टिड्डियों के आक्रमण को कंट्रोल करेगा केंद्र सरकार का ये मास्टर प्लान!

टिड्डियों के आक्रमण को कंट्रोल करेगा केंद्र सरकार का ये मास्टर प्लान!
टिड्डियों के हमले से चिंतित केन्द्र सरकार भी हरकत में आ गई है.

ये टिड्डियां (Locusts) पहले आने वाले दलों से बिल्कुल अलग हैं. इस बार नए प्रकार के टिड्डी जो गुलाबी रंग के हैं, खासी ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं और दिन में ही एक खासी दूरी तक यात्रा कर लेते हैं.

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टिड्डियां (Locusts) पाकिस्तान की सीमा से भारत में घुसने के बाद हवा के बहाव के साथ राजस्थान (Rajasthan) से निकल कर मध्यप्रदेश, पंजाब की तरफ बढ़ने लगी हैं. फसलों और हरे भरे पेड़ों को नष्ट करना भी किसानों (Farmers) और सरकार के लिए सिरदर्द बन गया है. ये टिड्डियां (Locusts) पहले आने वाले दलों से बिल्कुल अलग हैं. इस बार नए प्रकार के टिड्डी जो गुलाबी रंग के हैं, खासी ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं और दिन में ही एक खासी दूरी तक यात्रा कर लेते हैं. ये रात कों पेड़ों के ऊपर रुकते हैं और दिन को उड़ान भरते हैं. ये टिड्डियां जून-जुलाई के महीने में पाकिस्तान की सीमा से भारत के रेगिस्तानी इलाकों में प्रवेश करती हैं और बारिश का महीना उनके प्रजनन का होता है. इसके पहले अप्रैल 11 से 30 तक भारत में घुसे टिड्डियों को नियंत्रित किए जाने में सरकार को सफलता मिली थी. इसके पहले 11 मार्च को FAO ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जिसमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था ताकि एक मिली जुली रणनीति बनाई जा सके. FAO की मानें तो पूर्वी अफ्रीका से लेकर भारत-पाकिस्तान सीमा (India-Pakistan border) पर स्थिति खराब है क्योंकि बारिश मे प्रजनन बढ़ेगा.

6 मई को हुई थी समीक्षा बैठक
भारत में 2 लाख स्क्वायर किलोमीटर इलाका रेगिस्तानी माना जाता है और टिड्डियों के हमले से चिंतित केन्द्र सरकार भी हरकत में आ गई है. कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने 6 मई को इसके नियंत्रण की समीक्षा के लिए एक बैठक की. इसमें प्रभावित राज्यों और जिलों के जिलाधिकारियों से बात भी की. इसके बाद टिड्डी चेतावनी संगठन के अलावा 10 टिड्डी सर्किल कार्यालय को सक्रिय कर दिया गया है. ये कार्यालय राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर, चुरु, फलौदी, बारमेर, जालौर, नागौर और सूरतगढ में हैं और गुजरात के पालनपुर और भुज में काम कर रहे हैं. टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए राजस्थान, पंजाब, गुजरात और मध्यप्रदेश में ऑपरेशन शुरु कर दिया है. कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर ने ब्रिटेन से अतिरिक्त 60 स्प्रेयरों की खरीद की स्वीकृति दी है जिनको जल्दी ही नियंत्रण के काम में लगा दिया जाएगा.

केंद्र सरकार ने निकाले ई टेंडर



ई टेंडर भी निकाले गए ताकि नियंत्रण में लगी ऐजेंसियों को द्रोण और हवाई स्प्रे में मदद मिल सके. सीविल एविएशन मंत्रालय ने भी रिमोट कंट्रोल से हवा से दवा छिड़काव करने की इजाजत सरकारी ऐजेंसियों को दे दी है. 55 अतिरिक्त वाहनों की खरीद के आदेश दिए गए हैं. टिड्डी कंट्रोल संगठन ने 53000 लीटर कीटनाशक मालाथिओन का स्टॉक इस्तेमाल कर रही है. राजस्थान में 2.86 करोड रुपये की लागत से बने 800 स्प्रेयर लगे ट्रैक्टरों का आवंटन किया गया है. आज की स्थिति में सक्रिय लेकिन अविकसित टिड्डियों के झुंड राजस्थान के बारमेड, जोधपुर, गंगानगर, हनुमानगढ, सीकर, जयपुर, मध्यप्रदेश के सतना, ग्वालियर, सीद्धी, रायगढ, बैतुल, देवास, अगर और मालवा जिले तक फैलने लगे हैं. लगभग 200 से ज्यादा टिड्डी सर्कल ऑफिस और अस्थाई कैम्पों से सर्वेक्षण और कंट्रोल का काम चल रहा है. राजस्थान के अजमेर, चित्तौडगढ, दौसा और मध्यप्रदेश के मंदसौर, उज्जैन और शिवपुरी में अस्थाई कैंप बनाए गए हैं. राजस्थान के 21 जिले, मध्यप्रदेश के 18 जिले, पंजाब का एक और गुजरात के 2 जिलों में टिड्डी कंट्रोल का काम चल रहा है. इन राज्यों अब तक 303 स्थानों पर 47,308 हेक्टेयर जमीन पर टिड्डियों के झुंड को नियंत्रित किया जा चुका है.



जानिए टिड्डियों के बारे में...
दरअसल टिड्डी शाकाहारी घास फूस खाने वाले माइग्रेटरी कीडे हैं जो एक सात सैकडों किलोमीटर तक यात्रा कर सकते हैं. ये किसी भी सीमा को नहीं मानते और झुडों में फसलों पर हमला बोलते हैं. अफ्रीका मे पाए जाने वाले ये टिड्डी , मध्य पूर्व एशिया और एशिया के 60 से अधिक देशों में फैले हुए हैं और अगर झुंड उड़ते रहे तो धरती के 60 फीसदी जमीनी इलाकों तक पहुंच सकते हैं. एक अनुमान के मुताबिक ये टिड्डियां मानव आबादी के 1/10वें हिस्से के जीवनयापन के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं. अफ्रीका, खाड़ी के देशों और दक्षिण पश्चिम एशिया से गर्मियों के दौरान भारत की तरफ ये टिड्डियां बढी चली आती हैं और भारी मात्रा में प्रजनन करती हैं. और यही फसलों और पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है. कोराना संकट और तमाम दिशा निर्देशों के बावजूद इस संकट से जुझने मे सरकार कोताही नहीं बरत रही.

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First published: May 28, 2020, 5:05 PM IST
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