मिशन मून: Chandrayaan-2 के लिए 15 मिनट हैं सबसे मुश्किल, जानें क्या होगा?

चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग चांद के साउथ पोल पर एक रोवर को उतारने के उद्देश्य से की जा रही है. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है. चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 4:47 PM IST
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>>चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने वाला पहले देश होगा भारत

 >>ISRO ने पृथ्वी के ऑर्बिट में जाने का समय करीब एक मिनट बढ़ाया

>> अपने साथ कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है चंद्रयान-2

चांद पर भारत का दूसरा महत्वाकांक्षी मिशन 'चंद्रयान-2' अब से कुछ घंटों में लॉन्च होने जा रहा है. चंद्रयान-2 को दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर आंध्र के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा. चंद्रयान-2 छह सितंबर को चांद पर पहुंचेगा. इस मिशन की लागत 978 करोड़ रुपये है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के चेयरमैन डॉ. के सिवन के मुताबिक, 'चंद्रयान-2 के लिए चांद पर लैंडिंग से पहले के 15 मिनट सबसे अहम हैं. उस दौरान हम ऐसा कुछ करेंगे, जिसे हमने अभी तक कभी किया नहीं है.'

ISRO चीफ के मुताबिक, 'चंद्रमा की सतह से 30 किलोमीटर दूर चंद्रयान-2 की लैंडिंग के लिए इसकी स्पीड कम की जाएगी. ऐसे में विक्रम को चांद की सतह पर उतारने का काम काफी मुश्किल होगा. इस दौरान 15 मिनट काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले होंगे. हम पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेंगे. तनाव के ये पल सिर्फ ISRO ही नहीं, बल्कि सभी भारतीयों के लिए होंगे.'

सिवन ने बताया कि भारत जैसे ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा, वह ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. अभी तक अमेरिका, रूस और चीन के पास ही यह विशेषज्ञता है. बता दें कि 15 जुलाई को क्रॉयोजेनिक इंजन में लीकेज के कारण चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग टाल दी गई थी. बाद में ISRO ने लॉन्चिंग की नई तारीख 22 जुलाई और दोपहर 2:43 बजे का वक्त तय किया था.

साउथ पोल पर होगी लैंडिंग
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चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग चांद के साउथ पोल पर एक रोवर को उतारने के उद्देश्य से की जा रही है. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है. चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा.

GSLV मार्क III-M1 से लॉन्च होगा चंद्रयान-2


ISRO ने किए ये 4 अहम बदलाव

>>ISRO ने चंद्रयान-2 की यात्रा के 6 दिन कम कर दिए हैं. इसे 54 दिन से घटाकर 48 दिन कर दिया गया है. देरी के बाद भी चंद्रयान-2 6 सितंबर को चांद के साउथ पोल पर लैंड करेगा.

>>ISRO ने चंद्रयान-2 के लिए पृथ्वी के चारों तरफ अंडाकार चक्कर में बदलाव किया है, एपोजी में 60.4 किमी का अंतर आ गया है.

>>इसके साथ ही ISRO ने पृथ्वी के ऑर्बिट में जाने का समय करीब एक मिनट बढ़ा दिया है.

>>वहीं, चंद्रयान-2 की वेलोसिटी में 1.12 मीटर प्रति सेकंड का इजाफा किया गया है.

चांद की सतह को छूने से पहले क्या होगा?
धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है. लॉन्चिंग के बाद चंद्रमा के लिए लंबी यात्रा शुरू होगी. चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे. चांद की सतह पर उतरने के 4 दिन पहले रोवर 'विक्रम' उतरने वाली जगह का मुआयना करना शुरू करेगा. लैंडर यान से डिबूस्ट होगा. 'विक्रम' सतह के और नजदीक पहुंचेगा. इसके बाद उतरने वाली जगह को ये स्कैन करना शुरू करेगा. फिर 6-8 सितंबर के बीच लैंडिंग की प्रक्रिया शुरू होगी. इसके बाद लैंडर (विक्रम) का दरवाजा खुलेगा और वह रोवर (प्रज्ञान) को रिलीज करेगा. रोवर के निकलने में करीब 4 घंटे का समय लगेगा. फिर ये साइंटिफिक टेस्टिंग के लिए चांद की सतह पर निकल जाएगा. इसके 15 मिनट के अंदर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी.

चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग चांद के साउथ पोल पर एक रोवर को उतारने के उद्देश्य से की जा रही है.


ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर क्या काम करेंगे?
चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना है. ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा, ताकि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगाया जा सके. वहीं, लैंडर और रोवर चांद पर एक दिन (पृथ्वी के 14 दिन के बराबर) काम करेंगे. लैंडर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं. जबकि, रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा.

चंद्रयान-2 की खासियत
- चंद्रयान-2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वजन के लगभग बराबर है.
- इसमें 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे. इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा.
- चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया.
- यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा.
- भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की.
- चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है.

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First published: July 22, 2019, 11:21 AM IST
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