Char Dham Highway Project: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, चारधाम हाईवे अब 12 के बजाए मात्र 5.5 मीटर चौड़ा होगा

Char Dham Highway Project: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, चारधाम हाईवे अब 12 के बजाए मात्र 5.5 मीटर चौड़ा होगा
चार धाम सड़क मार्ग परियोजना के अंतर्गत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को हर मौसम के अनुकूल सड़क मार्ग से जोड़ा जायेगा (सांकेतिक फोटो)

Char Dham Highway Project: चार धाम सड़क मार्ग परियोजना (Chardham Highway Project) के अंतर्गत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ (Kedarnath) और बद्रीनाथ को हर मौसम के अनुकूल सड़क मार्ग से जोड़ा जायेगा. पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘आपको अपने 2018 के दिशानिर्देशों (Guidelines) का पालन करना होगा. कैसे आप अपने ही दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं चलेंगे?’’

  • भाषा
  • Last Updated: September 8, 2020, 10:27 PM IST
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने मंगलवार को कहा कि उत्तराखंड (Uttarakhand) के चार पवित्र स्थलों को जोड़ने वाली सभी मौसम के अनुकूल सड़क बनाने संबंधी चारधाम राजमार्ग परियोजना (Chardham Highway Project) के मामले पर्वतीय क्षेत्र (mountainous terrains) में सड़कों की चौड़ाई के बारे में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways- MoRTH) के 2018 के सर्कुलर का पालन करना होगा. न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन (Justice R F Nariman), न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस (Video Conference) के माध्यम से सुनवाई करते हुये सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) से कहा कि इस परियोजना के लिये 2018 के दिशानिर्देशों (guidelines) का पालन करना ही होगा.

चार धाम सड़क मार्ग परियोजना (Chardham Highway Project) के अंतर्गत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ (Kedarnath) और बद्रीनाथ को हर मौसम के अनुकूल सड़क मार्ग से जोड़ा जायेगा. पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘आपको अपने 2018 के दिशानिर्देशों (Guidelines) का पालन करना होगा. कैसे आप अपने ही दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं चलेंगे?’’ मेहता ने कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee) ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है और इसमें सड़क की चौड़ाई सहित कुछ बिन्दु उठाये गये हैं. उन्होंने कहा कि समिति की अल्पसंख्यक (Minority) राय है कि 2018 के सर्कुलर के अनुसार पर्वतीय क्षेत्र (mountainous terrain) में इंटरमीडियट मार्ग की चौड़ाई 5.5 मीटर होनी चाहिए.

शीर्ष अदालत ने पिछले साल अगस्त में चारधाम राजमार्ग परियोजना को हरी झंडी दी थी
मेहता ने कहा कि इस परियोजना के दायरे में भारत-चीन सीमा भी आती है और चूंकि वहां सेना के वाहनों का आवागमन होता है, इसलिए यह चौड़ाई 5.5 मीटर की बजाये सात मीटर होनी चाहिए. याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने कहा कि प्राधिकारियों ने अनेक निर्देशों का उल्लंघन किया है और इससे इस क्षेत्र में पर्वतों और वृक्षों को बहुत नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने इस परियोजना के लिये वृक्षों की कटाई का मामला भी उठाया.
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पीठ ने कहा, ‘‘हम किसी सतत् जांच में शामिल नहीं हो रहे हैं. यहां मुद्दा 2018 के दिशा-निर्देशों के बारे में है.’’ पीठ ने कहा कि प्राधिकारी को उचित पौधारोपण भी करना चाहिए. शीर्ष अदालत ने पर्यावरण से जुड़े मसले पर गौर करने के लिये उच्चाधिकार समिति गठित करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश में सुधार करते हुये पिछले साल अगस्त में चारधाम राजमार्ग परियोजना को हरी झंडी दी थी.
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