कमला हैरिस के बाद तमिलनाडु की एक और बेटी ने अमेरिका में परचम लहराया

डॉ सेलिने गॉउन्डेर, अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के कोविद -19 की सलाहकार समिति में शामिल की गयी हैं (Photo- Facebook/Dr. Celine Gounder)
डॉ सेलिने गॉउन्डेर, अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के कोविद -19 की सलाहकार समिति में शामिल की गयी हैं (Photo- Facebook/Dr. Celine Gounder)

डॉ. सेलिने के पिता राज नटराजन गॉउन्डेर पेरुमापलयम गांव के रहने वाले थे. 1960 के दशक में वह अमेरिका चले गए थे और एक बोइंग कंपनी में काम करने लगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 10:40 PM IST
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अभी कुछ दिन पहले, तमिलनाडु (Tamilnadu) के तिरुवरुर (Thiruvarur) ज़िले के थुलासेंद्रापुरम-पैनगनाडु गांव ने संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) की नव-निर्वाचित उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris) की सफलता का जश्न मनाया था. इसी तर्ज़ पर तमिलनाडु के एक दूसरे ज़िले इरोड का गांव पेरुमापलयम भी अपनी बेटी डॉ सेलिने गॉउन्डेर की सफलता का जश्न मना रहा है जो सोमवार के दिन अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) के कोविड -19 की सलाहकार समिति में शामिल की गयी हैं.

डॉ. सेलिने गॉउन्डेर न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में मेडिसिन और संक्रामक रोग विभाग में क्लीनिकल सहायक प्रोफेसर हैं. वह HIV / संक्रामक रोग के विशेषज्ञ, इंटरनिस्ट, महामारी विशेषज्ञ, पत्रकार और फिल्म निर्माता के तौर पर भी काम कर रही हैं. वह 2016 में अमेरिका की इन्फेक्शस डिजीज सोसाइटी की फैलो भी चुनी गयी थीं. वर्ष 2017 में पीपल मैगज़ीन ने उन्हें दुनिया की उन 25 महिलाओं में शुमार किया था जोकि दुनिया बदले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. डॉ. सेलिने के पिता राज नटराजन गॉउन्डेर पेरुमापलयम गांव के रहने वाले थे. 1960 के दशक में वह अमेरिका चले गए थे और एक बोइंग कंपनी में काम करने लगे.

प्राइवेट चैनल के एक रिपोर्टर से बातचीत के दौरान ग्रामीण ने बताया "सेलिने बहुत ही उदार और मानवता से भरी थीं. उन्होंने हमें खाने पीने का सामान उनके दरवाज़े पर देने का निर्देश दिया था जिससे लॉकडाउन के दौरान बच्चे भूख से प्रभावित न हों. भारत लॉकडाउन घोषित होने से पहले, उन्होंने हमें कोविड-19 के बारे में जागरूक कर दिया था और ग्रामवासियों को सुरक्षित रहने के सम्बन्ध में सभी दिशा निर्देशों की सूची भी भेज दी थी."



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लोग करते हैं गर्व की अनुभूति
सेलिने ने ट्विटर के माध्यम से मंगलवार को बताया कि, "तमिलनाडु के मेरे लोग" अखबारों में प्रकाशित मेरी नियुक्ति से सम्बंधित खबरों के स्क्रीनशॉट्स मुझे भेजकर बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं. ट्विटर पर ही सूचना देते हुए वह कहती हैं कि बहुत लोग पूछ रहे हैं कि मैं अपनी जाति का नाम अपने उपनाम के तौर पर इस्तेमाल क्यों करती हूं ? "बहुत लोग पूछते हैं मैं अपनी जाति का नाम अपने उपनाम के तरह क्यों लगाती हूँ. मेरे पिता 1960 में अमेरिका आये थे. अमेरिकन को नटराजन बुलाने में दिक्कत पेश आती थी. गॉउन्डेर बोलना उनके लिए ज्यादा आसान था." वह विस्तार से बताती हैं कि इस विदेशी लगने वाले शब्द को बुलाने में अभी भी लोगों को परेशानी होती है.

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उन्होंने एक ट्वीट में लिखा "मेरे पिता अपना उपनाम गॉउन्डेर 1970 के शुरूआती समय में ही कर लिया था जब मैं पैदा भी नहीं हुई थी. यह मेरा नाम है. ये मुझसे जुड़े इतिहास और पहचान का हिस्सा है, हालांकि इस इतिहास का कुछ हिस्सा कष्टदायक भी है. जब मेरी शादी हुई तब भी मैंने अपना नाम नहीं बदला. मैं इसे अब भी नहीं बदलूंगी."

सेलिने की मां फ्रांस से हैं और उन्होंने स्वास्थ्य और संक्रामक रोगों की रोकथाम में शानदार करियर बनाया है. स्वास्थ्य विज्ञान में यह दिलचस्पी उन्हें अपनी माँ से विरासत में मिली है. डॉ सेलिने ने दक्षिण अफ्रीका, लेसोथो, मलावी, इथियोपिया और ब्राज़ील में TB और HIV का अध्ययन किया है और गिनी में एबोला सहायता कर्मी के तौर पर स्वेच्छा से काम किया है.
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