चिदंबरम को कोर्ट से मिली आंशिक राहत, फिलहाल तिहाड़ जेल नहीं जाएंगे, हिरासत एक दिन बढ़ी

आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले (INX Media Scam Case) में गिरफ्तार पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) को सोमवार को उच्चतम न्यायालय से उस समय आंशिक राहत मिल गयी जब शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में उन्हें फिलहाल तिहाड़ जेल नहीं भेजा जायेगा.

भाषा
Updated: September 2, 2019, 10:38 PM IST
चिदंबरम को कोर्ट से मिली आंशिक राहत, फिलहाल तिहाड़ जेल नहीं जाएंगे, हिरासत एक दिन बढ़ी
INX मीडिया भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से उस समय आंशिक राहत मिल गयी जब शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में उन्हें फिलहाल तिहाड़ जेल नहीं भेजा जायेगा.
भाषा
Updated: September 2, 2019, 10:38 PM IST
आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले (INX Media Scam Case) में गिरफ्तार पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) को सोमवार को उच्चतम न्यायालय से उस समय आंशिक राहत मिल गयी जब शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में उन्हें फिलहाल तिहाड़ जेल नहीं भेजा जायेगा. इससे पहले, चिदंबरम ने उन्हें तिहाड़ जेल भेजने की बजाय घर में ही हिरासत में रखने की पेशकश की.

कांग्रेस के 73 वर्षीय वरिष्ठ नेता के तीन अलग-अलग अदालतों में कानूनी जंग लड़ने के बीच विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ ने उनकी सीबीआई हिरासत की अवधि एक दिन के लिये बढ़ा दी और उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर मंगलवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे सुनवाई करने का फैसला किया.

मंगलवार को शीर्ष अदालत भी चिदंबरम के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट और निचली अदालत द्वारा पारित रिमांड आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करेगी. इससे 21 अगस्त की रात को गिरफ्तारी के बाद से कल का दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री के लिये अहम हो गया है.

11 दिन से हिरासत में हैं चिदंबरम

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 20 अगस्त को चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किये जाने के उपरांत गिरफ्तार किये जाने के बाद से सीबीआई ने उनसे 11 दिन हिरासत में पूछताछ की है. इस बीच, दिल्ली की एक अदालत ने एयरसेल-मैक्सिस मामलों में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर अपना आदेश पांच सितम्बर तक सुरक्षित रख लिया.

सीबीआई और ईडी ने अदालत में एयरसेल-मैक्सिस घोटाले से संबंधित मामलों में चिदंबरम और कार्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ किये जाने की मांग की और कहा कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति को गिरफ्तारी से संरक्षण का विरोध करते हुए एजेंसियों ने कहा कि वे जांच को प्रभावित करेंगे और एयरसेल-मैक्सिस घोटाले से संबंधित मामलों में उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ किये जाने की मांग की.

सीबीआई और ईडी ने पिता-पुत्र द्वारा दायर अग्रिम जमानत अर्जियों का भी विरोध करते हुए कहा कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. जांच एजेंसियों ने विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी को बताया कि इस बात को मानने के कारण हैं कि चिदंबरम (73) और कार्ति ने धन शोधन किया जो उनकी गिरफ्तारी के लिये पर्याप्त है. सीबीआई ने कहा कि पिता-पुत्र से सख्ती के साथ निपटे जाने की जरूरत है. एजेंसी ने कहा कि एयरसेल-मैक्सिस भ्रष्टाचार मामले की जांच अभी जारी है.
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एयरसेल-मैक्सिस घोटाले में 3 सितंबर तक गिरफ्तारी से राहत
अदालत ने 23 अगस्त को चिदंबरम और उनके पुत्र को गिरफ्तारी से मिले अंतरिम संरक्षण की अवधि तीन सितम्बर तक बढ़ा दी थी और सोमवार को इसे गुरुवार तक बढ़ा दिया. ये मामले 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल- मैक्सिस सौदे में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में कथित अनियमितताओं से जुड़े हुए हैं. उस समय पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे.

उधर, शीर्ष अदालत ने पहले अपराह्न करीब एक बजकर 40 मिनट पर निचली अदालत से कहा कि चिदंबरम की अंतरिम जमानत के अनुरोध पर आज ही विचार किया जाये और यदि उन्हें राहत नहीं दी जाती है तो उनकी सीबीआई हिरासत की अवधि तीन दिन के लिये बढ़ा दी जायेगी.

