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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर काम नहीं रोकेगी केन्द्र सरकार

सेंट्रल विस्टा एवेन्यू में काम नवंबर 2021 तक पूरा होना है. (फाइल फोटो)

सवाल ये भी उठ रहा है कि नेशनल म्यूजियम जो 35000 स्क्वायर मीटर में फैला है से क्यों जमींदोज किया जा रहा है. सरकार ने पूरे देश को आश्वस्त किया है कि हर चीज को सुरक्षित रखा जाएगा और सही जगह पर फिर से स्थापित भी कर दिया जाएगा.

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दिल्ली के रायसीना हिल का कायाकल्प करने का जो काम शहरी विकास मंत्रालय ने शुरू किया था वो अब थमने वाला नहीं है. केन्द्र सरकार के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट और सेन्ट्रल विस्टा एवेन्यू का काम कोरोना संकट के बावजूद पूरा कर लिया जाएगा ताकि 26 जनवरी 2022 को गणतंत्र दिवस की परेड भी यहीं हो सके और लक्ष्य है कि नए संसद भवन का निर्माण नवंबर 2022 तक पूरा हो जाए ताकि दिसंबर 2022 का संसद का मानसून सत्र नए संसद भवन में ही हो. सूत्रों ने साफ कर दिया है कि मनगठंत आरोप लगाकर, उल्टी सीधी लागत बताकर और अब कोरोना के नाम पर इस प्रोजेक्ट को रोकने की बात करने वाले विपक्ष के दबाव में सरकार नहीं आएगी. सूत्रों के मुताबिक ये तमाम सेंट्रल विस्टा योजना कोरोना महामारी के फैलने के पहले की है और कोरोना के फंड से इसका कोई लेना देना नहीं. सरकार ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया कि पूरे प्रोजेक्ट पर 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं.

दरअसल सरकार की योजना है एक सेन्ट्रल विस्टा एवेन्यू और सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण की. सूत्र बताते हैं कि अभी सिर्फ दो प्रोजेक्ट को शुरू करने का टेंडर पास हुआ है. इन दो टेंडरों में ग्लोबल कंपनियों ने भी हिस्सा लिया था. इनमे से एक है संसद भवन परिसर में बनने वाला नया संसद भवन और राजपथ पर सेंट्रल विस्टा रोड के चौड़ीकरण की योजना. अगर पूरे सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की लागत का अनुमान लगाएं तो ये कुल मिला कर 17000 करोड़ रुपये के आस पास बैठता है. इस पूरे प्रोजेक्ट में कुल 11 बिल्डिंगें बनाने की योजना है जिसमें भारत के सभी 51 मंत्रालय और विभागों के दफ्तर होंगे. जैसे अगर बिल्डिंग डिफेंस इनक्लेव है तो उसमे तीनों सेनाओं का हेडक्वार्टर होगा. ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि एक मंत्रालय के सभी कार्यालय एक ही जगह मौजूद रहें. एक मंत्रालय से दूसरे मंत्रालय में जाने के लिए अंडरग्राउंड केबल मुवर यानि छोटे बैट्री चलित वाहन भी रहेंगे. ताकि इनके आगे गाड़ियों की भीड़ न लगे. अपनी कार पार्किंग में लगाकर लोग इन वाहनों से अपने मुकाम पर हर रोज पहुंच जाएंगे. खास बात ये है कि इसके पूरे निर्माण के बाद केन्द्र सरकार हर साल लगभग 1000 करोड़ रुपये भी बचा लेगी जो उसे दिल्ली भर में फैले मंत्रालयों के बने दफ्तरों के लिए देने पड़ते हैं.

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सवाल ये भी उठ रहा है कि नेशनल म्यूजियम जो 35000 स्क्वायर मीटर में फैला है से क्यों जमींदोज किया जा रहा है. सरकार ने पूरे देश को आश्वस्त किया है कि हर चीज को सुरक्षित रखा जाएगा और सही जगह पर फिर से स्थापित भी कर दिया जाएगा. जब काम पूरा होगा तब पुराने संसद भवन, नार्थ और साउथ ब्लॉक को भी हैरीटज साइट के रूप में विकसित किया जाएगा और उनके सौंदर्यीकरण का काम भी शुरू किया जाएगा. सेन्ट्रल विस्टा का ये इलाका आम लोगों और सैलानियों के लिए खुला होगा ताकि लोग घूमने का लुत्फ भी उठा सकें और अपने इतिहास के बारे में भी जानकारी पा ले. शहरी विकास मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि कुल 18 जगहों पर काम चल रहा और पूरा निर्माण करने के बाद भी सरकार के पास लगभग 2 हेक्टेयर जमीन बच ही जाएगी.

बदलेगा प्रधानमंत्री आवास का पता
अब बात उपराष्ट्रपति के निवास की. इसे भी तोड़ा जाएगा और नया उपराष्ट्रपति निवास बनेगा नार्थ ब्लॉक के ठीक पीछे के इलाके में. इसी तर्ज पर प्रधानमंत्री का आवास भी 7 एलकेएम से बदल जाएगा. सरकार का कहना है कि ये पीएम मोदी नहीं बल्कि देश का कोई भी पीएम बनेगा उसका अधिकारिक आवास होगा. सुरक्षा कारणों से ही सही पूरे विस्टा प्रोजेक्ट के तैयार होने के बाद पीएम आवास उनके साउथ ब्लॉक कार्यालय के पीछे होगा और उनके कार्यालय आने जाने का रास्ता अंडरग्राउंड ही रहेगा. इसलिए लोगों का सवाल उठाना कि ये पीएम मोदी के बन रहा है बिल्कुल ही हास्यास्पद है और पीएम आवास पर कुल खर्च की एक बहुत ही छोटा हिस्सा है. यहां तक की श्रम शक्ति भवन, ट्रांसपोर्ट भवन, शास्त्री भवन, उद्ग भवन, निर्माण भवन, आईजीएनसीए जैसी बिल्डिंगे जमींदोज होगी. पर्यावरण विभाग की मंजूरी से लेकर इन 11 बिल्डिंगों के बनाने की कुल लागत अब तक 13,540 करोड़ रुपये है.

राजपथ पर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है. 400 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में अभी 400 मजदूर काम पर लगे हैं. सरकार का दावा है कि कोरोन के तमाम प्रोटोकॉल को पूरा करते हुए मजदूरों के रहने से लेकर उनकी जांच, इलाज तक की व्यवस्था सरकार कर रही है. ये कोविड काल शुरू होने से पहले का प्रोजेक्ट है.

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शहरी विकास मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इसके लिए किसी और काम के लिए आवंटित बजट से कोई पैसा नहीं लिया गया है. इस विस्टा प्रोजेक्ट के लिए अपना अलग बजट है. सरकार जानती है कि कोरोना के लिए वैक्सीन और दवाओं का संकट महीने डेढ़ महीने में कम होना शुरू हो जाएगा और न ही सरकार के पास कोरोना से लड़ने के लिए किसी भी तरह से फंड की कमी है. इसलिए विपक्षी कांगेस का विरोध बेमानी है. 100 साल पहले अंग्रेजों ने जो निर्माण कार्य किया था जो अब तक सुचारु रूप से चलता रहा. अब मोदी सरकार ने भविष्य की जरूरतों और आने वाली मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए रायसीना हिल इलाके में सेंट्रल विस्ट बनाने की शुरुआत की है जो आने वाली पीढ़ियों के ही काम आने वाली है.
Published by:Mahima Bharti
First published: