लॉकडाउन में मानव तस्करी को लेकर केंद्र ने दी थी चेतावनी, 8 राज्यों ने नहीं लिया कोई एक्शन- रिपोर्ट

मंत्रालय ने राज्यों से हर जिले में तत्काल प्रभाव से एंटी ह्यूमन ट्रैफेकिंग यूनिट (Anti Human Trafficking Units) बनाने के निर्देश भी दिए थे. (प्रतीकात्मक फोटो)
मंत्रालय ने राज्यों से हर जिले में तत्काल प्रभाव से एंटी ह्यूमन ट्रैफेकिंग यूनिट (Anti Human Trafficking Units) बनाने के निर्देश भी दिए थे. (प्रतीकात्मक फोटो)

गृह मंत्रालय (MHA) ने लॉकडाउन में मानव तस्करी की आशंका को लेकर एडवाइजरी जारी की थी. इसमें मानव तस्करी जैसी घटनाओं से निपटने के उपाय भी सुझाए गए थे. मंत्रालय ने राज्यों से हर जिले में तत्काल प्रभाव से एंटी ह्यूमन ट्रैफेकिंग यूनिट (Anti Human Trafficking Units) बनाने के निर्देश भी दिए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 10:48 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) में श्रम के लिये वयस्कों और बच्चों की तस्करी बढ़ गई है. केंद्र सरकार ने तीन महीने पहले सभी राज्यों को एक एडवाइजरी भेजी थी, जिसमें मानव तस्करी (Human Trafficking) से निपटने के लिए कई निर्देश दिए गए थे. इनमें से 8 राज्यों ने केंद्र सरकार की इस एडवाइजरी पर कोई एक्शन नहीं लिया, इन राज्यों में महाराष्ट्र, यूपी और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं.

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गृह मंत्रालय (MHA) ने लॉकडाउन में मानव तस्करी की आशंका को लेकर एडवाइजरी जारी की थी. इसमें मानव तस्करी जैसी घटनाओं से निपटने के उपाय भी सुझाए गए थे. मंत्रालय ने राज्यों से हर जिले में तत्काल प्रभाव से एंटी ह्यूमन ट्रैफेकिंग यूनिट (Anti Human Trafficking Units) बनाने के निर्देश भी दिए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर राज्यों ने पूरे निर्देशों का पालन ही नहीं किया.

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रिपोर्ट के अनुसार, यूपी और महाराष्ट्र उन छह राज्यों में शामिल हैं, जो मानव तस्करी के खिलाफ 10 साल पहले बनाए गए बुनियादी मानदंडों तक भी नहीं पहुंच पाए हैं. इन मानदंडों के तहत राज्य के कम से कम 50 फीसदी जिलों में AHTU की स्थापना की बात कही गई थी. दोनों राज्य इसका आधा भी नहीं कर पाए. यूपी के 75 जिलों में सिर्फ 35 में ऐसी यूनिट्स हैं, जबकि महाराष्ट्र के 36 जिलों में सिर्फ 12 में AHTU का गठन किया गया है.

गृह मंत्रालय के उप सचिव अरुण सोबती द्वारा 6 जुलाई को जारी एडवाइजरी में कहा गया है, 'कामबंदी और तालाबंदी जैसे हालात में तस्कर अक्सर श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों को नई नौकरी, बेहतर आमदनी और रहने की सुविधाओं संबंधी झूठे वादे करके उनकी कमजोरी का फायदा उठाते हैं. उनकी तस्करी की जाती है. दुर्भाग्य से युवा, महिलाएं और बच्चे इस शोषण का आसानी से शिकार बन जाते हैं. हमें इसे रोकना है, जिसके लिए कुछ उपाय बताए जा रहे हैं.'


पिछले सप्ताह News18 ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) नवीनतम आंकड़ों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसमें बताया गया था कि भारत में मानव तस्करी के मामलों ने 2019 में पिछले तीन साल की तुलना में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई.

साल 2019 में देश में कुल 6,616 मानव तस्करी के मामले दर्ज किए गए. ये 2018 में दर्ज 5,788 मामलों और 2017 में 5,900 मामलों की तुलना में कहीं अधिक हैं. पिछले साल भी मानव तस्करी के मामलों की सजा की दर में गिरावट देखी गई थी. साल 2018 में ये दर 29.4% थी जो साल 2019 में 22% रह गई.

महाराष्ट्र में 2019 में मानव तस्करी के 986 मामले दर्ज किए हैं, जो बाकी राज्यों की तुलना में सबसे अधिक हैं. इनमें 95 केस तो नाबालिगों से संबंधित थे. बाकी 936 मामले 18 वर्ष से अधिक उम्र के पीड़ितों से संबंधित थे. वहीं, दिल्ली में 2019 में मानव तस्करी के 608 मामले दर्ज किए गए थे. इनमें से 536 केस तो नाबालिगों से जुड़े थे. 2017 से 2019 तक दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में नाबालिगों की तस्करी के सबसे अधिक मामले दर्ज किए.


दूसरी ओर राजस्थान बात करें, तो यहां भी मानव तस्करी के मामले बढ़े हैं. 2019 में 653 नाबालिगों की तस्करी हुई. इनमें 636 लड़के और 17 लड़कियों से संबंधित हैं.

विभिन्न पुलिस विभागों द्वारा जांच किए गए इन मानव तस्करी के कारणों में एक वेश्यावृत्ति भी पाया गया. महाराष्ट्र में ऐसे मामलों की संख्या 946 में सबसे अधिक थी, इसके बाद तेलंगाना में 322 और आंध्र प्रदेश में 316 ऐसे मामले थे.

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मानव तस्करी के कुछ अन्य मामलों में लड़कियों की तस्करी जबरन शादी के लिए हुई. असम में ऐसे सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए थे. इसके बाद मणिपुर में घरेलू सेवा के लिए नाबालिगों की तस्करी हुई. श्रम के लिए बिहार से सबसे ज्यादा लोगों की तस्करी हुई.
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