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मोदी सरकार ने उग्रवादी संगठन को दिया जवाब- नगालैंड का अलग संविधान और झंडा नहीं होगा

News18Hindi
Updated: October 19, 2019, 11:30 PM IST
मोदी सरकार ने उग्रवादी संगठन को दिया जवाब- नगालैंड का अलग संविधान और झंडा नहीं होगा
अगस्त 2015 में नगा समूह और सरकार के बीच समझौते पर सहमति बनी थी, लेकिन दोनों पक्ष अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच सके. फाइल फोटो : पीआईबी

नगालैंड (Nagaland) का उग्रवादी समूह एनएससीएन-आईएम (NSCIN-IM) लंबे समय से नगालैंड के लिए अलग संविधान और अलग झंडे की मांग कर रहा है. इसके साथ ही सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकार नगा समूहों के साथ बंदूकों के साए में अंतहीन बातचीत नहीं कर सकती.

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  • Last Updated: October 19, 2019, 11:30 PM IST
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नई दिल्‍ली: केंद्र सरकार (Modi Government) ने नगालैंड में शांति समझौते (Nagaland Peace accord) पर चल रही बातचीत पर बड़ा संदेश दिया है. सरकार ने साफ कहा है कि नगालैंड के लिए अलग संविधान और अलग झंडे की मांग स्‍वीकार नहीं की जाएगी. बता दें कि नगालैंड (Nagaland) का उग्रवादी समूह एनएससीएन-आईएम (NSCIN-IM) लंबे समय से नगालैंड के लिए अलग संविधान और अलग झंडे की मांग कर रहा है. इसके साथ ही सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकार नगा समूहों के साथ बंदूकों के साए में अंतहीन बातचीत नहीं कर सकती. नगा वार्ता के लिए वार्ताकार और नगालैंड के राज्‍यपाल आरएन रवि ने कहा, सरकार बिना देरी के दशकों से चल रही बातचीत को जल्‍द से जल्‍द अंजाम तक पहुंचाकर खत्‍म करना चाहती है.

अपने बयान में राज्‍यपाल आरएन रवि (RN Ravi) ने कहा, परस्पर सहमति से विस्तृत समझौते का मसौदा तैयार किया गया है जिसमें सभी महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं. उन्‍होंने अपने बयान में कहा, दुर्भाग्‍य से ऐसे शुभ समय पर एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) ने एक रुढ़िवादी रवैया अपनाया है. अलग नगा राष्ट्रीय झंडा तथा संविधान जैसे विवादास्पद मुद्दों को उठा रहा है जिस पर वे भारत सरकार के रूख से पूरी तरह अवगत हैं.’

जम्मू कश्मीर पर फैसले के बाद सरकार का बयान अहम
रवि के बयान इसलिए मायने रखते हैं कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को पांच अगस्त को समाप्त करने की घोषणा कर दी थी और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बांट दिया था. विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा और संविधान भी समाप्त हो गया. सत्तारूढ़ भाजपा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई अवसरों पर स्पष्ट किया कि पूरे भारत के लिए वे केवल एक झंडे और एक संविधान में विश्वास करते हैं.

3 अगस्त 2015 को हुआ था समझौता
रवि ने कहा कि एनएससीएन-आईएम ने समझौते के प्रारूप को ‘शरारतपूर्ण तरीके’से लंबा खींचा है और इसमें काल्पनिक विषय डाल रहा है. समझौते के प्रारूप पर तीन अगस्त 2015 को एनएससीएन- आईएम के महासचिव थुइंगलेंग मुइवा और सरकार के वार्ताकार रवि ने प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे. रवि ने कहा कि एनएससीएन-आईएम के कुछ नेता विभिन्न मीडिया संगठनों के माध्यम से लोगों को ‘बेतुकी धारणाओं और पूर्व धारणाओं’से गुमराह कर रहे हैं और इस पर वे भारत सरकार के साथ पहले ही सहमत हो चुके हैं.

18 अक्टूबर को नगा जनजातियों के साथ बैठक
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एनएससीएन-आईएम के कुछ नेताओं के ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण रूख के कारण रवि ने 18 अक्टूबर को कोहिमा में नगा समाज के कुछ प्रमुख पक्षकारों के साथ लंबी बैठक की. बैठक में नगालैंड के 14 नगा जनजातियों, नगालैंड के सभी गैर नगा जनजाति, नगालैंड गांव बुढा संगठन, नगालैंड जनजाति परिषद्, गिरजाघर के नेताओं और नागरिक समाज संगठनों का शीर्ष नेतृत्व शामिल हुआ. बयान में कहा गया है कि नगा नेताओं ने समझौते के पक्ष में जोरदार समर्थन जताकर जिस राजनीतिक परिपक्वता और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया वह सराहनीय है.

इसमें कहा गया है, ‘नगा लोगों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए भारत की सरकार बिना किसी देरी के शांति प्रक्रिया को निष्कर्ष पर पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. बंदूकों के साये में अंतहीन वार्ता स्वीकार्य नहीं है.’
बयान में कहा गया है कि भारत सरकार वार्ता में शामिल सभी पक्षों से उम्मीद करती है कि लोगों की इच्छाओं पर ध्यान दें और तय समय के अंदर नगा शांति प्रक्रिया को निष्कर्ष पर पहुंचाने में मदद करें. समझौता प्रारूप 18 वर्षों तक 80 दौर की वार्ता के बाद आया है. इसमें पहली सफलता 1997 में मिली थी जब नगालैंड में दशकों तक उग्रवाद के बाद संघर्षविराम समझौता हुआ था. 1947 में भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद नगालैंड में उग्रवाद की शुरुआत हुई थी.

रवि ने कहा कि भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के गतिशील और निर्णायक नेतृत्व में नगा शांति प्रक्रिया को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है जो पिछले 22 वर्ष से अधिक समय से चल रहा है. उन्होंने कहा कि परिणामस्वरूप नगा शांति प्रक्रिया पिछले पांच वर्षों में वास्तव में समग्र बन गयी है और निष्कर्ष के चरण तक पहुंच चुकी है.

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First published: October 19, 2019, 8:29 PM IST
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