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महबूबा और उमर पर PSA लगाने पर चिदंबरम बोले- ये लोकतंत्र में सबसे गंदा कदम

News18Hindi
Updated: February 7, 2020, 10:15 AM IST
महबूबा और उमर पर PSA लगाने पर चिदंबरम बोले- ये लोकतंत्र में सबसे गंदा कदम
पी चिदंबरम की फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) और महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की छह महीने की 'ऐहतियातन हिरासत' पूरी होने से महज कुछ घंटे पहले गुरुवार को उनके खिलाफ जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया.

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  • Last Updated: February 7, 2020, 10:15 AM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों, उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) और महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट यानी PSA लगा दिया गया है. ये दोनों नेता पिछले छह महीने से नज़रबंद हैं. जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के एक दिन पहले ही इन्हें उनके घर में नज़रबंद कर लिया गया था. सरकार के इस कदम की कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आलोचना की है. चिंदबरम ने कहा, 'उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और अन्य के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम को गलत तरीके से इस्तेमाल किये जाने से बुरी तरह से आहत हूं. ये लोकतंत्र में सबसे घटिया और गंदा कदम है.'

चिदंबरम ने कहा, 'आरोपों के बिना हिरासत में रखना लोकतंत्र में सबसे बुरा द्वेष है. जब अन्यायपूर्ण कानून पारित किए जाते हैं या अन्यायपूर्ण कानून लागू किए जाते हैं, तो लोगों के पास शांति से विरोध करने के अलावा और क्या विकल्प होता है.'

पूर्व गृह मंत्री ने कहा, 'पीएम का कहना है कि विरोध प्रदर्शन से अराजकता होगी और संसद और विधानसभाओं द्वारा पारित कानूनों का पालन करना होगा.वह इतिहास और महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला के प्रेरक उदाहरणों को भूल गए हैं. शांतिपूर्ण प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा के माध्यम से अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध किया जाना चाहिए. वह सत्याग्रह है.'

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की छह महीने की 'ऐहतियातन हिरासत' पूरी होने से महज कुछ घंटे पहले गुरुवार को उनके खिलाफ जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया. इससे पहले दिन में नेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव व पूर्व मंत्री अली मोहम्मद सागर और पीडीपी के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी पर भी पीएसए लगाया गया.

एक पुलिस अधिकारी के साथ एक मजिस्ट्रेट यहां हरि निवास पहुंचे, जहां 49 वर्षीय उमर पांच अगस्त से नजरबंद हैं. इसी दिन केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेकर उसे दो केन्द्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में विभाजित कर दिया था. उन्होंने पीएसए के तहत जारी वारंट उमर को सौंपा. उमर के दादा तथा पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के शासनकाल में 1978 में लकड़ी की तस्करी को रोकने के लिये यह कानून लाया गया था.

अतीत में व्यवस्था के खिलाफ बयान देने का आरोप
जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत दो प्रावधान हैं-लोक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा को खतरा. पहले प्रावधान के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के छह महीने तक और दूसरे प्रावधान के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. साल 2000 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में विदेश राज्य मंत्री व वाणिज्य मंत्री रहे उमर को तीन पन्नों का एक डॉजियर सौंपा गया है, जिसमें उनपर अतीत में व्यवस्था के खिलाफ बयान देने का आरोप है.उमर 2009 से 2014 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे. उमर के पिता फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ भी पिछले साल सितंबर में पीएसए के तहत मामला दर्ज किया था, जिसकी दिसंबर में समीक्षा की गई थी. इसी प्रकार, मजिस्ट्रेट और एक पुलिस अधिकारी ने महबूबा मुफ्ती के सरकारी आवास पर जाकर उन्हें 2010 में दिये गए बयानों को लेकर डॉजियर सौंपा जिसमें उन भाषणों को उन्हें हिरासत में रखने का कारण बताया.

महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी 2014 से भाजपा की सहयोगी पार्टी थी. दोनों ने मिलकर 2018 तक जम्मू-कश्मीर में सरकार चलाई. बीजेपी ने अचानक सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद वहां राज्यपाल शासन लगा दिया गया.

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First published: February 7, 2020, 9:49 AM IST
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