केंद्र बनाम राज्य: केंद्र सरकार का दावा- ममता बनर्जी के सारे आरोप गलत

ममता बनर्जी का दूसरा आरोप ये है कि उन्हें पीएम मोदी का इंतजार करना पड़ा.. (फोटो: ANI)

ममता बनर्जी का दूसरा आरोप ये है कि उन्हें पीएम मोदी का इंतजार करना पड़ा.. (फोटो: ANI)

केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हर आरोप को सिलसिलेवार तरीके से खारिज कर दिया. न्यूज18 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी का हर आरोप बेबुनियाद और टकराव की तरफ बढ़ाने वाला है.

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बंगाल दौरे (PM Narendra Modi Bengal Visit) के बाद शुरू हुई बंगाल और केंद्र सरकार की तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है. पहले ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने पीएम मोदी की बैठक का बहिष्कार किया और फिर मुख्य सचिव के लेकर उठा विवाद, ममता ने इसके लिए केन्द्र सरकार को दोषी करार दिया है. केन्द्र सरकार इस तू-तू मैं-मैं में नहीं पड़ना चाहती है. केन्द्र सरकार के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि पीएम मोदी ने कोई मुद्दा खड़ा नहीं किया बल्कि उनके दिल में सिर्फ राहत की चिंता थी इसलिए वो ओडिशा भी गए और बंगाल भी. बहरहाल दोनों मुख्यमंत्रियों और राज्य सरकारों का रुख देख कर ही देश की जनता को समझ में आ गया होगा कि टकराव कौन चाहता था.

इस विवाद में पीएमओ और केन्द्र सरकार नहीं पड़ रही है. लेकिन केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हर आरोप को सिलसिलेवार तरीके से खारिज कर दिया. न्यूज18 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी का हर आरोप बेबुनियाद और टकराव की तरफ बढ़ाने वाला है.

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ममता के बैठक में नहीं आने की दलीलें और केन्द्र सरकार का पलटवार
बंगाल सरकार का पहला आरोप है कि उन्हें पीएम के कार्यक्रम और बैठक की सूचना देर से मिली और वे अपना कार्यक्रम छोटा करके पीएम के कार्यक्रम में पहुंची. लेकिन केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि पीएम का दौरा तूफान यास से हुए नुकसान का आकलन करना था. इसलिए तूफान आने से पहले दौरे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता था. पिछले साल भी अम्फान तूफान आने के बाद भी पीएम के दौरे के लिए एक टाइमलाइन का पालन किया गया था. इसलिए इस बार फिर ओडिशा और बंगाल का दौरा तय हो जाने के बाद, दोनों मुख्यमंत्रियों को साथ ही समय बताया गया था. लेकिन ओडिशा ने उस कार्यक्रम के सभी प्रोटोक़ॉल का पालन किया जबकि वो पीएम के बंगाल के दौरे से पहले था.

ममता बनर्जी का दूसरा आरोप ये है कि उन्हें पीएम मोदी का इंतजार करना पड़ा. जबकि केन्द्र सरकार के सूत्र बता रहे हैं कि पीएम कलाईकुंडा में दोपहर 13.59 पर उतरे और ममता बनर्जी 14.10 बजे वहां उतरीं. इससे ये साफ है कि पीएम को ही ममता का इंतजार करना पड़ा. पीएम के इंतजार करने की बात तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद के ट्वीट से भी पुख्ता हो जाती है जिसमें उन्होंने कहा है कि पीएम को इंतजार करना पड़ा है, इसमें बुराई क्या है. ममता बनर्जी अपने हेलीकॉप्टर से उतरकर बैठक की जगह पहुंची जो कि हेलीपैड से सिर्फ 500 मीटर दूर था. पीएम से मिलकर वो 14.35 पर वापस भी चली गयीं. इसलिए वो सिर्फ 500 मीटर चलीं और 25 मिनट में वापस चली गईं. उनका पहले वापस जाना भी प्रोटोकॉल के खिलाफ था. इसलिए बंगाल सरकार का ये दावा गलत है कि ममता ने इंतजार किया बल्कि इसके उलट पीएम को ही इंतजार करना पड़ा था.

ममता बनर्जी का तीसरा आरोप ये भी था कि उनके कार्यक्रम पहले से ही तय थे. साथ ही ये भी कहा गया कि ये जरूरी नहीं कि हर बार मुख्यमंत्री ही प्रधानमंत्री को रिसीव करे, सीएम के दूसरे कार्यक्रम भी तो हो सकते हैं. जबाव में केन्द्र सरकार के सूत्रों ने दावा किया कि ममता ने बैठक में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया था. लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्रम बदल लिया क्योंकि उस बैठक में बंगाल के नेता विपक्ष भी शामिल होने वाले थे. ये बात तो ममता बनर्जी ने अपने खत में भी लिखी है. इसलिए ये साफ है कि ये कोई मुद्दा नहीं कि उनका कार्यक्रम पहले से तय था. ये बात बंगाल के गवर्नर ने भी ट्वीट कर कही है कि ममता ने उन्हें फोन कर के कहा था कि अगर नेता विपक्ष पीएम की बैठक में होंगे तो वे बैठक का बहिष्कार करेंगी.



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ममता बनर्जी का चौथा आरोप है कि उन्हें सागर में 20 मिनट इंतजार करना पड़ा क्योंकि पीएम के हेलीकॉप्टर को कलाईकुंडा में उतरना था. उनके हेलीकॉप्टर को 15 मिनट तक हवा में घूमते रहना पड़ा. केन्द्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि प्रोटोकॉल के मुताबिक बतौर सीएम उनका पीएम से पहले आना अपेक्षित था. जैसा कि बाकी सभी मुख्यमंत्री करते हैं. पीएम की सुरक्षा का जिम्मा एसपीजी के पास है जो भारत के पीएम की सुरक्षा करने वाली एक प्रोफेशनल सरकारी एजेंसी है.

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ममता बनर्जी का पांचवा आरोप है कि मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाने के आदेश को लेकर उन्हें झटका लगा है और वे सदमें में हैं. ममता का आरोप है कि बिना राज्यों की सलाह के आदेश निकालना सही नहीं था और ये कानूनी रूप से मान्य नहीं है और असंवैधानिक भी है. जबकि केन्द्र सरकार ये दावा कर रही है कि ये आदेश पूरी तरह से संवैधानिक हैं. केन्द्र सरकार का कहना है कि मुख्य सचिव एक अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी होता है और उन्होंने अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं की. पीएम के सामने राहत के लिए कोई प्रेजेंटेशन नहीं हो सका और ना ही कोई बंगाल का अधिकारी पीएम की रिव्यू बैठक में शामिल हो पाया. मुख्य सचिव का रिटायरमेंट लेना साबित करता है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं. मुख्य सचिव का व्यवहार ऐसा रहा कि ऑल इंडिया सर्विस रूल के मुताबिक उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कारवाई की जाएगी. केन्द्र सरकार का कहना है कि ये मुख्य सचिव की ड्यूटी थी कि राहत के लिए ये रिव्यू बैठक सुनिश्चित की जाए. ममता बनर्जी जानती हैं ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी किसी भी राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकते इसलिए मुख्य सचिव का रियायरमेंट लेना उन्हें बचाने का ममता का आखिरी दांव था.

ममता बनर्जी का छठा आरोप है कि जब सिर्फ 3 महीने पहले ही मुख्य सचिव का कार्यकाल 3 महीने के लिए बढ़ाया गया था तो वो फैसला भी केन्द्र के साथ लिखित में सलाह करने के बाद ही लिया गया था. ये फैसला उस वक्त बंगाल के लिए खासा जरूरी था. इसलिए 24 मई को उनके कार्यकाल बढ़ाने का आदेश भी इसी तरह केन्द्र के साथ लिखित बातचीत के बाद हुआ. केन्द्र सरकार ने दावा किया कि मोदी सरकार द्वार मुख्य सचिव को चर्चा के बाद दिया एक्सटेंशन ही साबित करता है कि केन्द्र सरकार बंगाल सरकार के साथ सहयोग भी कर रही है और बिना किसी दुर्भावना के काम कर रही है.

