मुस्लिम परिवार ने दंगे में बचाई थी जान, शेफ विकास खन्ना ने 26 साल बाद ढूंढ निकाला

मशहूर शेफ विकास खन्‍ना पिछले 26 साल से रमजान के महीने में एक दिन रोजा रखते हैं. वह ऐसा इसलिए करते हैं क्‍योंकि 1992 के मुंबई दंगों में एक मुस्लिम परिवार ने उनकी जान बचाई थी.

News18Hindi
Updated: June 13, 2018, 9:57 PM IST
मुस्लिम परिवार ने दंगे में बचाई थी जान, शेफ विकास खन्ना ने 26 साल बाद ढूंढ निकाला
मशहूर शेफ विकास खन्‍ना
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Updated: June 13, 2018, 9:57 PM IST
मशहूर शेफ विकास खन्‍ना पिछले 26 साल से रमजान के महीने में एक दिन रोजा रखते हैं. वह ऐसा इसलिए करते हैं क्‍योंकि 1992 के मुंबई दंगों में एक मुस्लिम परिवार ने उनकी जान बचाई थी. इस साल उनकी मुलाकात फिर से उस परिवार से हो गई और इससे खन्ना काफी खुश है. सोमवार को उन्‍होंने ट्वीट कर बताया कि उस परिवार को ढूंढकर वह काफी खुश हैं और इस बार अपना रमजान उनके साथ पूरा करेंगे. मंगलवार को उन्‍होंने फिर से ट्वीट किया और इससे लग रहा था कि वह उस परिवार से मिल चुके हैं.

शेफ विकास खन्‍ना ने ट्वीट किया, 'दिलखुश कर देने वाली शाम. सारे दिल. आंसू. दर्द. गर्व. साहस. मानवता. सम्‍मान. यह मेरी जिंदगी की सबसे अहम और यादगार ईद होगी. मेरी आत्‍माओं से मिलाने के लिए सबका शुक्रिया.' उन्‍होंने साल 2015 में फेसबुक के जरिए उस घटना का जिक्र किया था.

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इसमें उन्‍होंने लिखा था, 'मुंबई में दिसंबर 1992 में जब दंगे हुए उस समय वह सीरॉक शेरेटन में ट्रेनिंग ले रहा था और पूरा शहर जल रहा था. हम कई दिनों तक होटल में ही फंसे रहे. इकबाल खान और वसीम भाई(ट्रेनी शेफ और एक वेटर, जिनसे मेरा संपर्क हमेशा के लिए टूट गया.) और उनके परिवार ने इस दौरान मुझे पनाह दी और खाना दिया. उस साल के बाद से मैं रमजान के पवित्र महीने में एक दिन रोजा रखता हूं और उन्‍हें मेरी दुआओं में याद करता हूं. सभी को प्‍यार.'




विकास खन्‍ना ने पिछले साल एक इंटरव्‍यू में इस वाकये का विस्‍तार से जिक्र करते हुए कहा था कि कर्फ्यू की वजह से स्‍टाफ का कोई व्‍यक्ति होटल से न तो बाहर जा पा रहा था और न अंदर आ पा रहा था. एक दिन उन्‍होंने अफवाह सुनी कि घाटकोपर में दंगों की वजह से कई लोग जख्‍मी हुए हैं. ऐसा सुनकर अपने भाई की चिंता में वह घाटकोपर की ओर दौड़े जबकि रास्‍ते की भी जानकारी नहीं थी. रास्‍ते में एक मुस्लिम परिवार ने उन्‍हें दंगों के बारे में चेताया और शरण दी. जल्‍दी ही वहां भीड़ इकट्ठी हो गई और पूछने लगे कि घर में कौन आया है. इस पर मुस्लिम परिवार ने बताया कि वह उनका बेटा है. ऐसा सुनने के बाद भीड़ वहां से चली गई.



बकौल खन्‍ना, 'दो दिन तक मैं उनके यहां सोया. मुझे उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उस परिवार ने मेरे परिवार को ढूंढ़ने के लिए भेजा और वह सुरक्षित मिला. उस साल के बाद से मैं हर साल रमजान में एक रोजा रखता हूं.'
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