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सेंट्रल विस्टा: दिल्‍ली वक्फ बोर्ड की याचिका पर HC ने केंद्र को समय दिया

दिल्ली हाईकोर्ट. ( फाइल फोटो )

दिल्ली हाईकोर्ट. ( फाइल फोटो )

दिल्ली उच्च न्यायालय (DELHI HIGH COURT) ने मंगलवार को केंद्र सरकार (Central Government) को दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) की उस याचिका पर जवाब देने के लिए समय दिया, जिसमें उसकी विरासत संपत्तियों के संरक्षण और सुरक्षा का अनुरोध किया गया है. इन संपत्तियों के वर्तमान में जारी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना (Central Vista project) से प्रभावित होने की संभावना है.

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    नयी दिल्ली . दिल्ली उच्च न्यायालय (DELHI HIGH COURT) ने मंगलवार को केंद्र सरकार (Central Government) को दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) की उस याचिका पर जवाब देने के लिए समय दिया, जिसमें उसकी विरासत संपत्तियों के संरक्षण और सुरक्षा का अनुरोध किया गया है. इन संपत्तियों के वर्तमान में जारी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना (Central Vista project) से प्रभावित होने की संभावना है. बोर्ड ने उस क्षेत्र में अपनी छह संपत्तियों के संरक्षण और सुरक्षा की मांग की है, जहां पुनर्विकास कार्य चल रहा है.

    बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि संरक्षण और सुरक्षा के लिए इसमें मानसिंह रोड पर मस्जिद ज़ब्ता गंज, रेड क्रॉस रोड पर जामा मस्जिद, उद्योग भवन के पास मस्जिद सुनहरी बाग रोड, मोती लाल नेहरू मार्ग के पीछे मजार सुनहरी बाग, कृषि भवन परिसर के अंदर मस्जिद कृषि भवन और भारत के उपराष्ट्रपति के आधिकारिक आवास परिसर में स्थित मस्जिद शामिल हैं. अदालत ने कहा कि वह मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को करेगी. केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा से कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर बोर्ड की याचिका पर सरकार के निर्देश के आधार पर जवाब सौपेंगे.

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    दिल्ली वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ वकील ने आग्रह किया कि तब तक संपत्तियों की सुरक्षा के संबंध में सॉलिसिटर जनरल द्वारा आश्वासन दिया जाए. हालांकि, न्यायाधीश ने जवाब दिया कि इस तरह का आश्वासन चल रहे काम पर ‘अप्रत्यक्ष रोक’ होगा. अदालत ने कहा, उन्हें आश्वासन क्यों देना चाहिए? यह एक अप्रत्यक्ष रोक होगी. परियोजना एक विशेष रूप में जारी है. एक टाइमलाइन है. उन्होंने इसे (संरचनाओं को) ध्यान में रखा होगा.

    उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय परियोजना पर रोक लगाने से पहले ही इनकार कर चुका है. बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कहा कि उनके मुवक्किल का जारी परियोजना में किसी भी तरह से बाधा डालने का इरादा नहीं है, लेकिन केवल ‘स्पष्टीकरण चाहते हैं कि सरकार इन धार्मिक स्थलों की अखंडता का सम्मान करेगी.’

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