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गैंगरेप मामला : लड़की के शरीर पर नहीं थी चोट तो हाईकोर्ट ने कहा-उसकी सहमति थी

News18Hindi
Updated: October 20, 2019, 9:26 PM IST
गैंगरेप मामला : लड़की के शरीर पर नहीं थी चोट तो हाईकोर्ट ने कहा-उसकी सहमति थी
2015 में इस मामले में पीड़िता के पिता ने FIR कराई थी (सांकेतिक फोटो)

आरोपियों की रिहाई के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन (Chandigarh Administration) की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने माना कि लड़की के शरीर पर कोई चोट नहीं थी और इसका मतलब है कि वह भी राजी थी.

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  • Last Updated: October 20, 2019, 9:26 PM IST
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चंडीगढ़. एक बड़े मामले में जिसके आगे चलकर बड़े प्रभाव हो सकते हैं, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) की एक डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाया है कि संबंधों के दौरान महिला के शरीर पर किसी भी चोट के न होने का मतलब है कि कोई रेप (Rape) नहीं हुआ और महिला ने सेक्स के लिए सहमति दी थी.

यह फैसला 2015 के एक गैंगरेप केस (Gangrape Case) के मामले में आया है. यह याचिका चंडीगढ़ प्रशासन (Chandigarh Administration) की ओर से रिहा हो चुके आरोपियों के खिलाफ अपील दायर करने के लिए की गई थी. लेकिन कोर्ट ने प्रशासन की इस अपील करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

'शरीर पर चोट न होने का मतलब लड़की ने दी थी सहमति'
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट
के मुताबिक, गैंगरेप की शिकार युवती के पिता ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में दावा किया है कि उनकी बेटी जागरण में गई थी. जहां से 30 अक्टूबर, 2015 की रात को उसका अपहरण कर लिया गया. चार युवा जिनको गैंगरेप की FIR में अभियुक्त के तौर नामजद किया गया था, उनकी पहचान अमित, सूरज, कन्नू और विकास के तौर पर की गई थी.

ट्रायल कोर्ट के फैसले को कायम रखते हुए बेंच ने कहा, "हमारा मानना है कि इस मामले में पीड़िता का अपहरण नहीं हुआ था. इस मामले में आरोपियों के खिलाफ जो कहानी ट्रायल कोर्ट (Trail Court) के सामने रखी गई है, वह काफी असंभव लगती है. बचाव पक्ष का विवरण इसमें संभव लगता है."

बेंच ने आगे कहा कि डॉक्टरों को लड़की के शरीर पर कोई भी चोट का निशान नहीं मिला है जिसका मतलब है कि इस शारीरिक संबंध (Sexual Intercourse) को बनाते हुए उसकी सहमति थी.

केस दर्ज कराने के दौरान लड़की की उम्र थी 18 साल
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कोर्ट ने कहा, ''अभियोजक के इस बयान को पुष्टि देने वाला कोई भी सबूत नहीं है कि वह एक रेप पीड़िता (Rape Victim) है. उसकी गवाही पर इन हालातों में विश्वास नहीं किया जा सकता है. ऐसे में हम संदेह का लाभ आरोपियों को देना चाहते हैं."

आरोपियों में से एक अमित ने कोर्ट को बताया कि उसे इस केस में लड़की के परिवार ने झूठे तरीके से फंसाया है और वे दोनों 'रिलेशनशिप' में थे.

इन आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने जनवरी, 2017 में ही रिहा कर दिया था. लड़की की उम्र 18 साल थी जब उसके पिता ने केस दर्ज कराया था.

पहले भी खारिज की जा चुकी है याचिका
हाईकोर्ट 2018 में ही केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ (Chandigarh) की अमित सहित तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप की अपील करने की याचिका को खारिज कर चुका है.

चंडीगढ़ प्रशासन की अमित की रिहाई के खिलाफ अपील करने की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि मामले में यह साबित नहीं हो सका है कि जागरण से लड़की का अपहरण आरोपियों ने कैसे किया था. जागरण रात में 11-12 बजे तक होना था. ऐसे में वह वहां लोगों के साथ थी. फिर वो आरोपियों के संपर्क में कैसे आई और कैसे उन्होंने उसका (लड़की का) चाकू की नोक पर अपहरण किया.'

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First published: October 20, 2019, 8:37 PM IST
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