COVID-19: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी वैक्सीन पॉलिसी को बताया सही, कहा-दखल न दे अदालत

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

Centre Coronavirus Vaccine Policy: केंद्र सरकार ने कहा है कि वैक्सीन की कीमत का आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्य सरकारों ने लोगों को मुफ्त वैक्सीन देने का ऐलान किया है.

  • Last Updated: May 10, 2021, 10:54 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में अपनी वैक्सीन पॉलिसी को सही ठहराया है. केंद्र सरकार का कहना है कि वैक्सीन की कीमत और वैक्सीन देने की प्रक्रिया को बहुत सोच समझ कर बनाया गया है और इसमें सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए. हालांकि सोमवार को इस मामले में सुनवाई नहीं हो पाई क्योंकि केंद्र सरकार का हलफनामा रविवार को देर रात जमा किया गया और जजों को इसे पढ़ने का मौका नहीं मिला. अब इस मामले में गुरुवार को सुनवाई होगी.


इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि वैक्सीन की कीमत केंद्र और राज्य सरकारों के लिए अलग क्यों है. साथ ही ये भी पूछा गया था कि गरीब लोग अगर वैक्सीन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते, तो उनको वैक्सीन कैसे मिलेगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार से अपनी वैक्सीन नीति पर दोबारा विचार करने को कहा था, लेकिन केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सरकार की नीति में कोई कमी नहीं है.


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केंद्र सरकार ने कहा है कि वैक्सीन की कीमत का आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्य सरकारों ने लोगों को मुफ्त वैक्सीन देने का ऐलान किया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि वैक्सीन बनाने वाली दोनों कंपनियां केंद्र सरकार को कम कीमत पर वैक्सीन दे रही हैं, जबकि राज्य सरकार को वही वैक्सीन ज्यादा कीमत पर बेची जा रही है.


इसके जवाब में केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि केंद्र ज्यादा तादाद में वैक्सीन खरीद रही है इसलिए उन्हें कम कीमत पर वैक्सीन मिल रही है, लेकिन केंद्र की नीति के मुताबिक हर राज्य को एक ही कीमत पर वैक्सीन बेची जाएगी. ऐसा नहीं होगा कि किसी राज्य को ज्यादा और किसी को कम कीमत पर वैक्सीन मिले.


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केंद्र के मुताबिक वैक्सीन किस कीमत पर केंद्र या राज्य को दी जा रही है इसका आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्य सरकारों ने लोगों को मुफ्त वैक्सीन दिलवाने का ऐलान किया है. साथ ही हलफनामे में ये भी कहा गया है कि राज्यों को जो वैक्सीन कोटा अलॉट होगा उसमें से आधा उन्हें निजी कंपनियों या निजी अस्पतालों को देना होगा. जो लोग वो कीमत चुका पाएंगे वो निजी अस्पताल में वैक्सीन लगवाएंगे. इससे राज्य सरकार पर बोझ कम हो जायेगा.



केंद्र सरकार ने तर्क दिया है कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने वैक्सीन बनाने में पैसा निवेश करने का रिस्क लिया है इसलिए इस बात का ध्यान कीमत तय करने में रखना होगा. इस मामले में अब गुरुवार को सुनवाई होगी जब राज्य सरकारें भी अपना पक्ष रखेंगी.

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