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जलियांवाला बाग में हुए बदलाव की सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना, लोग बोले- यह शहीदों का है अपमान

जलियांवाला बाग में हुए बदलाव की सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना, लोग बोले- यह शहीदों का है अपमान

जलियांवाला बाग में हुए बदलाव की एक तस्वीर (फोटो- @BJP4India)

जलियांवाला बाग में हुए बदलाव की एक तस्वीर (फोटो- @BJP4India)

Jallianwala Bagh:सोशल मीडिया पर जलियांवाला बाग(Jallianwala Bagh) के पुनर्निर्मित परिसर की जमकर आलोचना हो रही है. कुछ इतिहासकार, वाम दल और कांग्रेस के नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है और आरोप लगाया कि ऐतिहासिक धरोहरों से छेड़छाड़ हो रही है.

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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शनिवार को जलियांवाला बाग(Jallianwala Bagh) के पुनर्निर्मित परिसर का वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उद्घाटन किया. इसके साथ ही उन्होंने अमृतसर में जलियांवाला बाग स्मारक स्थल पर विकसित कुछ संग्रहालय दीर्घाओं का भी उद्घाटन किया. लंबे समय से बेकार पड़ी और कम उपयोग वाली इमारतों का दोबारा अनुकूल इस्‍तेमाल सुनिश्चित करते हुए चार संग्रहालय दीर्घाएं निर्मित की गई हैं. हालांकि सोशल मीडिया पर सरकार के इस काम की जमकर आलोचना हो रही है. कुछ इतिहासकार, वाम दल और कांग्रेस के नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है और आरोप लगाया कि ऐतिहासिक धरोहरों से छेड़छाड़ हो रही है.

    इतिहासकार इरफान हबीब ने कहा- ‘यह स्मारकों का निगमीकरण है. आधुनिक संरचनाओं के नाम पर यह अपना असली मूल्य खो रहे हैं.’ वाम दल के नेता सीताराम येचुरी ने कहा- ‘यह हमारे शहीदों का अपमान है. बैसाखी के लिए इकट्ठा हुए हिंदू, मुस्लिम, सिखों के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम को गति दी. जो लोग स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहे वही ऐसा काम कर सकते हैं.’

    कांग्रेस नेता हसीबा ने प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा-  ‘जलियांवाला बाग हत्याकांड में जश्न जैसी क्या चीज है, जहां लाइट और साउंड की जरूरत हो? लेकिन मेरा मानना है कि जिन लोगों ने अंग्रेजों से सांठ-गांठ की हो, वह इन दिनों की भयावहता को कैसे समझेंगे.’

    क्या-क्या बदलाव हुए?
    प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक यह दीर्घाएं उस अवधि के दौरान पंजाब में घटित विभिन्‍न घटनाओं के विशेष ऐतिहासिक महत्‍व को दर्शाती हैं. इन घटनाओं को दिखाने के लिए श्रव्य-दृश्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रस्तुति की व्यवस्था है जिसमें मैपिंग और थ्री डी चित्रण के साथ-साथ कला एवं मूर्तिकला अधिष्ठापन भी शामिल हैं. पीएमओ के अनुसार जालियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को घटित विभिन्‍न घटनाओं को दर्शाने के लिए एक साउंड एंड लाइट शो की व्‍यवस्‍था की गई है.

    उसने जानकारी दी कि इस परिसर में विकास से जुड़ी कई पहल की गई हैं. पंजाब की स्थानीय स्थापत्य शैली के अनुरूप धरोहर संबंधी विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य किए गए हैं. शहीदी कुएं की मरम्मत की गई है और नवविकसित उत्तम संरचना के साथ इसका पुनर्निर्माण किया गया है. पीएमओ के अनुसार इस बाग का केंद्रीय स्‍थल माने जाने वाले ‘ज्वाला स्मारक’ की मरम्मत करने के साथ-साथ इसका पुनर्निर्माण किया गया है और वहां स्थित तालाब को एक ‘लिली तालाब’ के रूप में फिर से विकसित किया गया है तथा लोगों को आने-जाने में सुविधा के लिए यहां स्थित मार्गों को चौड़ा किया गया है.

    पीएमओ के अनुसार इस परिसर में अनेक नई और आधुनिक सुविधाओं को जोड़ा गया है जिनमें लोगों की आवाजाही के लिए उपयुक्त संकेतकों से युक्‍त नव विकसित मार्ग, महत्‍वपूर्ण स्थानों को रोशन करना, देशी वृक्षारोपण के साथ बेहतर भूदृश्य एवं चट्टानों युक्‍त निर्माण कार्य, इत्‍यादि पूरे बगीचे में ऑडियो नोड्स लगाना शामिल हैं.

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