चंद्रयान-2: चांद पर लैंडर विक्रम का पता चला, जानें अब आगे क्या करेगा इसरो

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Updated: September 9, 2019, 9:26 AM IST
चंद्रयान-2: चांद पर लैंडर विक्रम का पता चला, जानें अब आगे क्या करेगा इसरो
लैंडर विक्रम का लोकेशन ही पता चल सका है. उससे संपर्क स्थापित करना अभी बाकी है.

लैंडर विक्रम (Lander Vikram) के सटीक लोकेशन पता चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के ऑर्बिटर द्वारा खींचे गए थर्मल इमेज से चला है. अब जो सबसे बड़ा मुद्दा है वो ये कि इसरो (ISRO) के पास आगे क्या विकल्प बचे हैं.

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  • Last Updated: September 9, 2019, 9:26 AM IST
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बेंगलुरू. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) चीफ के. सिवन ने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) को लेकर रविवार को बताया कि चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर का सटीक लोकेशन पता चल गया है. सिवन ने साथ ही बताया कि ऐसा लग रहा है कि लैंडर विक्रम ने हार्ड-लैंडिंग की होगी, हालांकि योजना उसकी सॉफ्ट-लैंडिंग कराने की थी, जो कामयाब नहीं हो सकी. लैंडर के सटीक लोकेशन का पता चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा खींचे गए थर्मल इमेज से चला है. अब जो सबसे बड़ा मुद्दा है वो ये कि इसरो के पास आगे क्या विकल्प बचे हैं.

लैंडर विक्रम से एकबार फिर संपर्क स्थापित करना
फिलहाल लैंडर विक्रम का लोकेशन ही पता चल सका है. उससे संपर्क स्थापित करना अभी बाकी है. जो इस वक्त इसरो की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. इसके बाद ये पता लगाना होगा कि उसकी लैंडिंग कैसे हुई है और वो किस हाल में चांद पर मौजूद है, उसे कितना नुकसान पहुंचा है या वो ठीक है. अंतरिक्ष मामलों के एक जानकार ने मीडिया को बताया है कि यदि हार्ड-लैंडिंग के बाद विक्रम चांद की सतह पर सीधा खड़ा होगा और उसके पार्ट्स को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा होगा तो उससे फिर से संपर्क स्थापित किया जा सकता है. लैंडर विक्रम के अंदर ही रोवर प्रज्ञान है. प्रज्ञान को सॉफ्ट-लैंडिंग के बाद चांद की सतह पर उतरना था.

ऑर्बिटर की मदद से लैंडर विक्रम की स्थिति का पता लगाना

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सही तरीके से चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है. वो लगभग 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा है. वो साढ़े 7 वर्षों तक सक्रीय रहेगा और हमतक चांद की हाई रेजॉलूशन फोटो और अहम डेटा पहुंचाता रहेगा और चांद को लेकर छिपे कई राज का पता भी लगाएगा. इन्हीं हाई रेजॉलूशन फोटो से चांद की सतह पर लैंडर विक्रम की स्थिति का पता चलेगा. ऑर्बिटर में कैमरे समेत 8 उपकरण मौजूद हैं जो काफी आधुनिक हैं. ऑर्बिटर का कैमरा अबतक के सभी मून मिशनों में इस्तेमाल हुए कैमरों में सबसे आधुनिक और बेहतर है.

डेटा का विश्लेषण
जिस लोकेशन पर लैंडर विक्रम से संपर्क समाप्त हुआ था, उसी लोकेशन से ऑर्बिटर आगे के 2 दिनों तक गुजरेगा. लैंडर की लोकेशन की जानकारी मिलने के बाद वो लैंडर की हाई रेजॉलूशन फोटो ले सकता है. डेटा का विश्लेषण सबसे खास है. इसरो ऑर्बिटर द्वारा भेजे गए डेटा के विश्लेषण से ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा. आने वाले 12 दिन बहुत अहम हैं. इसी अवधि में हमें लैंडर की स्थिति के बारे में पता चल सकेगा. के. सिवन ने शनिवार को कहा था कि अगले 14 दिनों में लैंडर विक्रम को ढूंढा जा सकेगा.
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First published: September 9, 2019, 8:36 AM IST
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