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सरकार ने लोकसभा में बताया, क्यों हुई थी चंद्रयान-2 की हार्ड लैंडिंग?

News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 8:47 AM IST
सरकार ने लोकसभा में बताया, क्यों हुई थी चंद्रयान-2 की हार्ड लैंडिंग?
चंद्रयान-2 की हार्ड लैंडिंग का कारण बताया राज्य मंत्री ने

दूसरे फेज (Second Phase) के दौरान वेग में कमी डिजाइन की गई वैल्यू से ज्यादा थी. जिसके चलते विक्रम लैंडर (Vikram Lander) की 500 मीटर के दायरे में हार्ड लैंडिंग हुई.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 8:47 AM IST
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नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के महात्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं, जिनके बारे में वे जानना चाहते हैं. राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में चंद्रयान-2 से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब दिया. जितेंद्र सिंह ने ये भी बताया कि आखिर चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग क्यों हुई थी?

स्पेस डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी देख रहे जितेंद्र सिंह ने कहा कि लैंडर के उतरने के दौरान वेग 1,683 मीटर प्रति सेकंड से घटाकर 146 मीटर प्रति सेकंड कर दिया गया था. यह बात उन्होंने चंद्रयान-2 की हार्ड लैंडिंग के बारे में लोकसभा में उठ रहे सवाल का एक लिखित जवाब देते हुए कही.

इसलिए हुई चंद्रयान-2 की हार्ड लैंडिग
जितेंद्र सिंह ने बताया कि पहले फेज का अवरोहण चांद से 30 से 7.4 किलोमीटर की दूरी पर किया गया और उस वक्त वेग 1683 मीटर से घटाकर 146 मीटर प्रति सेकंड कर दिया गया था. दूसरे फेज के दौरान वेग में कमी डिजाइन की गई वैल्यू से ज्यादा थी. जिसके चलते विक्रम लैंडर की 500 मीटर के दायरे में हार्ड लैंडिंग हुई. लैंडिंग के लिए जो वेग तय किया गया था वो पैरामीटर से मैच नहीं कर पाया.

बाकी कम्पोनेंट कर रहें हैं सही काम
मंत्री ने कहा कि टेक्नॉलजी के बाकी के कम्पोनेंट- लॉन्च, ऑर्बिटल क्रिटिकल मनुवर, लैंडर सेपरेशन, डी-बूस्ट और रफ ब्रेकिंग फेज सभी सफलतापूर्वक पूरा किया गया है. ये सभी डेटा उपलब्ध कराने में कामयाब रहे. सटीक लॉन्च और ऑर्बिटर की कुशलता के कारण ऑबिटर की मिशन लाइफ सात साल बढ़ गई है. ऑर्बिटर के सभी आठ अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण डिजाइन के अनुसार ही काम कर रहे हैं.

22 जुलाई को हुआ था लॉन्च
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स्वदेशी रूप से विकसित चंद्रयान -2 अंतरिक्ष यान जिसमें ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल थे को 22 जुलाई 2019 को स्वदेशी GSLV MK III-M1 मिशन में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था. ऑर्बिटर से मिले डेटा वैज्ञानिकों को लगातार मिल रहें हैं. अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक 20 अगस्त को चांद की कक्षा में भेजा गया था.

अगले साल हो सकती है चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग
पहले से तय समय के अनुसार 2 सितंबर 2019 को ऑर्बिटर लैंडर विक्रम को अलग कर दिया गया था. 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए कोशिश की गई थी जो नाकाम रही. इसरो चंद्रयान -3 को संभवत: अगले साल नवंबर में लॉन्च करने की योजना बना रहा है.

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First published: November 21, 2019, 8:19 AM IST
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