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चमोली ग्लेशियर हादसे पर सोनिया गांधी ने जताया दुख, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से की ये अपील

SDRF के डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने कहा, 'ऊर्जा परियोजना के प्रतिनिधियों ने मुझे बताया है कि परियोजना स्थल पर मौजूद रहे 150 कामगारों से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है.'
SDRF के डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने कहा, 'ऊर्जा परियोजना के प्रतिनिधियों ने मुझे बताया है कि परियोजना स्थल पर मौजूद रहे 150 कामगारों से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है.'

Chamoli Glacier Burst: पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और देहरादून सहित कई जिलों के प्रभावित होने की आशंका है और इन जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 8, 2021, 4:43 PM IST
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नई दिल्ली. उत्तराखंड के चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में रविवार को हिमखंड के टूटने से अलकनंदा और इसकी सहायक नदियों में अचानक आई विकराल बाढ़ के कारण हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी तबाही मची है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और सभी की सलामती के लिए प्रार्थना की है. उन्होंने कहा, उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ और तबाही की खबर सुनकर व्यथित हूं. मैं सभी की सलामती के लिए प्रार्थना करती हूं." इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों से वहां फंसे लोगों व राहत-बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों की मदद करने की अपील की.

वहीं, राहुल गांधी ने कहा, "चमोली में ग्लेशियर फटने से बाढ़ त्रासदी बेहद दुखद है. मेरी संवेदनाएं उत्तराखंड की जनता के साथ हैं. राज्य सरकार सभी पीड़ितों को तुरंत सहायता दें. कांग्रेस साथी भी राहत कार्य में हाथ बटाएं." दूसरी ओर प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिखा, "उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने से आई त्रासदी की खबर बहुत दुखद है. इस मुश्किल समय में पूरा देश उत्तराखंड के निवासियों के साथ खड़ा है. आपदा में फँसे लोगों के लिए मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं. सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि राहत और बचाव कार्यों में भरपूर सहयोग करें."

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ग्लेशियर टूटने की वजह से पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और देहरादून सहित कई जिलों के प्रभावित होने की आशंका है और इन जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. राज्य के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा कि बिजली परियोजना पूरी तरह से बह गई है. पहाड़ों के किनारे पानी के तेज बहाव में आने से रास्ते में आने वाले घर भी बह गए. अधिक आबादी वाले क्षेत्रों सहित नीचे की ओर स्थित मानव बस्तियों में नुकसान होने की आशंका है. कई गांवों को खाली कराया गया है और लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया गया है.

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क से निकलने वाली ऋषिगंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में टूटे हिमखंड से आई बाढ़ के कारण धौलगंगा घाटी और अलकनन्दा घाटी में नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया जिससे ऋषिगंगा और धौली गंगा के संगम पर बसे रैणी गांव के समीप स्थित एक निजी कम्पनी की ऋषिगंगा बिजली परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा, धौली गंगा के किनारे बाढ़ के वेग के कारण जबरदस्त भूकटाव हो रहा है.

चमोली के जिला प्रशासन की ओर से अलकनन्दा नदी के किनारे रह रहे लोगों के लिए अलर्ट जारी किया गया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रातः अचानक जोर की आवाज के साथ धौली गंगा का जलस्तर बढ़ता दिखा. पानी तूफान के आकार में आगे बढ़ रहा था और वह अपने रास्ते में आने वाली सभी चीजों को अपने साथ बहाकर ले गया. चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि मौके पर प्रशासन का दल पहुंच गया है और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है.

रैणी से लेकर श्रीनगर तक अलकनन्दा के किनारे रह रहे लोगों के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है. रैणी में सीमा को जोड़ने वाला मुख्य मोटर मार्ग भी इस बाढ़ की चपेट में आकर बह गया है. दूसरी ओर रैणी से जोशीमठ के बीच धौली गंगा पर नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन की तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना के बैराज स्थल के आसपास के इलाके में भी कुछ आवासीय भवन बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं.
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