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महबूबा के बाद फारूक अब्दुल्ला भी बोले- चीन की तरह पाकिस्तान से भी बात करे केंद्र सरकार

नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला (फ़ाइल फोटो)
नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला (फ़ाइल फोटो)

Jammu Kashmir: फारूक अब्दुल्ला के इस बयान से पहले रविवार को ही जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी केंद्र सरकार से पाकिस्तान से बातचीत करने का अनुरोध किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 11:46 PM IST
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श्रीनगर. नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला (NC Chief Farooq Abdullah) ने कहा है कि केंद्र सरकार को चीन (China) की तरह पाकिस्तान (Pakistan) से बातचीत करनी चाहिए. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि "यह सच है कि आतंकवाद आज भी मौजूद है. वह जब कहते हैं कि इसका खात्मा हो गया है तो वे झूठ कहते हैं. अब्दुल्ला ने कहा कि अगर हम आतंकवाद को खत्म करना चाहते हैं, तो हमें अपने पड़ोसियों से इस बारे में बातचीत करनी होगी. मुझे वाजपेयी की बात याद है कि दोस्त बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं."

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैं केंद्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि जिस तरह एलएसी से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पीछे हटने को लेकर चीन से बातचीत की थी उसी तरह वह पाकिस्तान से भी बातचीत करके कोई रास्ता निकालें. फारूक अब्दुल्ला के इस बयान से पहले रविवार को ही जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी केंद्र सरकार से पाकिस्तान से बातचीत करने का अनुरोध किया. महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ना तो युद्ध और ना ही बंदूक कोई समाधान है तथा जम्मू कश्मीर मुद्दे का हल भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ बातचीत के जरिए हो सकता है.

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महबूबा ने कुपवाड़ा जिले के जिरहामा इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि केंद्र सरकार को वार्ता प्रक्रिया में केंद्र शासित प्रदेश के लोगों को भी शामिल करना चाहिए. वह शुक्रवार को आतंकवादी हमले में मारे गये एक पुलिसकर्मी के परिवार से मिलने के लिए वहां गई थीं.
चीन के साथ बातचीत हो सकती है तो पाकिस्तान से भी संवाद जरूरी
महबूबा ने वहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें जम्मू कश्मीर में पिछले कई वर्षों में लोगों की जान जाने को लेकर खेद है. उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत, चीन के साथ बातचीत कर सकता है, तो पाकिस्तान के साथ भी वार्ता की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘चीन हमारे क्षेत्र में घुस गया और हमारे (सेना के) 20 जवानों को मार डाला. लेकिन, इसे बावजूद भी उसके साथ वार्ता की जा रही है, जो एक अच्छी चीज है. दर्जनों बार वार्ता हुई है और कुछ समाधान देखे जा सकते हैं.’’

पीडीपी प्रमुख ने कहा, 'जम्मू कश्मीर, भारत और पाकिस्तान के बीच जंग का मैदान बन गया है और लोग (पुलिसकर्मी, आम आदमी तथा सुरक्षाकर्मी) दोनों ओर (सीमा के) मारे जा रहे हैं.' उन्होंने कहा, 'किसी भी मुद्दे का समाधान युद्ध नहीं है. बंदूक से कोई मुद्दा नहीं सुलझा है--चाहे वह आतंकवादी हों या सुरक्षा बल. इसलिए, हमें सोचना चाहिए कि दुनिया में जिस तरह कोई भी मुद्दा वार्ता के जरिए सुलझाया जाता है, उसी तरह से पाकिस्तान के साथ भी तथा जम्मू कश्मीर में भी वार्ता करने की जरूरत है.'



पाकिस्तान के साथ वार्ता पर केंद्र के रुख के बारे मे पूछे जाने पर महबूबा ने कहा कि ऐसा लगता है कि ‘‘वे जम्मू कश्मीर के लोगों के मारे जाने से चिंतित नहीं हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ जब कभी जम्मू कश्मीर में वार्ता हुई या पाकिस्तान के साथ वार्ता हुई, जैसे कि 2003-04 में लाल कृष्ण आडवाणी के उप प्रधानमंत्री रहने के दौरान हुई, (पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज) मुशर्रफ के साथ वार्ता हुई, तब जम्मू कश्मीर में हिंसा में महत्वपूर्ण रूप से कमी आई थी, आतंकवादी घटनाओं में भी कमी आई थी.’’
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