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आंध्र प्रदेश: चंद्रबाबू ने दी CM रेड्डी को खुली चुनौती, कहा- उन्हें समर्थन मिला तो राजनीति छोड़ दूंगा

तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू की फाइल फोटो
तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू की फाइल फोटो

एन चंद्रबाबू नायडू (N Chandrababu Naidu) ने कहा 'लोगों ने जगन को सत्ता में लाने के लिए वोट दिया, क्योंकि उन्होंने एक मौका मांगा था. लेकिन यह उनका आखिरी मौका होगा, क्योंकि उन्होंने लोगों को पूरी तरह से धोखा दिया है. वह महिलाओं के श्राप से नहीं बच सकते.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2020, 11:19 AM IST
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अमरावती. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी (Y S Jagan Mohan Reddy) के राज्य की राजधानी बदलने के फैसले पर विरोध तेज हो गया है. गुरुवार को तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने रेड्डी को खुले तौर पर चुनौती दी है. उन्होंने दावा किया है कि अगर राज्य की जनता रेड्डी का समर्थन करती है, तो वह राजनीति छोड़ देंगे. खास बात है कि राज्य के सीएम ने एक नया स्टेट प्लान (Andhra Pradesh State Plan) तैयार किया था. इसमें उनकी सरकार ने विशाखापट्टनम को कार्यकारी राजधानी, कुरनूल को न्यायिक राजधानी के रूप में एक कानून पारित किया था. वहीं, अमरावती (Amravati) को राज्य की विधान राजधानी के रूप में बरकार रखा था.

मुख्यमंत्री से माफी की मांग
गुरुवार को नायडू ने इस फैसले को वापस लिए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो एक रेफरेंडम आयोजित करा लें. टीडीपी प्रमुख ने दावा किया है कि अगर जनता ने तीन राजधानियों वाले प्लान पर अपना मत दिया, तो वह राजनीति छोड़ देंगे. इतना ही नहीं उन्होंने सीएम से लोगों से माफी मांगने की बात की है.

उन्होंने कहा 'लोगों ने जगन को सत्ता में लाने के लिए वोट दिया, क्योंकि उन्होंने एक मौका मांगा था. लेकिन यह उनका आखिरी मौका होगा, क्योंकि उन्होंने लोगों को पूरी तरह से धोखा दिया है. वह महिलाओं के श्राप से नहीं बच सकते.'
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उन्होंने कहा, 'कोई भी समझदार आदमी राज्य की राजधनी को शिफ्ट नहीं करेगा. अगर आप इस मुद्दे पर रेफरेंडम के लिए तैयार हैं और लोगों ने आपका समर्थन किया, तो मैं हमेशा के लिए राजनीति छोड़ दूंगा.' अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में मान्यता दिलवाने के लिए किसानों के संघर्ष को एक साल हो चुका है. इस मौके पर नायडू ने रायपुड़ी गांव में 'अमरावती जनभेरी' रैली का संबोधन किया था. वहीं, टीडीपी नेता ओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें और विपक्ष के दूसरे नेताओं को रैली में शामिल होने से रोकने के लिए घर में कैद कर दिया था.

किसानों को विपक्ष का मिला साथ
फिलहाल यह मामला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है. क्योंकि अमरावती के विकास के लिए 33 हजार एकड़ जमीन देने वाले किसानों ने अदालत का रुख किया है. कल यानी दिसंबर 17 को किसानों ने राजनीतिक दलों और दूसरे संगठनों के समर्थन के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था. उनकी मांग थी कि अमरावती को राज्य की राजधानी रहने दिया जाए. किसानों के इस आंदोलन में बीजेपी और कांग्रेस समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने समर्थन दिया था.
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