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CoronaVirus: अस्पतालों की हालत पर छलका महिला का दर्द- 19 साल की उम्र से टैक्स दे रही हूं, क्या मुझे यहां रहना होगा?

News18Hindi
Updated: March 16, 2020, 12:11 PM IST
CoronaVirus: अस्पतालों की हालत पर छलका महिला का दर्द- 19 साल की उम्र से टैक्स दे रही हूं, क्या मुझे यहां रहना होगा?
तस्वीर- अमृता रायचंद के इंस्टाग्राम पोस्ट से.

शेफ अमृता रायचंद (Chef Amrita Raichand) ने एक सरकारी अस्पताल की हालत बयां की है, जहां उनके दोस्त कोरोना वायरस (CoronaVirus) के शक में इलाज कराने गए थे.

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  • Last Updated: March 16, 2020, 12:11 PM IST
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मुंबई. देश भर में कोरोना वायरस (CoronaVirus) के बढ़ते मामलों के बीच कुछ जगहों से स्वास्थ्य सुविधाओं में खामियों की तस्वीरें सामने आ रही हैं. एक ओर जहां विभिन्न राज्य सरकारों का दावा है कि कोविड-19 संक्रमित लोगों की देखभाल के लिए उनकी व्यवस्था एकदम चाकचौबंद है और किसी भी चुनौती से लड़ने का पूरा इंतजाम है, तो वहीं कुछ तस्वीरें सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं. पेशे से शेफ अमृता रायचंद (Chef Amrita Raichand) ने कुछ ऐसी ही तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट की हैं. इस पोस्ट में रायचंद ने सवाल किया, '19 साल से टैक्स अदा कर रही हूं. क्या मुझे ऐसे अस्पताल में रहना होगा?'

रायचंद ने अपने इंस्टा पोस्ट में कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा, 'मैंने 19 साल की उम्र से कमाना शुरू किया और तब से पूरी ईमानदारी के साथ टैक्स अदा कर रही हूं, लेकिन मैं इस सिस्टम से पूरी तरह निराश हो चुकी हूं. ईश्वर न करें अगर मुझे या मेरे परिवार का कोई सदस्य कोरोना वायरस का संक्रमित पाया जाता है तो मुझे ऐसे अस्पताल में रहना पड़ेगा? यह सरकारी कस्तूरबा अस्पताल (Kasturba Hospital Mumbai) है. इसके अलावा शहर में शायद ही कोई अस्पताल है, जहां Covid-19 का टेस्ट या इलाज हो सकता है.'

रायचंद ने लिखा- 'मेरे एक दोस्त को जब लगा कि उसमें कोरोना वायरस के लक्षण हैं तो वह अस्पताल गया, जहां शायद ही कोई उनका टेस्ट करना चाहता था. दोस्त के आग्रह पर उसे 40 मरीजों के साथ जनरल वार्ड में भर्ती किया गया. सभी संदिग्ध मरीजों के बेड एक दूसरे के बेहद करीब थे. जगह बेहद गंदी थी और वहां कोई कुछ खा-पी नहीं सकता था.'



'दोस्त को टेस्ट का रिजल्ट तक नहीं बताया'



अपनी पोस्ट में रायचंद ने दावा किया कि उनके दोस्त को टेस्ट का रिजल्ट तक नहीं बताया गया. उन्होंने लिखा, 'उसे टेस्ट के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया. 24 घंटे बाद भी उन्हें 2 घंटे इंतजार करने को कहा गया.' अस्पताल की दयनीय हालत का जिक्र करते हुए रायचंद ने लिखा है, 'जब शाम 6 बजे तक अन्य संदिग्ध मरीजों को उनके कोरोना टेस्ट्स के रिजल्ट्स की जानकारी नहीं दी गई तो उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया.' उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल ने रिजल्ट नहीं बताया तो वे चले जाएंगे. इसके बाद अस्पताल ने 20 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया.

रायचंद ने लिखा, 'बड़ा सवाल यह है कि अगर आप विरोध को रोकने के लिए लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं तो क्या अस्पताल को साफ रखने के लिए दो और स्टाफ नहीं रख सकते हैं?'



 




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Truly disappointed in our system & In knowing that despite being an honest tax payer since I started earning from the age of 19, l will be subjected to a hospital like this if God forbid, my family or I need to be tested or test positive for corona virus! This is Kasturba hospital, a government hospital & probably the only one for anyone in the city to be tested or treated for COVID-19. A friend was conscientious enough to go there to be tested as he felt symptomatic! He was first given the option of not getting admitted if he didn’t want to really consider doing the test, on his insistence, he was kept in the general ward with 40 other patients and a few cats. The beds of all suspected patitents were close to each other. The place was filthy to say the least, he could not eat and drink as he did not at any cost want to use the deplorable loo! He was provided no info about the result, after 24 hrs he was asked to wait another 2 hrs as that is the amount of time it would take to get the doctor’s signature to discharge him as he had tested negative! When the suspected patients started protesting the next day saying that they will walk out if they don’t know the result by 6 pm, the hospital took the initiative to deploy 20 police personnel to surround the hospital. The question to be asked here is, that if you can organise so many people to force patients to stay but cannot get 2 extra staff to keep this place clean so that the patients don’t mind staying? We knew a pandemic was coming, couldn’t the place Atleast be cleaned up and be provided with basic sanitations? When we invite people to our homes, or people like President Trump to our country, we clean up and beautify our surroundings. This is a far more important & a bigger crisis in hand. It’s about basic human rights! Something we are entitled to! Through various platforms it is being preached to us to wash our hands & maintain cleanliness to protect ourselves from the virus!!! BUT NONE OF THE HOSPITALS SEEM TO HAVE EVEN BASIC SANITATION REQUIREMENTS! My thought is that We may survive the virus but we may die of other diseases contracted at these hospitals! @cmomaharashtra_ @I @my_bmc @adityathackeray


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कोरोना से नहीं लेकिन अस्पताल की बीमारियों से मर जाएंगे!
कोरोना वायरस के संदर्भ में रायचंद ने लिखा है, 'हम जानते थे कि एक महामारी दस्तक दे रही है तो कम से कम ऐसी जगहों पर सफाई हो और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए? जब ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) सरीखे लोग हमारे यहां आते हैं तो हम आस पास खूब साफ सफाई करते हैं. यह इससे भी ज्यादा जरूरी है. यह बुनियादी मानव अधिकार हैं! हम कुछ चीजों के हकदार हैं!

रायचंद ने लिखा है, 'विभिन्न प्लेटफार्म्स के जरिये हमें अपने हाथों को धोने और खुद को वायरस से बचाने के लिए स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया जा रहा है!!! अस्पतालों में बुनियादी स्वच्छता भी नहीं है! मेरा मानना है कि हम वायरस से बच सकते हैं, लेकिन इन अस्पतालों के जरिये होने वाली दूसरी बीमारियों से मर सकते हैं!'

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First published: March 16, 2020, 10:32 AM IST
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