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भारत के नेपाल दौरे से घबराया चीन! दो दिन बाद ही अपने रक्षा मंत्री को भेजने का किया फैसला

हाल ही के कुछ वर्षों में चीन ने नेपाल में प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं.
हाल ही के कुछ वर्षों में चीन ने नेपाल में प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं.

China Tours Nepal: हाल ही के कुछ वर्षों में चीन (China) ने नेपाल में प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. इस दौरान कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया जा रहा है और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से चीन ने संपर्क साध रखा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 6:00 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रिंगला (Harshwardhan Shringla) को काठमांडू से लौटे दो दिन भी नहीं हुए कि चीन ने भी नेपाल दौरे का फैसला कर लिया है. चीन भी अपने रक्षा मंत्री वी फेंगे (Wei Fenghe) को एक दिन के लिए नेपाल भेज रहा है. फेंगे रविवार को नेपाल पहुंचेंगे. यह जानकारी नेपाल के विदेश मंत्रालय की तरफ से शनिवार को मिली है. हालांकि, इसे लेकर बीजिंग से कोई खबर नहीं आई है. बीते साल सितंबर में काठमांडू पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद नेपाल आने वाले फेंगे सबसे वरिष्ठ अधिकारी होंगे.

काठमांडू में विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी की गई जानकारी में बताया गया है कि फेंगे 29 नवंबर को एक दिन के लिए नेपाल आ रहे हैं. इस दौरान वह राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी, राष्ट्रपति केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) और आर्मी प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा से मुलाकात करेंगे. फेंगे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People's Liperation Army) में जनरल के पद पर हैं.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, द काठमांडू पोस्ट को नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल संतोष बल्लभ पौड्याल ने बताया कि चीन के रक्षा मंत्री को नेपाल सेना के हेडक्वार्टर में गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा. अखबार के मुताबिक, उम्मीद का जा रही है कि चीन की तरफ से मिलने वाली सैन्य सहायता को फिर से शुरू करने पर चर्चा की जाएगी.



खास बात है कि हर्षवर्धन श्रिंगला दो दिन पहले ही नेपाल से दो दिन का दौरा कर लौटे हैं. इस दौरे पर उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर करने पर जोर दिया. काठमांडू में हुई इस मुलाकात में क्रॉस बॉर्डर मुद्दे को लेकर भी बात हुई थी. कुछ समय पहले नक्शे के विवाद के चलते भारत और नेपाल के रिश्ते तल्ख हो गए थे. दरअसल, काठमांडू ने मई एक नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें कालापानी क्षेत्र को नेपाल का हिस्सा बताया गया था. लिपुलेख इलाके में नई रोड के खोले जाने के बाद यह इलाका भारत के नियंत्रण में आता है.

नेपाल में पैठ बढ़ा रहा है चीन
हाल ही के कुछ वर्षों में चीन ने नेपाल में प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. इस दौरान कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया जा रहा है और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से चीन ने संपर्क साध रखा है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि दो वाम दलों को साथ लाकर एनसीपी बनाने में बीजिंग ने बड़ी भूमिका निभाई थी. नेपाल में चीन के राजदूत होउ यांकी लगातार एनसीपी के नेताओं से मिल रहे थे.
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