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चीन के राजदूत का दावा- लद्दाख सीमा पर भारत के साथ 'सब ठीक', गलवान घाटी संघर्ष अब 'बीती बात'

भारत में चीन के राजदूत सुन वीडॉन्ग. (File Photo)

भारत में चीन के राजदूत सुन वीडॉन्ग. (File Photo)

पूर्वी लद्दाख में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया अधूरी रहने के बावजूद, चीन ने दावा किया है कि जून 2020 में गलवान घाटी संघर्ष ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

चीन के राजदूत सुन वीडॉन्ग ने कहा- सीमा पर भारत चीन के बीच सब ठीक है
सुन ने भारत चीन संबंधों में सुधार के लिए चीन के 4-सूत्रीय प्रस्ताव को दोहराया
भारत का स्टैंड- सीमा पर डिसइंगेजमेंट पूरा हुए बिना संबंधों में सुधार संभव नहीं

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया अधूरी रहने के बावजूद, चीन ने दावा किया है कि जून 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद बने हालात अब सामान्य हो गए हैं और सीमा पर प्रबंधन व नियंत्रण ​कार्य पहले की तरह होने लगा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीआरसी (People’s Republic of China) की स्थापना की 73वीं वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए, भारत में चीन के राजदूत सुन वीडोंग (Chinese Ambassador Sun Weidong) ने यह भी कहा कि इस वर्ष चीन-भारत संबंधों ने नई प्रगति हासिल की है. चीन ने यह दावा तब किया है, जब उसने इस साल 3 बार संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तान स्थित कमांडरों पर यूएन सैंक्शंस को वीटो लगाकर रोका है. बीजिंग भारत को यह समझाने में असमर्थ रहा है कि वह इन आतंकवादियों को क्यों बचा रहा है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले हफ्ते आतंकवाद के मुद्दे पर यूएनजीए के अपने संबोधन में “दोहरे मानदंडों” के लिए चीन की खिंचाई भी की थी. जबकि भारत स्वीकार करता है कि कई घर्षण बिंदुओं पर डिसएंगेजमेंट हुआ है, सरकार यह भी मानती है कि चीन को सीमा पर शेष मुद्दों को भी जल्द से जल्द हल करना चाहिए और संबंधों को सामान्य करने व द्विपक्षीय आदान-प्रदान फिर से शुरू करने से पहले डी-एस्केलेशन के लिए काम करना चाहिए. यह एक कारण था कि समरकंद में हाल ही में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी, जबकि यह समिट गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स पर डिसएंगेजमेंट के बमुश्किल एक सप्ताह बाद हुई थी.

बातचीत व परामर्श के माध्यम से सीमा मुद्दों का समाधान चाहता है चीन
भारत ने इस साल मार्च में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की मेजबानी की थी, हालांकि, इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वांग यी के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी. यह इस तथ्य के बावजूद था कि भारत और चीन ने पहले, वांग और भारतीय राजदूत प्रदीप रावत के बीच एक बैठक में, ‘दोनों विदेश मंत्रियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को जारी रखने के लिए बहुपक्षीय बैठकों द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का पूरा उपयोग करने’ पर सहमति व्यक्त की थी. सुन वीडॉन्ग ने कहा कि चीन, भारत के साथ राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से संवाद बनाए रखने के लिए इच्छुक है, और साथ में बातचीत व परामर्श के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से सीमा मुद्दों का समाधान चाहता है. राजदूत सुन ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि भारत द्वारा चीन के ‘मूल हितों’ के साथ ताइवान और तिब्बत से संबंधित मुद्दों को ठीक से संभालने की उम्मीद है.

सुन ने संबंधों में सुधार के लिए चीन के 4-सूत्रीय प्रस्ताव को भी दोहराया
अपनी टिप्पणी में सुन ने संबंधों में सुधार के लिए चीन के 4-सूत्रीय प्रस्ताव को भी दोहराया, जिनमें आपसी विश्वास को बढ़ावा देना, सहयोग को मजबूत करना, ‘विन-विन कोऑपरेशन’ को बढ़ावा देना, मतभेदों और संवेदनशील मुद्दों को ठीक से संभालना शामिल है. चीनी राजदूत ने कहा, जिन मुद्दों का समाधान किया जा सकता है, उनके लिए हमें सक्रिय रूप से समाधान तलाशना चाहिए; उन मुद्दों के लिए जिन्हें इस समय हल नहीं किया जा सकता है, हमें उन्हें उचित स्थान पर उठाना चाहिए और सही तरीके से प्रबंधित करना चाहिए. लेकिन किसी भी मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास को बाधित करने की अनुमति नहीं देना चाहिए. जहां चीन चाहता है कि सीमा का मुद्दा संबंधों के सामान्यीकरण के रास्ते में न आए, वहीं भारत का कहना है कि पूर्वी लद्दाख में डिसएंगेजमेंट पूरा होने तक संबंध सामान्य नहीं हो सकते. वीडॉन्ग ने कहा, ‘हमें एक-दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए, एक-दूसरे की सामाजिक व्यवस्था और विकास पथ का सम्मान करना चाहिए, एक-दूसरे की सांस्कृतिक परंपराओं, मूल्यों और रणनीतिक स्वायत्तता का सम्मान करना चाहिए.’

Tags: Galwan Valley Clash, India China Border Tension, Ladakh Border

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