हर्ष फायरिंग पर रोक के लिए नीति बनाएं केंद्र : उच्च न्यायालय

भाषा
Updated: September 17, 2017, 1:16 PM IST
हर्ष फायरिंग पर रोक के लिए नीति बनाएं केंद्र : उच्च न्यायालय
प्रतीकात्मक फोटो (getty images)
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Updated: September 17, 2017, 1:16 PM IST
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र और अन्य प्राधिकारियों को जश्न के मौके पर की जाने वाली गोलीबारी पर लगाम लगाने के लिए तीन महीने के भीतर एक नीति बनाने के निर्देश दिए हैं. कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने प्राधिकारियों से कहा कि जश्न के मौके पर गोलीबारी पर लगाम लगाने के लिए सख्त नियमों की मांग करने वाली यह याचिका निश्चित तौर पर विरोधात्मक नहीं है और यह जनहित में है.

पीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा, यह महत्वपूर्ण मुद्दा है. प्राधिकारी इस याचिका को प्रतिनिधित्व के तौर पर लें और इस पर प्रभावी नीति बनाएं. यह तीन महीने के भीतर किया जाए.

यह याचिका उस लड़की के पिता ने दायर की थी जिसकी अप्रैल 2016 में एक विवाह समारोह के दौरान हर्ष में की गई गोलीबारी में मौत हो गई थी. उसके पिता ने दलील दी कि शादी और अन्य समारोह में जश्न के तौर पर की जाने वाली गोलीबारी अप्रिय चलन है जिससे आम जनता में भय उत्पन्न होता है.

याचिकाकर्ता श्याम सुंदर कौशल और एनजीओ फाइट फॉर ह्यूमैन राइट्स ने जश्न के मौके पर की जाने वाली गोलीबारी के अप्रिय चलन पर लगाम लगाने के लिए सख्त नीति, नियम बनाने के लिए गृह मंत्रालय को निर्देश देने की मांग की थी.

कौशल के वकील आकाश वाजपेई ने कहा, शादी में बंदूक लेकर जाना हथियार कानून, 1959 और भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत गैर कानूनी है और लाइसेंस की शर्तों में भी सार्वजनिक सभा में बंदूक लेकर जाने पर रोक है. याचिका में उन लोगों पर भारी जुर्माना लगाने के लिए भी मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है कि लोग अपने लाइसेंसी हथियारों का गलत इस्तेमाल न करें. साथ ही याचिका में जश्न के मौके पर की जाने वाली गोलीबारी में मारे गए या घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को मुआवजा देने की मांग भी की गई है.
First published: September 17, 2017
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