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सुप्रीम कोर्ट को मिले चार नए जज, चारों रहे हैं इन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट को मिले चार नए जज, चारों रहे हैं इन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति हुई है (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति हुई है (फाइल फोटो)

इन सभी जस्टिस का नाम कॉलिजियम (Collegium) की ओर से प्रस्तावित किया गया था. अब इनके नामों पर राष्ट्रपति ने अंतिम मुहर लगा दी है. इससे सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में तीन जजों की नियुक्ति की अनुमति दे दी गई है. ये तीनों जज अभी तक हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और केरल हाईकोर्ट में अपनी सेवाएं बतौर मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) दे रहे थे.

    इन सभी जस्टिस का नाम कॉलिजियम (Collegium) की ओर से प्रस्तावित किया गया था. अब इनके नामों पर राष्ट्रपति ने अंतिम मुहर लगा दी है. इससे सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है.

    ये हैं सुप्रीम कोर्ट के 4 नए जज
    हरियाणा हाईकोर्ट (High Court of Punjab and Haryana) के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कृष्ण मुरारी, हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal Pradesh High Court) के मुख्य न्यायाधीश वी. रामासुब्रह्मण्यम, राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के मुख्य न्यायाधीश एस रविन्द्र भट और केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) के चीफ जस्टिस ऋषिकेश रॉय को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है.



    कॉलेजियम के जरिए कैसे होता है सुप्रीम कोर्ट में जजों का चयन
    सुप्रीम कोर्ट में पांच वरिष्ठ जजों की एक टीम होती है, जिसमें चीफ जस्टिस के अलावा सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जज होते हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस अन्य जस्टिस के साथ आपसी विचार-विमर्श करके बहुमत के आधार पर जजों की नियुक्ति का फैसला लेते हैं.

    यह फैसला लेने के बाद कॉलिजियम (Collegium) के सदस्य किसी कुछ नामों पर सहमति बनाते हैं. फिर वे ये प्रस्तावित नाम राष्ट्रपति के पास अंतिम फैसले के लिए भेजते हैं. यह राष्ट्रपति के हाथ में है कि वो इस सलाह से सहमत हैं या नहीं. राष्ट्रपति चाहें तो कोलेजियम के प्रस्तावित नामों को उम्मीदवारों के तौर पर मान सकते हैं लेकिन वे चाहें तो इस अर्जी को वापस भी लौटा सकते हैं.

    हालांकि, कॉलिजियम अगर किसी नाम को फिर से प्रस्तावित करता है तो राष्ट्रपति (President) के लिए उस नाम पर मुहर लगानी ही पड़ती है. इस तरह से कोलिजियम को दिए गए अधिकारों के तहत राष्ट्रपति के दोबारा इनकार करने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के लिए जज चुने जाने का अंतिम अधिकार कॉलिजियम के पास ही होता है.

    यह भी पढ़ें: बाज नहीं आ रहा PAK, विदेश में PM मोदी के कार्यक्रम को निशाना बनाने की तैयारी

    Tags: Haryana news, Himachal pradesh, President of India, Rajasthan high court, Supreme Court

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