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जवानों के वेलफेयर के लिए बने बोर्ड की 20 साल से नहीं हुई नियमित मीटिंग

News18Hindi
Updated: March 5, 2019, 8:51 PM IST
जवानों के वेलफेयर के लिए बने बोर्ड की 20 साल से नहीं हुई नियमित मीटिंग
(सांकेतिक तस्वीर)

सात फरवरी को हुई सुरक्षा विभाग की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की बैठक न केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित रही बल्कि यह पूरे देश में चर्चित रही.

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अनिरुद्ध घोषाल.

14 फरवरी का पुलवामा हमला. सीआरपीएफ के 40 जवान एक झटके में शहीद हो गए. जिस राज्य के सबसे ज्यादा जवान शहीद हुए वह था उत्तर प्रदेश. जाहिर तौर पर यह कहा जा सकता है कि सुरक्षाबलों में शामिल होने में सबसे ज्यादा जवान उत्तर प्रदेश की धरती से आते हैं.

लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इन सबके बावजूद शहीदों और घायल जवानों के आश्रितों को घर और पेंशन देने वाले उत्तर प्रदेश बोर्ड की पिछले बीस वर्षों में कोई मीटिंग तक नहीं हुई.



सात फरवरी को हुई सुरक्षा विभाग की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की बैठक न केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित रही बल्कि यह पूरे देश में चर्चित रही. इस मीटिंग का निष्कर्ष यही रहा कि 15 राज्यों के बोर्ड ने सालों से कोई मीटिंग नहीं ली.



उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जो सुरक्षाबलों के कोष में 20 प्रतिशत का अनुदान देते हैं उनकी मई 1999 और जून 1997 से कोई मीटिंग नहीं हुई.

infogram.com पर प्रकाशित लिस्ट.


प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में राज्य सैनिक बोर्ड (RSB) के पास सशस्त्र बलों के योद्धाओं के वेलफेयर को तय करने की जिम्मेदारी होती है. पूर्व सैनिकों के विधवाओं और परिवार के लिए आरक्षण नीति के अनुसार स्व-वित्तपोषित व्यवसाय और उपक्रमों के माध्यम से सहायता दी जाती है.

रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सेना के जवान आपना जीवन राष्ट्र की सेवा को समर्पित करते हैं. आरएसबी यह तय करता है कि उनकी सेवा अवधि या उनकी मृत्यु के बाद, उन्हें या उनके परिवारों का ध्यान रखा जाए.'

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लेकिन सर्विसमेन और उनके वेलफेयर पर बनी रिपोर्ट साफ करती है कि न बोर्ड की मिटिंग नियमित तौर पर हुई न ही उन्हें सामान्य तौर पर फीडबीक दिया गया जबकि यह नियमित होना चाहिए था.

समिति के सामने इस बात की पुष्टि हुई कि आरएसबी की वार्षिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की गईं और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी माना कि इस संबंध में चूक हुई है.

बैठक में यह कहा गया कि 'समिति को दृढ़ता से लगता है कि प्रभावी कामकाज के लिए, नियमित फीडबैक और संभावित सुधारों के लिए, आरएसबी की नियमित वार्षिक बैठकें जरूरी हैं. इसलिए, समिति की इच्छा है कि नियमित बैठकें आयोजित करने के लिए केंद्रीय सैनिक बोर्ड इस मामले को आगे बढ़ाए.

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First published: March 5, 2019, 4:52 PM IST
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