हालांकि, यह आदेश पारित करने के कुछ घंटों बाद सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले का अपराह्न करीब तीन बजे उल्लेख किया और कहा कि पहले पारित किये गये आदेश को लागू करने में अधिकार क्षेत्र की दिक्कतें आयेंगीं.

5 सितंबर की जगह 3 सितंबर को होगी सुनवाई
न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद अपने आदेश में सुधार करते हुये चिदंबरम के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने और बाद में उन्हें सीबीआई की हिरासत में देने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की तारीख बृहस्पतिवार (पांच सितंबर) की बजाय मंगलवार (तीन सितंबर) कर दी.

शीर्ष अदालत ने मेहता द्वारा मौखिक रूप से किये गये उल्लेख पर अपने आदेश में सुधार किया. इससे पहले, मेहता ने कहा कि उनकी गणना के अनुसार चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की 15 दिन की अवधि मंगलवार को पूरी हो जायेगी और सीबीआई उन्हें तीन दिन के लिये और हिरासत में नहीं ले सकती है.

मेहता के कथन का संज्ञान लेते हुये पीठ ने कहा कि सीबीआई निचली अदालत से चिदंबरम को मंगलवार तक पुलिस हिरासत में देने का अनुरोध करने के लिये स्वतंत्र है. भोजनावकाश से पहले के सत्र में चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्ब्ल ने पीठ से कहा कि पूर्व मंत्री को गैर जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था और इसके बाद 12 दिन से वह सीबीआई की हिरासत में हैं. उन्होंने गैर जमानती वारंट जारी करने और फिर कांग्रेस के नेता को सीबीआई की हिरासत में दिये जाने पर सवाल उठाये. इस बीच, विशेष न्यायाधीश कुहाड़ ने कहा कि वह शीर्ष अदालत द्वारा दिन में की गई टिप्पणी के मद्देनजर अपना आदेश सुना रहे हैं.

तीन दिन की हिरासत खत्म होने पर पेश किए गए थे चिदंबरम
चिदंबरम (73) की तीन दिन की सीबीआई हिरासत की अवधि खत्म होने पर उन्हें आज अदालत में पेश किया गया था. विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ मंगलवार को चिदंबरम की अंतरिम जमानत याचिका पर साढ़े तीन बजे के बाद सुनवाई करेंगे. न्यायाधीश ने अपने पांच पन्नों के आदेश में कहा, “अंतरिम जमानत याचिका का नोटिस सीबीआई को दिया जाए जिससे वह तीन सितंबर को अपना जवाब दे सके.”

निचली अदालत में सीबीआई ने मामले में चिदंबरम को किसी भी तरह की राहत दिये जाने का विरोध किया और उनकी हिरासत अवधि एक दिन के लिये बढ़ाए जाने की मांग की. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पूर्व मंत्री की अंतरिम जमानत याचिका पेश की.

सॉलिसिटर जनरल ने मांगा समय
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने चिदंबरम की जमानत याचिका पर जवाब देने के लिये अदालत से वक्त मांगा और कहा कि सीबीआई को नोटिस जारी किया जाए क्योंकि यह वैधानिक रूप से जरूरी है. मेहता ने कहा, “सभी नागरिकों से समान व्यवहार होना चाहिए” और सभी नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता समान है. सुनवाई के दौरान मेहता ने पूछा कि इस मामले में विशेष और असाधारण क्या है?

उनके प्रतिवेदन के जवाब में चिदंबरम की तरफ से ही पेश हुए एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने कहा कि अगर यह एक सामान्य मामला होता तो सॉलिसीटर जनरल खुद यहां नहीं होते. मेहता ने कहा कि अगर सीबीआई को जमानत याचिका पर जवाब देने के लिये समय नहीं मिला तो यह न्याय का गंभीर उपहास होगा.

सीबीआई ने 2007 में चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स मीडिया समूह को 305 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश हासिल करने के दौरान विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी में कथित अनियमितता को लेकर 15 मई 2017 में एफआईआर दर्ज की थी. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस संबंध में 2017 में धनशोधन का मामला दर्ज किया था.

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First published: September 2, 2019, 10:38 PM IST
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