केन्द्र सरकार को भरोसा कि जल्दी ही दवा और वैक्सीन की कमी का दौर खत्म होगा

10 अप्रैल के बाद अब कुल 57 दवा की फैक्ट्रियां हर रोज 1.07 करोड वियाल का उत्पादन कर रही है, (File pic)

10 अप्रैल के बाद अब कुल 57 दवा की फैक्ट्रियां हर रोज 1.07 करोड वियाल का उत्पादन कर रही है, (File pic)

केंद्र सरकार का दावा कि शुरुआती कमियों के बाद अब रेमडेसिविर का उत्पादन और उनका राज्यों के बीच बंटवारे का काम सुचारु रुप से चल रहा है. जब इसकी मांग बढने लगी तब केन्द्र सरकार ने 7 कंपनियों की बैठक बुलाकर कीमतें तय कर दीं थी. ये कीमत 3500 रुपये थी. रेमडेसिविर की फारमूलेशन के साथ 7 बड़ी कंपनियों के साथ करार किया.

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नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी ने बंगाल चुनाव के बाद कोरोना के अलावा किसी भी मुद्दे पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रखा है. लगभग एक महीना पूरा होने को आया लेकिन पीएम मोदी न थके हैं और न ही रुके हैं. हर दिन कोरोना से जुड़े हर स्टेक होल्डर्स से बात कर रहे हैं. ऑक्सीजन की किल्लत हुई तो मोदी सरकार ने तमाम सरकारी मशीनरी को एकजुट कर दिया. रेमडेसिविर की मुश्किल आयी तो सरकार ने इसका उत्पादन बढ़ा दिया.

अब वैक्सीनेशन की दिक्कतें आ रही हैं और दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र सरकार आरोप लगाने में लगी है तो मोदी सरकार ने इसकी कमी दूर करने के लिए भी देश में उत्पादन बढ़ाने और दुनिया भर से दवा आयात को बढ़ाने के लिए बड़ी कंपनियों के साथ बात करने में लगी है.

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18-45 उम्र के लोगों की वैक्सिनेशन प्रक्रिया आसान होने में लगेंगे एक महीने
सरकारी सूत्रों का दावा है कि भारत किसी भी अन्य देश से ज्यादा वैक्सीनेशन कर रहा है. केन्द्र सरकार का कहना है कि उन्होंने किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया. सरकारी सूत्रों का दावा है कि वो इसकी उपलब्धता और राज्यों की जरूरत के मुताबिक ही उन्हें अलॉट कर रहे हैं. सरकार ने संकेत दिए हैं कि कोवैक्सीन के फॉर्मूलेशन बांटने में उन्हें कोई मुश्किल नहीं हैं. भारत की कोई भी कंपनी जिसके पास अपना इंफ्रास्ट्रक्चर हो और वो ये वैक्सीन बनाने में सक्षम हो, वो सरकार से सहमति और फार्मूला लेकर इसका उत्पादन शुरू कर सकता है.

सूत्र बताते हैं इस दिशा में काम भी शुरू हो चुका है. सरकार ने वैक्सीन का उत्पादन और उपलब्धता बढ़ाने के लिए दुनिया भर की बड़ी कंपनियों से बात कर रही है. एमएनसी जैसे फाईजर, जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कंपनियों से भारत में दवा भेजने और यहीं बनाने की बात शुरू हो चुकी है. नोवा वैक्स का तीसरा ट्रायल चल रहा है. सरकार को उम्मीद है कि जल्दी ही इसे भी मंजूरी मिल जाएगी. स्पूतनिक का आयात शुरू हो चुका है. स्पूतनिक के 7-8 प्लांट अब भारत में उत्पादन में लग गए हैं. देश बड़ा है और 18-45 साल उम्र के लोगों की आबादी भी बड़ी है. इसलिए इस उम्र के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया आसान होने में अभी एक महीने और लग सकते हैं. सरकार न सिर्फ देश में भी उत्पादन बढ़ा रही हैं बल्कि आयात भी अधिक मात्रा में करने का फैसला लिया है.

रेमडेविसिर की किल्लत अगले सप्ताह से दूर होने के आसार



केंद्र सरकार का दावा कि शुरुआती कमियों के बाद अब रेमडेसिविर का उत्पादन और उनका राज्यों के बीच बंटवारे का काम सुचारू रूप से चल रहा है. जब इसकी मांग बढ़ने लगी तब केन्द्र सरकार ने 7 कंपनियों की बैठक बुलाकर कीमतें तय कर दीं थी. ये कीमत 3500 रुपये थी. रेमडेसिविर की फॉर्मूलेशन के साथ 7 बड़ी कंपनियों के साथ करार किया. जब महाराष्ट्र ने आरोप लगाया कि वहां की कंपनी भी दवा बना सकती है लेकिन इजाजत नही मिल रही. तो केन्द्र ने न सिर्फ इजाजत दी बल्कि उनकी पूरी की पूरी दवा खरीदने की शुरुआत भी कर दी. 10 अप्रैल से पहले सिर्फ 20 प्लांटों पर रेमडेसिविर बन रहा था जिसमें हर रोज 3.25 लाख वियाल रेमडेसिविर के बन रहे थे. लेकिन राज्य सरकारों ने दवा की कमी की शिकायत की.केन्द्र सरकार ने अब इसका फार्मुला शेयर कर इसका उत्पादन बढ़ा दिया है.

10 अप्रैल के बाद अब कुल 57 दवा की फैक्ट्रियां हर रोज 1.07 करोड वियाल का उत्पादन कर रही हैं. सरकार मानती है कि अभी भी इस दवा की मांग आपूर्ति से ज्यादा है. इस बढ़ाने की पूरी तैयारी में सरकार लगी हुई है. सरकार को उम्मीद की अगले सप्ताह से एक्टीव केस कम होने लगेंगे और दवा का उत्पादन भी इतना बढ़ जाएगा की हर राज्य को उसकी जरूरत के मुताबिक दिए जा सकेंगे. सरकार ने ये भी संकेत दिए हैं कि कोरोना की ये दूसरी लहर कम होने के बाद भी इसका उत्पादन कम नहीं किया जाएगा. क्योंकि सरकार इसके स्टॉक बचा कर रखेगी, ताकि अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है तो उस समय इसकी किल्लत न हो पाए.

आइवरमेक्टिन के उत्पादन की लगातार निगरानी

हर महीने देश मे 30 करोड़ बनायी जा सकती हैं. अब तक 7 करोड के आर्डर मिल चुके हैं. 6-7 कंपनियां इसका उत्पादन कर रही हैं. हम इसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं.

मोदी सरकार ने कोरोना से लड़ाई जीतने के लिए तमाम कोशिशें जारी रखी हैं. पीएम मोदी लगातार तमाम फैसलों और उनके क्रियान्वयन की लगातार निगरानी कर रहे हैं. तभी तो कोरोना की दूसरी लहर के बीच दुनिया भर से मदद आना और देश में दवा से लेकर वैक्सीन का उत्पादन बढा कर ये जता दिया है कि अब जल्दी ही हालात काबू मे होंगे.

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