नागपुर: 1300 लोगों का अंतिम संस्कार करने वाले 'दादा' ने दवाओं के अभाव में दम तोड़ा

निमजे को बचाने की जद्दोजहद में परिवार की आर्थिक कमर भी टूट चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

निमजे को बचाने की जद्दोजहद में परिवार की आर्थिक कमर भी टूट चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

Chandan Nimje Died: 67 साल के चंदन निमजे ने 1300 से ज्यादा शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया, लेकिन जब उन्हें इलाज की जरूरत पड़ी तो सभी ने उन्हें दरकिनार कर दिया. नतीजा यह हुआ कि यह समाजसेवी 26 मई को दुनिया को अलविदा कह गए.

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नागपुर. जब रिश्तेदार भी कोविड से जान गंवाने वाले मरीजों के शव (Dead Body) को हाथ नहीं लगा रहे थे, तो 67 साल के चंदन निमजे उन्हें सम्मान के साथ दुनिया से विदा कर रहे थे. निमजे ने 1300 से ज्यादा शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया, लेकिन जब उन्हें इलाज की जरूरत पड़ी तो सभी ने उन्हें दरकिनार कर दिया. नतीजा यह हुआ कि यह समाजसेवी 26 मई को दुनिया को अलविदा कह गए. उनके परिजन बताते हैं कि उन्हें अस्पताल में बिस्तर तक नसीब नहीं हो सका था.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चंदन निमजे को नागपुर के मेयर दयाशंकर तिवारी ने 'कोरोना वारियर' के सम्मान से नवाजा था. वे बीते 1.5 साल से ऐसे शवों के अंतिम संस्कार में मदद कर रहे थे, जिनसे उनके रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ लिया था. केंद्र सरकार में सचिव स्तर की नौकरी से रिटायर हुए निमजे कोविड-19 की चपेट में आ गए थे. इस दौरान उनके परिवार को अस्पताल में बिस्तर और Tocilizumab इंजेक्शन के लिए खासा परेशान होना पड़ा.

कहा जा रहा है कि यही परेशानियां उनके आकस्मिक मौत का कारण बनी. सरकारी अस्पताल में बिस्तर नहीं मिलने के कारण उन्हें एक निजी अस्पताल में महंगी कीमत में दाखिला मिला. निमजे को बचाने की जद्दोजहद में परिवार की आर्थिक कमर भी टूट चुकी है. उनके दोनों छोटे बेटों की महामारी के कारण नौकरी चली गई है. निमजे को उनके करीबी 'दादा' कहते हैं.

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कोई अधिकारी सामने नहीं आया

निमजे के साथ काम करने वाले अरविंद रतौड़ी बताते हैं, 'हम सभी के पास गए, केवल आर्थिक मदद ही नहीं बल्कि बिस्तर के लिए भी गए, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया. हम नागपुर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के आयुक्त, कलेक्टर और दूसरे शीर्ष अधिकारियों के पास पहुंचे, लेकिन किसी भी उस व्यक्ति की मदद नहीं कि जो 1300 से ज्यादा नागरिकों को मृत्यु के बाद सम्मान देने का काम कर रहा था.'

उन्होंने कहा, 'मैंने खुद कलेक्टर , NMC प्रमुख और नेताओं को इंजेक्शन के लिए फोन किया, लेकिन किसी ने भी कॉल नहीं उठाया.' उन्होंने बताया कि दिल्ली के एक वॉलिंटियर ने दादा के लिए इंजेक्शन भेजा था. रतौड़ी ने जानकारी दी है कि वे मुख्यमंत्री, कलेक्टर और एनएमसी आयुक्त के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में जल्द ही केस दर्ज कराने जा रहे हैं.




मौत के आठ दिन बाद आया फोन

रिपोर्ट के अनुसार, निमजे के अंतिम संस्कार के दौरान NMC के एक अधिकारी ने उनके बेटे को फोन कर दवा देने की पेशकश की. जोन स्तर के एक अधिकारी ने बीते गुरुवार यानि निमजे के निधन के आठ दिनों बाद फोन लगाकर पूछा कि उन्हें दवा मिली या नहीं.

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