OPINION | चंद्रयान 2: प्रधानमंत्री मोदी ने निराशा के वातावरण को उत्साह में बदला

लाल बहादुर शास्त्री ने देश में जवानों और किसानों को तो आम आदमी से जोड़ दिया था, लेकिन देश के वैज्ञानिकों (Scientists) को आम आदमी से जोड़ने का काम पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने किया है.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 1:35 PM IST
OPINION | चंद्रयान 2: प्रधानमंत्री मोदी ने निराशा के वातावरण को उत्साह में बदला
इसरो के वैज्ञानिकों को संबोधित करते पीएम मोदी.
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 1:35 PM IST
'मोदी है तो मुमकिन है' ये नारा यू हीं नहीं दिया गया है, ये नारा बताता है कि नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश के युवा वर्ग में कितना आत्मविश्वास आया है और चन्द्रयान 2 मिशन के दौरान इसका उदाहरण भी दिखने को मिला. मिशन चन्द्रयान 2 (Chandrayaan 2) में, तकनीकी कारणों से ये मिशन भले ही पूरा नहीं हो पाया लेकिन इस मिशन में वैज्ञानिकों ने अपने लक्ष्य का 95 फीसदी हिस्सा पूरा कर लिया. पूरे मिशन के दौरान जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने वैज्ञानिकों का साथ दिया, वो इससे पहले भारतीय इतिहास में पहले कभी देखने को नहीं मिला.

तीन दिन की रूस यात्रा की थकान मिटाए बिना प्रधानमंत्री स्पेस सेंटर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने अपेक्षा के अनुरुप सफलता न मिलने पर भी देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी, हौसला बढ़ाया और नए मिशन के लिए तैयार किया उससे असफलता के बाद स्पेस सेंटर का वातारवरण निराशा की बजाय उत्साह में बदल गया. इसके बहाने प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश का नेतृत्व जिन हाथों में है वो हर उस तबके के साथ खड़ा है जो देश के लिए कुछ करना चाहता है, चाहें वह सफल हो या असफल, देश उसकी सोच के साथ है.

प्रक्षेपण के दौरान चंद्रयान 2.


चन्द्रयान 2 के बहाने पीएम ने आम लोगो के विज्ञान से जोड़ा

लाल बहादुर शास्त्री ने देश में जवानों और किसानों को तो आम आदमी से जोड़ दिया था, लेकिन देश के वैज्ञानिकों को आम आदमी से जोड़ने का काम पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों से चन्द्रयान 2 के चांद पर उतरते हुए देखने की अपील की और सेल्फी सोशल मीडिया पर डालने को कहा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वो इन सेल्फी में से कुछ को रिट्वीट भी करेगें. ये बात भले ही देखने और सुनने में आम लगती है लोकिन देश के युवा वर्ग को विज्ञान से जोड़ने का प्रधानमंत्री का ये अपना अलग अंदाज है, प्रधानमंत्री की अपील का असर है कि देश के करोड़ों लाग रातभर जागकर अपने वैज्ञानिकों का प्रयास देखते रहे और उनके असफल होने के बाद भी उनका हौसला बढ़ाते रहे.

प्रधानमंत्री ने बदला वैज्ञानिकों के प्रति देश का नजरिया

देश का एक बड़ा सपना टूट गया लेकिन देश के लोग इस मिशन को लेकर पूरी तरह इसरो और देश के वैज्ञानिकों के साथ हैं. हो भी क्यों नहीं जब देश का प्रधानमंत्री बिना थके, बिना रुके, देश के वैज्ञानिकों के साथ हैं. इसके पहले भी प्रधानमंत्री मोदी पानी के गिलास के बहाने कई बार ये बता चुके हैं कि गिलास खाली है या भरा, ये देखने वाले के नजरिए पर निर्भर करता है. इसी तरह मिशन चन्द्रयान-2 में या तो हम 5 फीसदी असफलता को माने या 95 फीसदी सफलता को. देश ने अपने प्रधानमंत्री के अंदाज को माना और वैज्ञानिकों के असफलता की बजाय उनकी 95 फीसदी सफलता को श्रेय दिया. प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि विज्ञान में असफलता जैसा कोई शब्द नहीं है, हर प्रयोग प्रयास का बीज बो जाता है, यानी अब हमारे वैज्ञानिकों को नए प्रयोग के लिए तैयार होना है.
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First published: September 7, 2019, 12:56 PM IST
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