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72 घंटे के अंदर दूसरी बार दिल्ली पहुंचे चरणजीत चन्नी, क्या 'रिमोट कंट्रोल' की तरह काम करेगी पंजाब सरकार?

मुख्यमंत्री बनने के 72 घंटे के अंदर दूसरी बार चरणजीत चन्नी को दिल्ली बुलाया गया है. (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री बनने के 72 घंटे के अंदर दूसरी बार चरणजीत चन्नी को दिल्ली बुलाया गया है. (फाइल फोटो)

सरकार में आंतरिक कलह के बाद अब शायद हाई कमान यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि स्थानीय नेतृत्व में किसी को भी पूरी तरह से छूट नहीं दी जाएगी. नौकरशाह से लेकर कैबिनेट में कौन होगा और कौन नहीं इस बात पर आखिरी निर्णय गांधी परिवार ही तय करेगा.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से पंजाब (Punjab Politics) की राजनीति में उठी हलचल सीएम के बदलाव के बाद भी शांत होने का नाम नहीं ले रही. पंजाब को चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi ) के रूप में नया सीएम तो मिल गया लेकिन ऐसा मालूम हो रहा है कि पंजाब का रिमोट कंट्रोल दिल्ली हाई कमान के पास होगा. मुख्यमंत्री बनने के 72 घंटे के अंदर दूसरी बार चरणजीत चन्नी को दिल्ली बुलाया गया है.

    सरकार में आंतरिक कलह के बाद अब शायद हाई कमान यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि स्थानीय नेतृत्व में किसी को भी पूरी तरह से छूट नहीं दी जाएगी. नौकरशाह से लेकर कैबिनेट में कौन होगा और कौन नहीं इस बात पर आखिरी निर्णय गांधी परिवार ही तय करेगा.

    सिद्धू खेमें को नियंत्रण में करने की कोशिश

    पंजाब में राजनीतिक हलचल के बीच सबसे दिलचस्प बात यह सामने है कि सूत्र बताते हैं कि गांधी परिवार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को भी ‘नियंत्रण’ में रखने की कोशिश कर रहे हैं. कैबिनेट गठन, एक संकेत भेज रहा है कि वे उन लोगों को भी शामिल करेंगे जिसका सिद्धू खेमा विरोध करता रहा है. कहा यह भी जा रहा है कि पार्टी में शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए पार्टी चुनाव प्रभार के तौर पर किसी को नियुक्त कर सकती है. इसमें सबसे आगे नाम जाखड़ का निकल कर  आ रहा है.

    नौकरशाहों के नाम भी आलाकमान ही तय करेगा

    हालांकि पार्टी आलाकमान ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह राज्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए चन्नी-सिद्धू की जोड़ी को खुली छूट देना चाहती है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों ने कहा है कि वह कामकाज को अपने दायरे में रखना चाहती है.

    पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “न केवल कैबिनेट का हिस्सा कौन होगा, बल्कि सरकार की सहायता करने वाले नौकरशाह कौन होंगे, यह अब आलाकमान, विशेष रूप से, गांधी परिवार द्वारा लिया जाएगा.” सूत्रों ने कहा कि पुलिस आलाकमान के नाम बदलने में देरी भी इसी वजह से हुई क्योंकि आलाकमान खुद नामों की जांच में जुटा हुआ था.

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