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शंकराचार्य मंदिर से ग्वालियर किला, देश में बिछ जाएगा रोपवे का जाल; इन 18 परियोजनाओं पर काम करने जा रहा केंद्र

केंद्र सरकार आने वाले कुछ महीनों में करीब 90 किलोमीटर की कुल 18 रोपवे परियोजनाओं को शुरू करने की योजना बना रही है.

केंद्र सरकार आने वाले कुछ महीनों में करीब 90 किलोमीटर की कुल 18 रोपवे परियोजनाओं को शुरू करने की योजना बना रही है.

केंद्र सरकार आने वाले कुछ महीनों में करीब 90 किलोमीटर की कुल 18 रोपवे परियोजनाओं को शुरू करने की योजना बना रही है. इन प ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली: देश में आने वाले दिनों में पहाड़ी इलाकों में स्थित पर्यटन स्थलों पर यात्रा को सुगम बनाने के लिए रोपवे का जाल बिछने वाला है. केंद्र सरकार आने वाले कुछ महीनों में करीब 90 किलोमीटर की कुल 18 रोपवे परियोजनाओं को शुरू करने की योजना बना रही है. इन परियोजनाओं में श्रीनगर में शंकराचार्य मंदिर तक एक किलोमीटर लंबा रोपवे, कुरनूल में कृष्णा नदी के पार श्रीशैलम ज्योतिर्लिंग मंदिर तक रोपवे, लेह पैलेस और ग्वालियर किला तक रोपवे प्रोजेक्ट शामिल हैं.

दरअसल, News18 ने इस सप्ताह की शुरुआत में बताया था कि केंद्र ने पिछले शनिवार को इन 18 रोपवे परियोजनाओं में से एक उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के लिए 2 किमी लंबा रोपवे के निर्माण के लिए निविदाएं आमंत्रित कीं थीं. 11 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी के उज्जैन दौरे से पहले केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया था. अधिकारियों ने कहा कि इससे पहले केंद्र ने वाराणसी में एक रोपवे, केदारनाथ मंदिर के लिए एक रोपवे और उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब के लिए एक रोपवे विकसित करने के लिए निविदाएं मांगी थीं, जिन्हें इस साल के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है.

वहीं, जम्मू-कश्मीर से लेह, पूर्वोत्तर राज्यों जैसे त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के साथ-साथ तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में इस तरह की और भी परियोजनाएं हैं, जिन पर काम होना है. तमिलनाडु में पलानी से लोकप्रिय हिल स्टेशन कोडाईकनाल तक 12 किलोमीटर लंबा रोपवे प्रोजेक्ट बनाया जाएगा. अन्य बड़ी परियोजनओं में कर्नाटक के उडुपी जिले में कोडाचाद्री पहाड़ियों के लिए लगभग 7 किमी लंबा रोपवे और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बिजली महादेव मंदिर के लिए 3 किमी लंबा रोपवे शामिल है.

केंद्र सरकार के अधिकारियों की मानें तो जम्मू-कश्मीर में प्राचीन शंकराचार्य मंदिर के लिए रोपवे परियोजना के अलावा जम्मू क्षेत्र में माता वैष्णो देवी मंदिर के पास दर्शन देवपदी से शिवखोरी मंदिर तक 2 किमी लंबी रोपवे परियोजना की भी कल्पना की गई है. वहीं, महाराष्ट्र में केंद्र ने पुणे में राजगढ़ किले के लिए रोपवे की योजना बनाई है. इसके अलावा, आंध्र प्रदेश में श्रीशैलम मंदिर के लिए भी रोपवे बनेगा. इतना ही नहीं, दिल्ली-एनसीआर में वैशाली मेट्रो स्टेशन से गाजियाबाद के मोहन नगर मेट्रो स्टेशन तक 10 किलोमीटर लंबे रोपवे की भी योजना है.

दरअसल, देश के पहाड़ी इलाकों में रेल, बस या यातायात के अन्य साधनों की पहुंच अब भी पूरी नहीं हो सकी है. दुर्गम स्थानों पर सड़क बनवाना या रेल लाइन बिछाने का काम न सिर्फ कठिन है, बल्कि कई जगह तो प्राकृतिक कारणों से संभव भी नहीं है. इसलिए केंद्र सरकार ने पर्वतीय प्रदेशों में ट्रांसपोर्ट का नया साधन, रोपवे सिस्टम विकसित करने की योजना बनाई है. रोपवे परियोजनाओं में केबल कारों के माध्यम से प्रति घंटे 6000-8000 यात्रियों सफर कर सकते हैं और इसे पहाड़ी इलाकों में एक सीधी रेखा में बनाया जा सकता है. रोडवेज की तुलना में प्रति किलोमीटर निर्माण की अधिक लागत होने के बावजूद रोपवे परियोजनाओं की निर्माण लागत उसकी तुलना में अधिक किफायती होती है.

बताया जा रहा है कि सरकार उत्तराखंड में लगभग 30 किलोमीटर की कुल पांच और रोपवे परियोजनाओं के निर्माण के लिए फिजिबिलिटी स्टडी भी कर रही है. इतना ही नहीं, नासिक से त्र्यंबकेश्वर तक 5 किमी लंबा रोपवे बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है. यहां यात्रियों की यात्रा को आसान बनाने के लिए रोपवे बनाने की तैयारी चल रही है.

Tags: India news

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