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समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता पर सुनवाई; केंद्र ने HC से कहा- प्रमाण पत्र बिना कोई मर नहीं रहा

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वर्तमान में देश एक महामारी से गुजर रहा है और देश का ध्यान उससे निपटने को लेकर है. फाइल फोटो

Same Sex Marriage Plea Hearing in High Court: विदेशी विवाह अधिनियम के तहत विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन को न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने खारिज कर दिया था.

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नई दिल्ली. महामारी के दौर में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के मुद्दे पर तत्काल सुनवाई की मांग पर केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष आपत्ति जताई है. केंद्र ने कोर्ट से कहा कि अभी के दौर में कई ऐसे जरूरी मामले हैं, जिन पर सुनवाई की जरूरत है. विवाह प्रमाण पत्र के अभाव में किसी की जान नहीं जा रही है. सुनवाई के दौरान रोस्टर में बदलाव पर सवाल भी उठाया. कोर्ट ने रोस्टर के मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और सुनवाई 6 जुलाई के लिए स्थगित कर दी.

केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वर्तमान में देश एक महामारी से गुजर रहा है और देश का ध्यान उससे निपटने को लेकर है. अभी उसकी जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार वर्तमान में महामारी पर ध्यान दे रही है. विवाह प्रमाण पत्र नहीं रहने से अस्पताल में किसी को भर्ती होने से नहीं रोका जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि इन दिनों कानून अधिकारी भी महामारी से संबंधित मामलों से निपट रहे हैं.

कुछ याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल ने कहा कि सरकार को तटस्थ होना चाहिए और कोर्ट को तात्कालिकता निर्धारित करनी होगी. कुछ याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली वरिष्ठ वकील डॉ मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया कि इस देश में सात करोड़ एलजीबीटीक्यू लोग हैं. जवाब पिछले साल दायर तीन याचिकाओं के जवाब में था.

एक याचिका में, एक मनोचिकित्सक डॉ कविता अरोड़ा और एक चिकित्सक अंकिता खन्ना ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के लिए उनके आवेदन को दिल्ली के एक विवाह अधिकारी द्वारा खारिज कर दिए जाने के बाद, साथी की पसंद के मौलिक अधिकार को लागू करने की मांग की. दूसरी याचिका भारत के एक प्रवासी नागरिक कार्डधारक पराग विजय मेहता और एक भारतीय नागरिक वैभव जैन द्वारा दायर की गई थी, जिनकी 2017 में वाशिंगटन डीसी में शादी हुई थी.

विदेशी विवाह अधिनियम के तहत विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन को न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने खारिज कर दिया था. तीसरी जनहित याचिका, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत समान-विवाह को मान्यता देने के लिए, रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा और तीन अन्य लोगों द्वारा दायर की गई है.