चेन्नई के डॉक्टरों ने एशिया में पहली बार ट्रांसप्लांट किये फेफड़े, दिल्ली से ले जाया गया था COVID-19 रोगी

चेन्नई के डॉक्टरों ने एशिया में पहली बार ट्रांसप्लांट किये फेफड़े, दिल्ली से ले जाया गया था COVID-19 रोगी
एमजीएम हेल्थकेयर में हृदय और फेफड़े के प्रत्यारोपण की सर्जरी की गई (सांकेतिक फोटो, AP)

एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के निदेशक (Director of the Heart & Lung Transplant programme) डॉ. केआर बालाकृष्णन ने दोनों ओर के फेफड़े के प्रत्यारोपण (bilateral lung transplant) का नेतृत्व किया.

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  • Last Updated: August 29, 2020, 5:58 PM IST
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चेन्नई. चेन्नई (Chennai) स्थित मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल MGM हेल्थकेयर (Multi-specialty hospital MGM Healthcare) ने एक कोरोना वायरस पॉजिटिव रोगी (Coronavirus-positive patient) में एशिया का पहला दोनों ओर के फेफड़ों का प्रत्यारोपण (a bilateral/double-lung transplant) करने का दावा किया है. अस्पताल के सर्जनों (Surgeon) ने संक्रमित मरीज पर एक द्विपक्षीय (डबल-लंग) प्रत्यारोपण किया, जो दिल्ली (Delhi) से लाया गया था. इन फेफड़ों का दाता एक 34 वर्षीय व्यक्ति था, जिसे दिमाग के अंदर रक्तस्राव (intra-cerebral hemorrhage) से पीड़ित होने के बाद गुरुवार को अपोलो ग्लेनेगल्स ग्लोबल अस्पताल में ब्रेन डेड (Brain dead) घोषित कर दिया गया था. वह अपने दिल, लिवर (liver) और त्वचा को भी शहर के अस्पतालों में विभिन्न प्राप्तकर्ताओं को दान करने के लिए सहमत हुआ था.

संयोग से, 12 जनवरी, 2014 को घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर एक हादसे में अपने हाथों को खोने के बाद एक महिला को भी असली अंगों की जोड़ी (a real pair of limbs) की तलाश के साथ मुंबई से भेजा गया था. एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के निदेशक (Director of the Heart & Lung Transplant programme) डॉ. केआर बालाकृष्णन ने दोनों ओर के फेफड़े के प्रत्यारोपण (bilateral lung transplant) का नेतृत्व किया. डॉ. बालकृष्णन ने कहा कि यह सराहनीय (commendable) था कि डॉक्टर प्रत्यारोपण करने के निर्णय से खड़े हुए और अपनी जान जोखिम में डाल दी.

अलग-अलग अंग अलग-अलग अस्पतालों और लोगों को मिले
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि कोरोना वायरस संबंधी फाइब्रोसिस से 48 वर्षीय व्यक्ति के फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हुए थे और जैसे ही उनकी ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी आई, गाजियाबाद के एक अस्पताल ने उन्हें वेंटिलेटर पर रख दिया और बाद में ईसीएमओ (ECMO) पर रखा गया. उन्हें 20 जुलाई को चेन्नई ले जाया गया.
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जबकि ग्लोबल अस्पताल चेन्नई ने जिगर को रखा, शहर के विभिन्न अस्पतालों में हृदय, फेफड़े, गुर्दे और त्वचा दान किए गए. उनके हाथ मुंबई की एक युवती मोनिका मोरे को लगाए गए, जो कृत्रिम हाथों का उपयोग कर रही थीं और अब दोनों हाथों की जोड़ी के ऑपरेशन के सफल होने पर असली हाथों की जोड़ी पा जाएंगीं. एमजीएम हेल्थकेयर में हृदय और फेफड़े के प्रत्यारोपण की सर्जरी की गई.
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