नहीं रहे '5 रुपये वाले डॉक्टर', एक्टर विजय ने फिल्म मेर्सल में किया था उन पर आधारित रोल

नहीं रहे '5 रुपये वाले डॉक्टर', एक्टर विजय ने फिल्म मेर्सल में किया था उन पर आधारित रोल
डॉ. थिरुवेंगडम ने 2017 की तमिल फिल्म 'मेर्सल’ की रिलीज के बाद तेजी से प्रसिद्धि पाई थी (फिल्म का एक दृश्य)

डॉ थिरुवेंगडम ने 2017 की तमिल फिल्म 'मेर्सल’ (Tamil Film Mersal) की रिलीज के बाद तेजी से प्रसिद्धि पाई थी. इस फिल्म में हीरो विजय (Actor Vijay) ने '5 रुपये वाले डॉक्टर’ की भूमिका को निभाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2020, 6:29 PM IST
  • Share this:
चेन्नई. व्यासपुरडी के '5 रुपये वाले डॉक्टर' (5 rupee doctor) के रूप में प्रसिद्ध डॉ. वी थिरुवेंगडम का शनिवार को दक्षिणी रेलवे अस्पताल में हृदय गति रुकने (heart attack) से निधन हो गया. वह 70 वर्ष के थे और उनकी पत्नी टी सरस्वती, बेटी टी प्रीति और पुत्र टी दीपक उनके परिवार (family) में थे. यह पुष्टि करते हुए कि वे कोविड-19 से संक्रमित (COVID-19 Infected) नहीं थे, उनकी बेटी प्रीति, जो खुद एक डॉक्टर हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें 13 अगस्त को सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल (Hospital) में भर्ती कराया गया था. उन्होंने यह भी कहा, "हम आज उन्हें डिस्चार्ज (discharge) कराने के लिए व्यवस्था कर रहे थे, जब उन्हें भारी हृदयघात (heart attack) हुआ और दोपहर 12.05 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली."

यह बताते हुए कि वे अभी तक अपने पिता के क्लिनिक (clinic) को वी कल्याणपुरम में जारी रखने के बारे में फैसला नहीं कर सकी हैं, उसने बताया कि वे मार्च से घर पर थे और अपने कुछ नियमित मरीजों (regular patients)0  को फोन पर सलाह दे रहे थे. सरकारी स्टेनली मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र डॉ. थिरुवेंगडम ने 2017 की तमिल फिल्म 'मेर्सल’ (Tamil Film Mersal) की रिलीज के बाद तेजी से प्रसिद्धि पाई थी. इस फिल्म में हीरो विजय (Actor Vijay) ने '5 रुपये वाले डॉक्टर’ की भूमिका को निभाया था.

45 साल पहले जब खोला था क्लिनिक तो लेते थे 2 रुपये फीस
पिछले 25 वर्षों से डॉक्टर के सहायक एस बूबालन ने कहा कि वह एक किशोर के रूप में उनसे जुड़े. और क्लिनिक में मरीजों को टोकन वितरित करना शुरू किया, जो शाम 07.30 से आधी रात तक खोला जाता था. दसवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ देने वाले बूबालन ने कहा, "जब मैंने ज्वाइन किया तो प्रति मरीज "5 रुपये लिये जाते थे." लेकिन जब 45 साल पहले उन्होंने क्लिनिक शुरू किया था, तो यह प्रति व्यक्ति 2 रुपये था.”
रोजाना 150 मरीजों का करते थे इलाज, ज्यादातर को देते थे मुफ्त दवा


उन्होंने बताया कि डॉक्टर के पास इलाज के लिए रोज करीब 150 मरीज आते थे. जिन्हें अक्सर मुफ्त में दवा दी जाती थी. और कई बार तो कुछ जरूरतमंदों को डॉक्टर पैसे भी दे देते थे. उन्होंने डॉक्टर के निधन को निवासियों से लिए भारी नुकसान बताया.

यह भी पढ़ें: तेल रिसाव से निपटने में मॉरीशस की मदद के लिए भारत ने भेजी विशेषज्ञों की टीम

डॉ थिरुवेंगडम की पत्नी एक पूर्व रेल कर्मी हैं, जबकि उनके बेटे मॉरिशस के एक मेडिकल कॉलेज में आखिरी साल की पढ़ाई कर रहे हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading