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Chamoli Disaster: सैलाब देख बेटे को लगातार कॉल करती रही मां, बचाई 25 लोगों की जान

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. 165 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.
उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. 165 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.

Chamoli Disaster: तपोवन टनल (Tapovan Tunnel) में 120 मीटर खुदाई के बाद रविवार को एक और शव मिला, जिसमें एक इलेट्रीशियन शामिल है. आज सुबह से टनल के अंदर से तीन शव निकाले जा चुके हैं. टनल में खुदाई का काम तेज कर दिया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 14, 2021, 10:54 AM IST
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चमोली. उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जिले में आए जलप्रलय को आज 7 दिन बीत चुके हैं. अब तक 40 शवों को निकाला जा सका है, जबकि 165 लोग अभी भी लापता हैं. तपोवन टनल (Tapovan Tunnel) में 120 मीटर खुदाई के बाद रविवार को तीन और शव निकाले गए, जिसमें एक इलेट्रीशियन शामिल है. इस बीच टनल में खुदाई का काम तेज कर दिया गया है. चमोली के ऋषिगंगा में आए इस सैलाब के गवाह कई खुशकिस्‍मत लोग भी हैं जिन्‍हें मौत छूकर निकल गई और वे आज जिंदा हैं.

तपोवन में एनटीपीसी के प्रोजेक्‍ट में भारी मोटर वाहन चालक का काम करने वाले 27 साल के विपुल कैरेनी भी पिछले रविवार को एनटीपीसी के हाइड्रोप्रोजेक्‍ट के तपोवन बैराज पर काम कर रहे थे. विपुल बताते हैं क‍ि ऋषि गंगा में सैलाब आने से ठीक पहले उनकी मां मंगश्री देवी का फोन आया था. उन्‍होंने विपुल और उनके साथियों को वैराज से दूर जाने को कहा था. हालांकि विपुल कैरैनी ने उस वक्‍त अपनी मां की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया था और काम में लगे हुए थे. लेकिन मां ने भी हार नहीं मानी और लगातार विपुल को फोन करती रही. विपुल ने बताया कि मां ने जब फोन पर बताया कि धौलीगंगा में सैलाब आया है, तब हमें लगा कि अब यहां से जाना ही होगा. इसके बाद मैं अपने साथियों के साथ किसी तरह से भी बच निकलने में कामयाब हो गया.

विपुल कैरैनी ने बताया, 'उनका गांव ऊंचाई पर स्थित है. जब बाढ़ का पानी आया तो मेरी मां बाहर काम कर रही थी. उन्‍होंने जैसे ही सैलाब को देखा तुरंत मुझे फोन किया. अगर मां ने सैलाब की चेतावनी न दी होती तो मेरे साथ मेरे दो दर्जन से ज्‍यादा साथी मर चुके होते.
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विपुल ने बताया कि वह हादसे वाले दिन करीब नौ बजे काम पर निकले थे. उन्‍हें एक दिन के 600 रुपये मिलते हैं. लेकिन संडे के दिन काम करने के उन्‍हें दोगुने पैसे मिलते हैं, अतिरिक्‍त पैसा कमाने के लिए वह 7 फरवरी को रविवार की छुट्टी होने के बावजूद काम पर गए. सुबह करीब साढ़े 10 बजे मां का फोन आया और वो जोर जोर से चिल्‍लाने लगी. विपुल ने बताया कि मैंने अपनी मां को कहा मजाक मतकर अभी पहाड़ फटा नहीं है और मां की कॉल को नजरअंदाज कर काम करने लगा. मां ने फिर फोन किया और वहां से भागने के लिए कहने लगी. इसके बाद मैं और मेरे दोस्‍त एक सीढ़ी के सहारे वहां से भागे और बचकर निकलने में सफल हुए.
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