मिशन मून चंद्रयान: चांद के डार्क साइड पर ही क्यों उतारा जाएगा चंद्रयान-2?

चांद के इस हिस्से को डार्क साइड कहा जाता है. इसके बारे में दुनिया को ज्यादा जानकारी नहीं है. भारत से पहले चांद पर जा चुके अमेरिका, रूस और चीन ने अभी तक इस जगह पर कदम नहीं रखा है.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 3:00 PM IST
मिशन मून चंद्रयान: चांद के डार्क साइड पर ही क्यों उतारा जाएगा चंद्रयान-2?
चंद्रयान-2 चंद्रयान-1 का एक्सटेंडेट वर्जन है.
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Updated: July 22, 2019, 3:00 PM IST
भारत के महात्वाकांक्षी मिशन मून चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) आखिरकार लॉन्च हो गया. चंद्रयान को सोमवार दोपहर ठीक 2 बजकर 43 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस रिसर्च सेंटर से लॉन्च किया गया. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) चंद्रयान-2 चांद के साउथ पोल पर उतारेगा. ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आखिर चंद्रयान-2 को चांद के इस हिस्से में क्यों उतारा जा रहा है?

साउथ पोल पर ही लैंडिंग क्यों?
चांद के इस हिस्से को डार्क साइड कहा जाता है. इसके बारे में दुनिया को ज्यादा जानकारी नहीं है. भारत से पहले चांद पर जा चुके अमेरिका, रूस और चीन ने अभी तक इस जगह पर कदम नहीं रखा है. भारत के चंद्रयान-1 मिशन के दौरान साउथ पोल में बर्फ के बारे में पता चला था. वैज्ञानिक इसके बारे में और जानना चाहते हैं, लिहाजा चंद्रयान-2 को साउथ पोल की और जानकारी इकट्ठा करने के लिए भेजा जा रहा है. चंद्रयान-2 चांद के ज्योग्राफिकल सरफेस (भौगोलिक वातावरण), खनिज तत्वों, उसके वायुमंडल की बाहरी परत और पानी की उपलब्धता की जानकारी देगा. ऐसे में माना जा रहा है कि भारत मिशन मून के जरिए दूसरे देशों पर बढ़त हासिल कर लेगा.

यह भी पढ़ें: मिशन मून LIVE UPDATES: Chandrayaan-2 की लॉन्चिंग के लिए ISRO तैयार, भारत रचेगा इतिहास

इस हिस्से में और क्या खास है?
चांद का साउथ पोल इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि इसकी सतह का बड़ा हिस्सा नॉर्थ पोल की तुलना में अधिक छाया में रहता है. वैज्ञानिकों ने यहां पानी होने की संभावना भी जताई है. चांद के इस डार्क हिस्से साउथ पोल में ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्‍त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद है.

इसी रॉकेट से लॉन्च होगा चंद्रयान

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लैंडिंग के बाद क्या होगा?
चंद्रयान-2 की चांद के साउथ पोल पर लैंडिंग के बाद भारत एक ऐसे अनमोल खजाने की खोज कर सकता है, जिससे करीब 500 साल तक इंसानी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं. इससे खरबों डॉलर की कमाई भी हो सकती है. चांद से मिलने वाली यह ऊर्जा न केवल सुरक्षित होगी बल्कि तेल, कोयले और परमाणु कचरे से होने वाले प्रदूषण से मुक्त होगी.

चांद पर इतना फोकस क्यों?
स्टीफन हॉकिंग ने एक बार कहा था, 'मुझे लगता है कि अंतरिक्ष में जाए बिना मानव प्रजाति का कोई भविष्य नहीं होगा.' सभी ब्रह्माण्डीय पिंडों में से चंद्रमा हमारे सबसे नजदीक है. यहां पर और गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए ज़रूरी तकनीकों का ज़्यादा आसानी से परीक्षण हो सकता है. ऐसे ही कुछ फायदों के कारण चंद्रमा पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है.



चंद्रयान-2 की खासियत
- चंद्रयान-2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वजन के लगभग बराबर है.
- इसमें 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे. इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा.
- चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया.
- यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा.
- भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की.
- चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है.

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First published: July 22, 2019, 1:43 PM IST
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