केंद्र सरकार ने SC में बताया- कोविड 19 के दौरान आंगनवाड़ी कर्मचारियों ने किया बेहतर काम

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आंगनवाड़ी केंद्रों को दोबारा खोलने की मांग की गई है जिन्हें कोरोना के चलते बंद कर दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आंगनवाड़ी केंद्रों को दोबारा खोलने की मांग की गई है जिन्हें कोरोना के चलते बंद कर दिया गया है.

Covid-19: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है महामारी के दौरान आंगनवाड़ी कर्मचारियों के द्वारा किए गए काम बच्चों को मुहैया कराने वाले भोजन के वितरण पर विस्तृत हलफ़नामा दाख़िल करने के लिए कहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 6:05 PM IST
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नई दिल्ली. देशभर में बच्चों और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भोजन और समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. जस्टिस अशोक भूषण (Justice Ashok Bhushan) के तीन सदस्य जजों की पीठ में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार (Central Government) ने कहा कि देश भर में कोविड-19 की महामारी (Covid-19 Pandemic) के दौरान आंगनवाड़ी कर्मचारियों (Anganwadi Workers) द्वारा बेहतर कार्य किए गए.

केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Soliciter General Tushar Mehta) ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देते हुए कहा कि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान आंगनवाड़ी कर्मचारियों के द्वारा देशभर में बच्चों और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को हर दूसरे हफ्ते पौष्टिक भोजन मुहैया कराया गया है.

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मामले की सुनवाई करने वाले तीन सदस्य जजों की पीठ ने केंद्र सरकार की इस दलील को सुनने के बाद सरकार के वकील से कहा कि वह इस मामले में आने वाले हफ्ते में एक हलफनामा दाखिल करें. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है महामारी के दौरान आंगनवाड़ी कर्मचारियों के द्वारा किए गए काम बच्चों को मुहैया कराने वाले भोजन के वितरण पर विस्तृत हलफ़नामा दाख़िल करने के लिए कहा है.
याचिका में की गई थी आंगनवाड़ी केंद्र खोलने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आंगनवाड़ी केंद्रों को दोबारा खोलने की मांग की गई है जिन्हें कोरोना के चलते बंद कर दिया गया है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने दीपिका जगतराम साहनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि हम याचिका पर सुनवाई करेंगे. कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया था कि आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद किए जाने से गरीब बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के सामने विकट स्थिति पैदा हो गई है. साहनी ने अपनी याचिका में कहा है कि देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद होने से गरीब बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं को न तो समुचित भोजन मिल रहा है और न ही अन्य सुविधाओं का लाभ. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट केंद्र और राज्यों समेत सभी पक्षों को इन्हें भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निर्देश दे.
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