कोवैक्सीन की कीमत पर फिर से विचार करेगा केंद्र, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने दिए संकेत

केंद्र सरकार कोवैक्सीन की कीमत पर फिर से विचार कर सकती है (सांकेतिक तस्वीर)

Bharat Biotech Covaxin Price: भारत बायोटेक फिलहाल केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक और निजी अस्पतालों को 1200 रुपये प्रति खुराक की दर से कोवैक्सीन की आपूर्ति कर रही है.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस के खिलाफ भारत के टीकाकरण अभियान (Coronavirus Vaccination) में इस्तेमाल किए जा रहे कोवैक्सीन (Covaxin) की कीमत पर सरकार फिर से विचार कर सकती है. नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और राष्ट्रीय कोविड-19 कार्यबल के प्रमुख डॉ. वी.के. पॉल ने सोमवार को इस बात के संकेत दिए. उन्होंने सीएनबीसी टीवी18 से एक बातचीत के दौरान कहा, 'केंद्र सरकार भारत बायोटेक को कोवैक्सीन की एक खुराक के लिए 150 रुपये का भुगतान कर रही है, जिस पर फिर से विचार किया जाएगा.' इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि निर्माता कंपनी किस कीमत पर निजी क्षेत्र को टीका देगी, इसका निर्णय उसी को करना है.


    गौरतलब है कि भारत बायोटेक ने बीते 15 जून को कहा था कि 150 रुपये प्रति खुराक की दर से केंद्र सरकार को कोविड-19 रोधी कोवैक्सीन टीके की आपूर्ति लंबे समय तक वहनीय नहीं है. भारत बायोटेक फिलहाल केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक, राज्य सरकारों को 400 रुपये प्रति खुराक और निजी अस्पतालों को 1200 रुपये प्रति खुराक की दर से कोवैक्सीन की आपूर्ति कर रही है.


    कंपनी ने कोवैक्सीन की अधिक कीमत को ठहराया सही
    कंपनी ने एक बयान में कहा कि वैक्सीन की लागत की भरपाई के लिए निजी बाजार में इसकी ऊंची कीमत जरूरी है. उसने कहा कि केंद्र के आपूर्ति मूल्य की वजह से भी निजी क्षेत्र के लिए कीमत में वृद्धि हो रही है. कंपनी ने भारत में निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध दूसरे कोविड-19 टीकों की तुलना में कोवैक्सीन की अधिक दर को उचित ठहराते कहा कि कम मात्रा में इसकी खरीद, वितरण में आने वाली अधिक लागत और खुदरा मुनाफे आदि बुनियादी कारोबारी कारणों से कोवैक्सीन महंगी हो जाती है.


    कोवैक्सीन की कीमत 150 रुपये प्रति खुराक ज्यादा समय तक संभव नहीं
    कंपनी ने कहा, ‘भारत सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक की दर से कोवैक्सीन टीके की आपूर्ति गैर-प्रतिस्पर्धी कीमत है और यह स्पष्ट रूप से लंबे समय तक वहनीय नहीं है. इसलिए निजी बाजार में उसकी ऊंची कीमत लागत की भरपाई के लिए जरूरी है.’ केंद्र के निर्देश के अनुसार कोवैक्सीन के कुल उत्पादन का 10 फीसद से भी कम हिस्सा निजी अस्पतालों को दिया जाता है, जबकि उसका बाकी बहुत बड़ा हिस्सा राज्यों एवं केंद्र के पास जाता है. भारत बायोटेक ने कहा, ‘ऐसे परिदृश्य में उसे सभी आपूर्ति से कोवैक्सीन पर औसत दाम प्रति खुराक 250 रुपये से भी कम मिलता है. थोड़ा आगे बढ़ा जाए तो, करीब 75 फीसद उत्पादन राज्य एवं केद्र सरकारों को मिलेगा और बस 25 फीसद निजी अस्पतालों के पास जा रहा है.’





    भारत बायोटेक कर चुकी है 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
    उसने बताया कि भारत बायोटेक टीके के विकास, क्लिनिकल ट्रायल तथा कोवैक्सीन के लिए निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. उसने कहा कि टीकों एवं अन्य दवाओं का मूल्य निर्धारण जींसों एवं कच्चे मालों की लागत, उत्पाद विफलता, आदि बातों पर निर्भर करता है.




    उसने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद(आईसीएमआर) ने सार्स कोव 2 वायरस की अभूपर्ति, पशुओं पर अध्ययन, वायरस विश्लेषण, परीक्षण किट और क्लीनिक परीक्षण स्थलों के लिए आंशिक वित्तपोषण के सिलसिले में सहयोग के लिए जीवविज्ञान संस्थान को उत्पादों के बिक्री के आधार पर रॉयल्टी देगी. (इनपुट भाषा से भी)

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