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लोकसभा चुनाव 2019: पांचवें चरण में बीजेपी, कांग्रेस की बड़ी परीक्षा, गढ़ बचाने की चुनौती!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 30, 2019, 3:47 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: पांचवें चरण में बीजेपी, कांग्रेस की बड़ी परीक्षा, गढ़ बचाने की चुनौती!
फाइल फोटो

इस चरण में कांग्रेस के गढ़ अमेठी, रायबरेली तो बीजेपी के गढ़ राम नगरी अयोध्या (फैजाबाद) में 6 मई को वोटिंग होगी.

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  • Last Updated: April 30, 2019, 3:47 PM IST
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लोकसभा चुनाव में चौथे चरण का मतदान पूरा हो चुका है, अब पांचवें चरण की परीक्षा शुरू हो गई है, जिसमें सात प्रदेशों की 51 लोकसभा सीटों पर 6 मई को वोटिंग होनी है. इसी दिन पवित्र रमजान महीने की शुरुआत भी हो रही है. इस चरण में सबसे ज्यादा 14 सीटें यूपी की हैं, जो बुंदेलखंड और अवध से लेकर तराई के जिलों तक से आती हैं. यह चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली सीट पर भी वोटिंग है और भगवान राम की नगरी अयोध्या (फैजाबाद) में भी. जो राजनीति का बड़ा केंद्र है. इस चरण में तीन सुरक्षित सीटें भी हैं.

इस चरण में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी जैसे बड़े नेताओं का राजनीतिक भाग्य वोटर ईवीएम में बंद कर देगा. धौरहरा लोकसभा सीट पर भी नजर लगी हुई है जहां से शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने चंबल के डकैत रहे मलखान सिंह को मैदान में उतारा है. इसी चरण में लिंचिंग के लिए कुख्यात राजस्थान के अलवर में भी वोटिंग होगी. (ये भी पढ़ें: कम-ज्यादा वोटिंग का गणित क्या सच में बदल देता है चुनावी परिणाम!)

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राम नगरी का रण!

देश की राजनीति को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली सीट को बचाना बीजेपी के लिए बहुत जरूरी है. मंदिर की राजनीति करने वाली बीजेपी के लल्लू सिंह यहां के मौजूदा सांसद है. उन्हें पार्टी ने दोबारा मौका दिया है. लेकिन इतिहास गवाह है कि राम नगरी समय−समय पर अपने सांसद बदल देती है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री यहां से दो बार एमपी चुने जा चुके हैं. वो इस बार भी कांग्रेस के प्रत्याशी हैं. जबकि समाजवादी पार्टी ने यहां के सांसद रहे मित्रसेन यादव के बेटे आनंदसेन यादव को टिकट दिया है. राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई का कहना है कि अगर राम नगरी में बीजेपी हारती है तो उसके लिए उसका मैसेज बहुत खराब जाएगा. हिंदू संगठनों के मंदिर आंदोलन को झटका लगेगा. क्योंकि यह सीट प्रतीकात्मक तौर पर उसकी राजनीति के लिए बहुत महत्व रखती है.

अमेठी: आसान लड़ाई को कांग्रेस ने कठिन बनाया!

'24 अकबर रोड' के लेखक रशीद किदवई कहते हैं कि कांग्रेस ने अमेठी में आसान लड़ाई को कठिन बना लिया है. राहुल गांधी यदि वायनाड और अमेठी दोनों जगह से जीतते हैं तो संभव ये है कि वो अमेठी को अपनी बहन प्रियंका के लिए छोड़ देंगे. वायनाड जाने की वजह से स्मृति ईरानी उन पर ज्यादा हमलावर हैं. क्योंकि वो हारने के बाद भी वहां लगातार सक्रिय रही हैं. इसलिए 24 जनवरी को जब प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में उतरीं, उसी दिन अमेठी से उनके चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी जाती तो तस्वीर कुछ और होती. कांग्रेस पर इतना दबाव नहीं होता, जितना राहुल गांधी के दो जगह चुनाव लड़ने की वजह से पैदा हुआ है. यहां इस तरह कांग्रेस ने आसान लड़ाई को कठिन बना लिया है.
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इन सीटों पर डाले जाएंगे वोट!

यूपी: अमेठी, रायबरेली, फैजाबाद, बाराबंकी, बहराइच, कैसरगंज, गोंडा, सीतापुर, मोहनलाल गंज, धौरहरा, लखनऊ, बांदा, फतेहपुर और कौशांबी.

राजस्थान: अलवर, जयपुर (ग्रामीण), जयपुर, बीकानेर, चूरू, झुंझूनू, सीकर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, करौली-धौलपुर, दौसा और नागौर.

पश्चिम बंगाल: बैरकपुर, हावड़ा, बनगांव, आरामबाग, उलुबेरिया, श्रीरामपुर व हुगली.

मध्य प्रदेश: खजुराहो, रीवा, सतना, टीकमगढ़, दमोह, बैतूल व होशंगाबाद.

बिहार:  हाजीपुर, सारण, मधुबनी, मुजफ्फरपुर व सीतामढ़ी.

झारखंड: खूंटी, हजारीबाग, रांची व कोडरमा.

जम्मू-कश्मीर: लद्दाख, अनंतनाग ( इस सीट के तीसरे और अंतिम चरण में शोपियां और पुलवामा क्षेत्र में वोटिंग होगी).

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कितनी सीट किस पार्टी के पास

यूपी के अलावा राजस्थान की 12, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल की 7-7, बिहार की 5, झारखंड की 4 और जम्मू-कश्मीर की 2 सीटों पर चुनाव होंगे. पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2014 में इन 51 सीटों में से बीजेपी ने सबसे अधिक 39, टीएमसी ने 7, कांग्रेस ने 2 और अन्य ने 3 सीट पर जीत हासिल की थी. इसलिए इस चरण में बीजेपी के सामने अपनी जीती सीटें बचाने की बड़ी चुनौती है तो कांग्रेस के सामने बढ़ाने की.

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First published: April 30, 2019, 1:27 PM IST
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