J&K के विकास और चुनाव कराने पर केंद्र का फोकस, जानें अहम बैठक की बड़ी बातें

बैठक करीब साढ़े तीन घंटे तक चली.

सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में केंद्र (Central Government) ने आश्वस्त किया है कि वो जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के विकास और चुनाव कराने को लेकर प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है-दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी खत्म करनी है.

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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों (J&K Political Parties) की अहम बैठक संपन्न हो गई है. सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में केंद्र ने आश्वस्त किया है कि वो कश्मीर के विकास और चुनाव कराने को लेकर प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है-दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी खत्म करनी है.

    वहीं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जैसे स्टेट डिसॉल्व किया गया था वो सही नहीं था, ऐसा नहीं होना चाहिए था. उन्होंने 5 मांग की. पहला, राज्य का दर्जा जल्दी दें. दूसरा, विधानसभा का चुनाव तुरंत हो ,लोकतंत्र बहाल हो. तीसरा, डोमिसाइल के नियम, खासतौर पर जमीन और नौकरी के मामले में गारंटी दे सरकार. तीसरा, कश्मीरी पंडित 30 साल से बाहर हैं, उनको वापस लाया जाए. चौथा, राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाए.

    आजाद ने कहा- गृहमंत्री ने पीएम से पहले कहा- स्टेटहुड देने के लिए वचनबद्ध हैं और इलेक्शन के लिए भी वचनबद्ध हैं, सिर्फ परिसीमन का इंतजार है.स्टेटहुड मिल जाएगा और इलेक्शन हो जाएंगे तब हम संतुष्ट होंगे.



    सभी पार्टियों की राय है कि जम्मू-कश्मीर में शांति होनी चाहिए- निर्मल सिंह
    वहीं बीजेपी नेता निर्मल सिंह ने कहा-सभी पार्टियों की राय है कि जम्मू-कश्मीर में शांति होनी चाहिए. एक सरकार लोकतांत्रिक तरीके से बने. पीएम मोदी ने सभी से अपील की है कि शांति तभी आएगी जब सब साथ मिलकर साथ काम करेंगे.

    निर्मल सिंह ने कहा-पहले परिसीमन किया जाए और उसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. परिसीमन आयोग सभी के साथ बैठक करेगा. उसके बाद स्थितियां आगे बढ़ेंगी. वहीं कांग्रेसी नेता गुलाम अहमद मीर ने कहा-ये बेहतर बैठक और बेहतर प्रयास था. प्रधानमंत्री ने सभी नेताओं को ध्यान से सुना. इसके जवाब में उन्होंने कहा-आइए आगे बढ़ते हैं.

    क्या बोले उमर अब्दुल्ला
    जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है-हम 5 अगस्त 2019 को हुई घटना का समर्थन नहीं करते. लेकिन हम उसके लिए कानून हाथ में नहीं ले सकते. हम इसकी इसकी लड़ाई कोर्ट में लड़ेंगे. हमने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि राज्य और केंद्र में भरोसा टूटा है. ये केंद्र की जिम्मेदारी है कि इस भरोसे को दोबारा कायम किया जाए.

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