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बंगाल विधानसभा के नेता विपक्ष शुभेन्दु अधिकारी को लेकर टकराव की राह पर ममता

ममता बनर्जी का सातवां आरोप पीएम मोदी की बैठक के रिवाइज्ड शेड्यूल पर है जिसमें बीजेपी के एक विधायक को जोड़ लिया गया. उस विधायक के पीएम और सीएम की बैठक में मौजूद होने का कोई औचित्य नहीं था. ममता बनर्जी ने कहा कि गवर्नर और केन्द्रीय मंत्रियों को राहत के लिए हुई बैठक में बुलाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी. इस पर सूत्रों ने बताया कि वो सिर्फ विधायक ही नहीं बल्कि बंगाल की विधानसभा में नेता विपक्ष है और जनता के चुने हुआ प्रतिनिधि भी है. देश भर में पीएम मोदी ने ऐसी कई बैठकें की हैं गैर बीजेपी शासित राज्यों में दूसरी पार्टी के नुमाइंदों को भी बैठकों में शामिल किया गया है.

ममता बनर्जी का आठवां आरोप पीएम सीएम की बैठक को लेकर उनकी मांग पर है. आरोप ये है कि बंगाल के मुख्य सचिव ने पीएम के साथ आ रहे एक वरिष्ठ अधिकारी को एक संदेश भेजा था कि आप सभी मुद्दे को सुलझा कर पीएम-सीएम की मीटिंग कराएं. लेकिन ममता बनर्जी को कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. ममता ने दावा किया कि उनकी सुरक्षा के निदेशक भी एसपीजी के साथ संपर्क में थे. जवाब में केन्द्र सरकार के सूत्रों ने दावा किया कि ममत बनर्जी ने बैठक का बहिष्कार किया क्योंकि उसमें बंगाल के नेता विपक्ष मौजूद थे. भारत सरकार ने कोई मुद्दा खड़ा नहीं किया था क्योंकि वक्त की मांग यही थी कि हम सब तूफान राहत पर चर्चा करें. केन्द्र सरकार ने दावा किया कि ममता को बताया गया था कि बैठक के खत्म होने के तुरंत बाद पीएम उनसे मिलेंगे क्योंकि वो सिर्फ इसी राहत बैठक क लिए बंगाल आए हैं. ममता को जब लगा कि उन्हें बैठक खत्म होने का इंतजार करना पडे़गा तो उन्होने अपने अधिकारियों को भी बैठक में जाने से रोकने के साथ साथ पीएम के साथ अपनी बैठक रद्द कर दी.


अब आखिरी नवें आरोप में ममता कहती हैं कि मैं जब मुख्य सचिव के साथ बैठक में पीएम को रिप्रेजेंटेशन देने पहुंची. तब पीएम ने रिप्रेजेंटेशन अपने हाथो में ले लिया. उसके बाद मैंने पीएम से दीघा जाने की इजाजत मांगी जहां मेरी बैठक होनी बाकी थी तो उन्होंने मुझे जाने की इजाजत दे दी थी. लेकिन केन्द्र सरकार के सूत्रों ने ये आरोप सिरे से खरिज कर दिया और कहा कि पीएम मोदी ने ममता बनर्जी को जाने की इजाजत नहीं दी थी.

ये टकराव जल्दी खत्म होने वाला नजर नहीं आ रहा. क्योंकि बंगाल पर वर्चस्व की लड़ाई इस बार ममता बनर्जी भले ही जीत गयीं हो लेकिन नतीजों के बाद की हिंसा ने जता दिया है कि तल्खियां बरकरार रहेंगी.

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