15 जुलाई को चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग, ISRO के साइंटिस्ट कर रहे हैं GSLV मार्क-3 की जांच

जीएसएलवी की उड़ान से पहले उसके सभी उपकरणों की जांच की जा रही है. चंद्रयान- 2 में 3 मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं.

News18Hindi
Updated: July 12, 2019, 2:01 PM IST
15 जुलाई को चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग, ISRO के साइंटिस्ट कर रहे हैं GSLV मार्क-3 की जांच
अंतिम चरण में चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तैयारियां
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Updated: July 12, 2019, 2:01 PM IST
15 जुलाई को देश के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग होनी है. इससे पहले इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. चंद्रयान-2 को जीएसएलवी मार्क-3 से लॉन्च किया जाएगा, जिसकी श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर पर अंतिम जांच चल रही है. इसरो (ISRO) 15 जुलाई को रात 2.51 मिनट पर चंद्रयान को लॉन्च करेगा. चंद्रयान 6 सितंबर को चांद पर कदम रखेगा.

जीएसएलवी की उड़ान से पहले उसके सभी उपकरणों की जांच की जा रही है. चंद्रयान- 2 में 3 मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं. जीएसएलवी मार्क-3, चंद्रयान-2 ऑर्बिटर और लैंडर को धरती की कक्षा में स्थापित करेगा, जिसके बाद उसे चांद की कक्षा में पहुंचाएगा.



चंद्रयान-2 के चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद उससे रोवर निकलेगा और चहलकदमी करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा.



चंद्रयान-2 की खासियतें

>>चंद्रयान-2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वजन के लगभग बराबर है.
>>इसमें 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे. इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा.
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>>चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया.
>>यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा.
>>भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की.
>>चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है.

अंतरिक्ष में ताकत बढ़ा रहा भारत
हाल के साल में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में लंबी उड़ान भरी है और दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है. बीते मार्च में भारत ने अंतरिक्ष में लाइव सैटेलाइट को मार गिराया. अपनी 'मिशन शक्ति' की इस कामयाबी के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया, जिनके पास मिसाइल को अंतरिक्ष में मार गिराने की तकनीक है. अब तक यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के पास थी. अंतरिक्ष में भारत की इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और अधिकारियों को बधाई दी. साथ ही उन्होंने 'मिशन शक्ति' को लेकर देश के नाम संदेश भी दिया था.

2022 में अंतरिक्ष में मानवयुक्त मिशन भेजेगा भारत

अंतरिक्ष क्षेत्र में मिल रही कामयाबी से उत्साहित भारत ने 2022 में स्पेस में मानवयुक्त मिशन 'गगनयान' भेजने का ऐलान किया है. बीते साल 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी घोषणा की थी. इसरो इस मिशन की तैयारी में जुटा है.

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