INX मीडिया केस: चिदंबरम को हाईकोर्ट से क्यों नहीं मिली राहत? जानिए वजह

News18Hindi
Updated: August 21, 2019, 9:06 AM IST
INX मीडिया केस: चिदंबरम को हाईकोर्ट से क्यों नहीं मिली राहत? जानिए वजह
पी चिदंबरम की बढ़ सकती है मुश्किलें.

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने अपने आदेश में कहा कि पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) से जुड़ा INX मीडिया मामला मनी लॉन्ड्रिंग का एक क्लासिक उदाहरण है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 21, 2019, 9:06 AM IST
  • Share this:
केंद्रीय गृहमंत्री और वित्तमंत्री के पद पर रह चुके पी चिदंबरम (P. Chidambaram) की मुश्किलें अब बढ़ने वाली है. INX मीडिया केस (INX Media Case) में उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने अपने 24 पेज के फैसले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया है. इस मामले में कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि INX मीडिया केस में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वो मुख्य साजिशकर्ता हैं. कोर्ट ने उन्हें इस मामले का 'किंगपिन' कहा है.

सीबीआई और ईडी की टीम भी उनके घर पहुंची
कोर्ट के मुताबिक प्रभावी जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है. चिदंबरम की तरफ से कानूनी विशेषज्ञों की टीम सुप्रीम कोर्ट पहुंची पर उन्हें राहत नहीं मिली. वहीं दूसरी तरफ सीबीआई और ईडी की टीम भी उनसे पूछताछ को उनके घर पर पहुंची, लेकिन अधिकारियों को चिदंबरम की अनुपस्थिति में खाली हाथ ही लौटना पड़ा.

INX मीडिया केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने पी चिदंबरम को बड़ा झटका दिया है.


याचिकाकर्ता को जमानत नहीं
पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर अपना आदेश सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वो आईएनएक्स मीडिया मामले में मुख्य साजिशकर्ता हैं. जस्टिस सुनील गौड़ ने कहा, 'तथ्यों के आधार पर याचिकाकर्ता को जमानत नहीं दी जाएगी.'

ये आदेश पूर्व वित्त मंत्री और पूरी पार्टी के लिए बड़ा झटका
Loading...

कोर्ट के आदेश में कहा गया कि मनी लॉन्ड्रिंग का यह एक पहले दर्जे का मामला है. याचिकाकर्ता पर लगे आरोप गंभीर हैं. कोर्ट के सवालों के साफ-साफ जवाब नहीं मिलने को प्रमुख कारक मानते हुए अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया गया. हाई कोर्ट का ये आदेश पूर्व वित्त मंत्री और पूरी पार्टी के लिए बड़े झटके की तरह है.

चिदंबरम का बेटा भी है शामिल
ईडी की ओर से दलील थी कि जिन कंपनियों में पैसे दिए गए, उन सबमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर चिदंबरम के बेटे कार्ति शामिल हैं. उनके पास ये मानने की वजह है कि INX मीडिया को एफआईपीबी मंजूरी उनके बेटे के दखल पर दी गई. तारीख 25 जुलाई 2018 को हाई कोर्ट ने चिदंबरम को दोनों ही मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था. जिसकी अवधि समय-समय पर बढ़ाई गई थी.

कार्ति चिदंबरम


ये मामला मनी लॉन्ड्रिंग का एक क्लासिक उदाहरण

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पी. चिदंबरम से जुड़ा INX मीडिया मामला मनी लॉन्ड्रिंग का एक क्लासिक उदाहरण है. कोर्ट की केस को लेकर पहली नज़र में मानना है कि इस मामले में बेहतर जांच के लिए उनको हिरासत में लेने और पूछताछ करने की आवश्यक्ता है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया ही पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने ही इस मामले की साजिश की है.

जस्टिस सुनील गौड़ ने क्या कहा
जस्टिस सुनील गौड़ ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत मैसेज जाएगा. उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि जब चिदंबरम को कोर्ट से राहत मिली हुई थी, उस समय उन्होंने पूछताछ में जांच एजेंसियों को इस मामले को लेकर साफ-साफ क्यों नहीं बताया.

ये भी पढ़ें- पी चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार, नहीं मिली अग्रिम जमानत

ईडी के सामने पेश होंगे राज ठाकरे, MNS ने ठाणे बंद वापस लिया

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 21, 2019, 8:33 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...