अपना शहर चुनें

States

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, समुद्र में भी मजबूत होगा भारत, चीन और पाक को मिलेगा जवाब

भारतीय नौसेना के लिए 45,000 करोड़ रुपये की लागत से 6 पनडुब्बियां बनाने का प्रस्ताव है (सांकेतिक तस्वीर)
भारतीय नौसेना के लिए 45,000 करोड़ रुपये की लागत से 6 पनडुब्बियां बनाने का प्रस्ताव है (सांकेतिक तस्वीर)

चीन की हिंद महासागर में बढ़ती ताकत का जबाव देने के लिए भारत इन पनडुब्बियों के साथ पूरी तरह से तैयार होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 21, 2019, 12:59 AM IST
  • Share this:
रक्षा मंत्रालय ने भारत सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत रक्षा क्षेत्र में लगभग 45,000 करोड़ रुपये की लागत वाली छह पनडुब्बियों के निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों को शॉर्टलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सरकार ने गुरुवार को कहा कि भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 75-I के तहत सैन्य मामलों में रणनीतिकार साझेदार देश छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण में मदद करेंगे.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि यह प्रोजेक्ट भारत में पनडुब्बियों की देसी डिजाइनिंग और निर्माण की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा. इस प्रोजेक्ट में तैयार होने वाली पनडुब्बियों के साथ देश में सबसे नई तकनीक लाने का प्रयास किया जाएगा. अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भारत पनडुब्बी डिजाइन और प्रोडक्शन के मामले में दुनिया का प्रमुख केंद्र बनने का प्रयास करेगा. नेवी के पास अभी छह पनडुब्बियों की खरीद के लिए भविष्य में कंसोर्टियम से अनुमति लेने का विकल्प भी है.

रक्षा मंत्रालय से पहले ही मिल गई थी इजाजत
भारतीय कंपनियों को नेवी के इस प्रोजेक्ट का जवाब देने के लिए दो महीने का वक्त दिया गया है. सरकार ने कहा है कि भारतीय कंपनियां उनकी क्षमताओं के आधार पर शॉर्टलिस्ट की जाएंगी. साथ ही उनकी जहाज निर्माण की क्षमता और आर्थिक स्थिति को भी परखा जाएगा. रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2019 में ही नौसेना के लिए 45 हजार करोड़ की लागत से बनने वाली इन छह पनडुब्बियों के लिए इजाजत दे दी थी.
रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च संस्था रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) इन खर्चों के बारे में फैसला करती है. उसने भी इस खरीद के लिए अनुमति दे दी है. ये परियोजना रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत पूरी की जाएगी. इसके तहत विदेशी रक्षा निर्माताओं के साथ मिलकर भारत में चुनिंदा सैन्य प्लेटफॉर्म बनाने के लिए निजी फर्म को जिम्मेदारी देनी की व्यवस्था हुई है.



चीन और पाकिस्तान के खतरे से मिलेगी मुक्ति
पिछले कुछ वक्त से चीन लगातार खुद को हिंद महासागर में मजबूत करने का प्रयास कर रहा है. मालदीव जैसे देशों के साथ उसके अच्छे संबंध बनाने की तरकीब इसी रणनीति का हिस्सा थी. वहीं, भारत ने चीन को राजनयिक स्तर पर तो हिंद महासागर में घेर लिया है, लेकिन सामरिक स्तर पर भी खुद को हिंद महासागर में मजबूत कर रहा है. ऐसे में ये पनडुब्बियां भारत को चीन की चुनौती से निपटने के लिए सामरिक और मनोवैज्ञानिक ताकत देंगी.

पाक के आतंक से मिलेगी निजात
भारत आज भी मुंबई हमले की चोट नहीं भूला है. ऐसे में अरब सागर के रास्ते आने वाले आतंक को रोकना भारत की प्राथमिकता है. इन पनडुब्बियों के साथ भारत खुद को अरब सागर में और मजबूत बनाएगा.

भारत पनडुब्बियों के वैश्विक निर्माण के बाजार में बन सकता है बड़ा खिलाड़ी
भारत सिर्फ इन पनडुब्बियों को बनाएगा ही नहीं बल्कि इनके निर्माण की देशी तकनीकों और डिजाइनों को विकसित भी करेगा. रक्षा मंत्री ने खुद भविष्य में इनके बड़े प्रभावों की आशा जाहिर की है. ऐसे में यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अभी इस कदम को जितना बड़ा माना जा रहा है, यह उससे कहीं बड़ा साबित होगा.

यह भी पढ़ें: राष्ट्रपति अभिभाषण से मोदी सरकार 2.0 ने साफ किया अपना एजेंडा
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज