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होईकोर्ट का आदेश- केंद्र 31 मार्च तक दुर्लभ बीमारियों के संबंध में स्वास्थ्य नीति अधिसूचित करे

दिल्‍ली हाई कोर्ट.

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उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि दुर्लभ रोग राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2020 को भारत सरकार 31 मार्च को या इससे पहले अंतिम रूप देगी और अधिसूचित करेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 8:51 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि वह दुर्लभ बीमारियों के संबंध में 31 मार्च तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को अंतिम रूप दे और इसे अधिसूचित करे. न्यायालय ने इस तरह की बीमारियों के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान, विकास एवं रोग चिकित्सा संकाय स्थापित करने का भी निर्देश दिया.

न्यायालय ने सरकार से दुर्लभ बीमारियों के वास्ते आगामी वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट में वृद्धि पर विचार करने को भी कहा. अदालत ने कहा कि नीति में दुर्लभ बीमारियों की दवा के निर्माण और उपचार के लिए वित्तीय प्रोत्साहन शामिल होना चाहिए.





AIIMS में समिति तथा कोष स्थापित करने की मांग
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों से संबंधित कई याचिकाओं पर जारी अंतरिम आदेश में कहा कि नीति के तहत इस तरह के रोगों के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान, विकास एवं रोग चिकित्सा संकाय के साथ ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एक समिति तथा कोष भी स्थापित किया जाना चाहिए. उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि दुर्लभ रोग राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2020 को भारत सरकार 31 मार्च को या इससे पहले अंतिम रूप देगी और अधिसूचित करेगी.


दुर्लभ बीमारियों की भारत में कोई निश्चित परिभाषा नहीं
भारत में दुर्लभ बीमारियों की में कोई निश्चित परिभाषा नहीं है. ऐसे देखा जाए तो भारत में करीब 450 बीमारियों को दुर्लभ श्रेणी में रखा गया है. इनमें गौचर रोग, सिकल-सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, ऑटो-इम्यून रोग, हीमोफिलिया और सिस्टेम फाइब्रोसिस सबसे आम हैं. दुर्लभ बीमारी एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति होती है जिसका प्रचलन लोगों में प्रायः कम पाया जाता है.

सामान्य बीमारियों की तुलना में बहुत कम लोग दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित होते हैं. विभिन्‍न देशों में इसकी अलग-अलग परिभाषाएं हैं. सभी देश रोग की व्यापकता, गंभीरता और वैकल्पिक चिकित्सीय विकल्पों के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए इसको परिभाषित करते हैं. दुर्लभ बीमारियों की घटनाओं और व्यापकता पर महामारी विज्ञान के आंकड़ों की कमी है. 80 प्रतिशत दुर्लभ बीमारियां मूल रूप से आनुवंशिक होती हैं.
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