाया. देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) ने अब ऐलान कर दिया है कि सशस्त्र बलों (Armed Forces) को ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए थियेटर कमांड (Theater Command) की स्थापना की जाएगी. इस थियेटर कमांड की स्थापना साल 2022 तक हो जाएगी.

    जरूरत के मुताबिक भारत में होंगे 2 से 5 थियेटर कमांड
    जनरल रावत ने बताया कि चीन (China) और अमेरिका (US) पहले ही अपने खतरों व चुनौतियों को ध्यान में रखकर सैन्य थियेटर कमांड बना चुके हैं. भारत की भौगोलिक परिस्थियां अलग हैं. इसलिए भारत (India) अमेरिकी और चीन के मॉडल के बजाय एक नई स्टडी कर थियेटर कमांड बनाएगा. उन्‍होंने कहा कि लंबे समय से थियेटर कमांड की चर्चा हो रही थी, लेकिन अब साल 2022 तक ये अस्तित्व में आ जाएगा. भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से अलग तरह की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग थियेटर कमांड बनाए जाएंगे. जरूरत के मुताबिक भारत में 2 से 5 कमांड तक हो सकते है.

    सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने बताया कि जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए अलग थियेटर कमांड हो सकता है.


    जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए अलग से बनेगा थियेटर कमांड
    सीडीएस जनरल रावत ने बताया कि जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के लिए एक अलग कमांड हो सकता है. इसके लिए जल्द स्टडी कराई जाएगी. इस कमांड में जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्‍ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) का पूरा हिस्‍सा होगा. फिलहाल जम्मू-कश्मीर सेना के नॉर्दन और वेस्टर्न कमांड के तहत आता है. नौसेना के वेस्टर्न और इस्टर्न कमांड को एक कर पेनिसुलर कमांड बनाया जाएगा. इसके लिए 31 मार्च को स्टडी का आदेश दिया जाएगा. ये स्टडी 3-4 महीने में पूरी होगी. ये भी बताया जा रहा है कि पेनिसुलर कमांड इस साल के अंत तक अस्तित्व में आएगा. इस कमांड का नेतृत्‍व नेवी का अधिकारी करेगा. इसके लिए नौसेना प्रमुख की जिम्मेदारी में इजाफा किया जाएगा. अब नौसेना प्रमुख को बढ़ने वाली अंतरराष्‍ट्रीय चुनौतियों और समुद्री क्षेत्र में आने वाले देशों के साथ बेहतर समन्वय पर भी फोकस करना होगा.

    एयर डिफेंस को एक कमांड में लाने के लिए हुई स्‍टडी
    सबसे पहले तीनों सेना के एयर डिफेंस (Air Defence) को एक कमांड में लाने के लिए स्टडी कराई गई. इसकी रिपोर्ट 31 मार्च तक सौंप दी जाएगी. ये एयर डिफेंस कमांड वायुसेना (Air Force) के अधीन होगी. इस कमांड के तहत थलसेना (Army), वायुसेना और नौसेना (Navy) के सभी एयर डिफेंस सिस्टम आएंगे. हालांकि, ये भी जरूरी नहीं कि सभी सिस्टम इस कमांड के तहत आएं. नेवी के शिप के लिए अलग एयर डिफेंस सिस्टम होते हैं तो वो नौसेना के तहत ही होंगे. ट्रेनिंग के लिए भी एक अलग कमांड होगी. इसमें बेसिक ट्रेनिंग होगी, जिसमें तीनों सेनाओं के सैनिक एक साथ प्रशिक्षण लेंगे. इसका मक़सद तीनों सेनाओं के साथ काम करने की हालत में एकदूसरे के बारे में बेहतर जानकारी होना है. मसलन ड्रोन और हेलीकॉप्‍टर तीनों सेनाएं इस्तेमाल करती हैं.

    जनरल रावत ने पत्रकारों के एक समूह से कहा कि वायु रक्षा कमान अगले साल की शुरुआत में और 'पेनिसुलर कमान' 2021 के अंत तक शुरू की जाएगी.
    सीढीएस जनरल रावत ने कहा कि वायु रक्षा कमान अगले साल की शुरुआत में और 'पेनिसुलर कमान' 2021 के अंत तक शुरू की जाएगी.


    एकदूसरे के लॉजिस्टिक्‍स इस्‍तेमाल कर सकेंगी सेनाएं
    तीनों सेनाओं को एक लॉजिस्टिक कमांड (Logistic Command) के तहत लाया जाएगा. इससे तीनों सेनाएं लॉजिस्टिक्‍स को जरूरत के मुताबिक एकदूसरे से साझा किया जा सके. ऐसे में जब लॉजिस्टिक्‍स साझा करने की जरूरत होगी तो इस्‍तेमाल में आसानी होगी. इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि साजो-सामान का पहले से बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा. किसी भी एक बेस पर दो या तीनों सेनाओं की तैनाती है तो वो एकदूसरे के लॉजिस्टिक्‍स को इस्तेमाल कर सकेंगी. (रिपोर्ट- संदीप बोल)

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