चंद्रयान -2 ले जाने वाले 'बाहुबली' रॉकेट की हैं ये खासियतें

भारत के मिशन चंद्रयान-2 को अगर कामयाबी मिलती है तो इसमें बड़ा हाथ भारत के बाहुबली रॉकेट का होगा. इसी रॉकेट के जरिए लैंडर और रोबोटिक रोवर को चांद की सतह पर उतारा जाएगा.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 3:11 PM IST
चंद्रयान -2 ले जाने वाले 'बाहुबली' रॉकेट की हैं ये खासियतें
इसी रॉकेट के जरिए लैंडर और रोबोटिक रोवर को चांद की सतह पर उतारा जाएगा.
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Updated: July 22, 2019, 3:11 PM IST
भारत के मिशन चंद्रयान को सोमवार दोपहर लॉन्च कर दिया गया. भारत के मिशन चंद्रयान-2 में रोबोटिक रोवर को चांद की सतह पर उतारा जाएगा. जिस जीएसएलवी एमके-3 रॉकेट से चंद्रयान-2 को लॉन्च किया जाना है.

पहले इस रॉकेट के जरिए चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था लेकिन लॉन्च से कुछ ही देर पहले कुछ तकनीकी खराबी के चलते लॉन्च को रोक दिया गया था. बाद में इसकी लॉन्चिंग की तारीख बदलकर 22 जुलाई कर दी गई थी.

इसके बड़े आकार के चलते नाम दिया गया है 'बाहुबली'
चंद्रयान मिशन-2 में रोबोटिक रोवर को चांद पर ले जाने वाले रॉकेट को उसके विशालकाय आकार की वजह से बाहुबली नाम दिया गया है. दरअसल इसका नाम जियोसिंक्रोनस स्टैडिंग सेटेलाइट लॉन्च व्हिकल मार्क 3 यानी GSLV Mk3 है. इसरो के वैज्ञानिक इसे बाहुबली कह रहे हैं. 15 जुलाई के लॉन्च के लिए ये लॉन्च पैड पर तैनात हो चुका है. बाहुबली का वजन करीब 640 टन है. इसकी ऊंचाई 15 मंजिला इमारत के बराबर है.

बाहुबली रॉकेट करीब 3.8 टन वजनी सेटेलाइट को चांद पर ले जाएगा. भारत के सबसे भारी-भरकम लॉन्च पैड से ये तीसरा लॉन्च होगा.

बाहुबली के खासियत को आप इन बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं-

-ये अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है. जिसे पूरी तरह से देश में बनाया गया है.
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-ये अब तक का सबसे भारीभरकम लॉन्चर है. इसका वजन 640 टन है.
-ये अब तक का सबसे ऊंचाई वाला लॉन्चर है. इसकी ऊंचाई 15 स्टोरी बिल्डिंग के बराबर है.
-ये 4 टन वजनी सेटेलाइट को ले आसमान में ले जाने में सक्षम है. लो अर्थ ऑर्बिट में ये 10 टन वजनी सेटेलाइट ले जा सकता है.
-ये चंद्रायन मिशन-2 के सेटेलाइट को उसके ऑर्बिट में स्थापित करेगा.
-इसमें सबसे शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन C25 लगा है जिसे CE-20 पावर देगा.
-इसमें S200 रॉकेट बूस्टर लगे हैं जो रॉकेट को इतनी शक्ति देगा कि वो आसमान में छलांग लगा सके. S200 को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में बनाया गया है.
-GSLV Mk 3 के अलग-अलग मॉडल का अब तक तीन बार सफल प्रक्षेपण हो चुका है.

ये 3 वाकये बयान करते हैं बाहुबली रॉकेट की कामयाबी की दास्तान
बाहुबली के पिछले तीन मॉडल की कामयाबी की पिछली तीन कहानियां ये बताने के लिए काफी हैं कि इस बार भारत आसमान में सबसे मजबूत छलांग लगाने वाला है. इस पूरे प्रोजेक्ट में इसरो को 11 साल लग गए हैं. चंद्रयान 2 भारत का दूसरा मून मिशन है. भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर और रोवर उतारेगा. जो वहां के विकिरण और तापमान का अध्ययन करेगा.

इस मिशन की सबसे बड़ी बात ये है कि ये पूरी तरह से स्वदेशी है. इस मिशन की कामयाबी के बाद भारत चांद की सतह पर लैंड करने वाला चौथा देश बन जाएगा. इसके पहले अमेरिका, रुस और चीन अपने यान को चांद की सतह पर भेज चुके हैं. लेकिन अब तक किसी ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास कोई यान नहीं उतारा है.

भारत ने अपना पहला मून मिशन चंद्रयान-1 2008 में लॉन्च किया था. उस वक्त इस प्रोजेक्ट में करीब 450 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. इस बार इसरो का प्रोजेक्ट 1 हजार करोड़ रुपए का है. चांद पर भारत के कदम बस पड़ने ही वाले हैं. बस कुछ ही दिनों में हम चांद की धरती फतह कर लेंगे.

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First published: July 22, 2019, 3:30 AM IST
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