धान की MSP में केंद्र ने किया 72 रुपये का इज़ाफा, चुनावों में किसान आंदोलन बनेगा मुद्दा!

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने शुरू किया ‘मिनी किट’ कार्यक्रम

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने शुरू किया ‘मिनी किट’ कार्यक्रम

धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में केंद्र सरकार ने जो मामूली बढ़ोतरी की है. उसे मुख्यमंत्री ने तीन कानून के खिलाफ कृषि आंदोलन कर रहे किसानों की बेइज्जती करार दिया है. केंद्र ने दो दिन पहले धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 72 रुपये का इजाफा करते हुए 2021-22 के मौसम में प्रति क्विंटल कीमत 1940 रुपये तय की है.

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चंडीगढ़. पंजाब में सत्तारूढ कांग्रेस पार्टी में चल रही अंतर्कलह के बीच मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amrinder Singh) को एक ऐसा मुद्दा मिल गया है, जिसने उनके आत्मविश्वास को तो बढ़ा ही दिया है. साथ ही वो इस मुद्दे के सामने फिलहाल कोई और बात करने के मूड में नहीं नज़र आ रहे हैं. दरअसल धान की सरकारी खरीदी के दाम में केंद्र सरकार ने बहुत ही मामूली सा इज़ाफा किया है. पंजाब की कैप्टन सरकार का कहना है कि किसानों के साथ ऐसा कृषि कानून को लेकर चल रहे विरोध के चलते गतिरोध पैदा करने के लिए किया गया है. कैप्टन गुट के लोग इसे 2022 विधानसभा चुनाव में एक सुनहरे मौके की तरह देख रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में केंद्र सरकार ने जो मामूली बढ़ोतरी की है. उसे तीन कानून के खिलाफ कृषि आंदोलन कर रहे किसानों की बेइज्जती करार दिया है. केंद्र ने दो दिन पहले धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 72 रुपये का इजाफा करते हुए 2021-22 के मौसम में प्रति क्विंटल कीमत 1940 रुपये तय की है.

कटाई के वक्त चुनावी मौसम रहेगा जोर

वर्तमान में जो धान बोयी गई है उसकी कटाई इस साल अक्टूबर-नवंबर के बीच की जाएगी. यानि ठीक तभी जब चुनाव का मौसम पूरे जोर पर होगा. मुख्यमंत्री का कहना है कि डीजल और दूसरी चीजों के दामों में हुई अभूतपूर्व बढ़ोतरी के बाद 4 फीसद का इज़ाफा ऊंट के मुंह में जीरा साबित होगा. इतने पैसों में तो किसान की लागत भी नहीं निकल पाएगी.
नहीं पूरा होगा एनडीए सरकार का वादा

यही नहीं शिरोमणि अकाली दल ने भी अपने पूर्व पाटर्नर की इस कदम के लिए आलोचना की और कहा कि एमएसपी को 72 रुपये करने से किसानी और पीछे चली जाएगी. न कि आय दोगुनी होगी जैसा कि एनडीए सरकार ने वादा किया था. इस बढ़ोतरी से तो लागत भी वसूल नहीं होगी.

कैप्टन खेमा भी चुप नहीं है और कहता है कि शिरोमणि अकाली दल पाखंड दिखा रहा है. पंजाब के एक कांग्रेस नेता का कहना है कि एनडीए के साथ रहते हुए ने किसानों के लिए क्या किया. वो तो लागत की औसत के 50 प्रतिशत से ऊपर भी एमएसपी को नहीं ला पाए जो दरअसल स्वामीनाथन समिति की सिफारिश भी थी.



केंद्र सरकार के अधिकारी का कहना हे कि एक अनुमान के मुताबिक किसानों के लिए इस साल धान की लागत 1293 प्रति क्विंटल है और किसानों को वर्तमान खरीफ मौसम में लागत से 50 फीसद ज्यादा का मुनाफा हुआ और ये तब हुआ जब एमएसपी 1940 रुपये थी. यही नहीं केंद्र ने साल 2020-21 में 816 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी करी जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है जबकि इससे पहले साल यानि 2019-20 में ये खरीद 773 लाख मीट्रिक टन थी.


वहीं कांग्रेस और SAD ने एक बार फिर केंद्र पर नाराज़ किसानों का साथ न देने को लेकर हमला बोला है. सीएम का कहना है कि केंद्र को किसानों से बात करनी चाहिए, वहीं सुखबीर बादल ने कहा है कि दिल्ली की सीमा पर बैठे किसानों के दर्द के प्रति सरकार को संवेदनशील होना होगा. वहीं केंद्र का दावा है कि हालिया खरीफ और रबी मौसम में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद हुई है जो बताता है कि एमएसपी कहीं नहीं जा रहा.

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