India-China Rift: भारतीय सैनिकों ने क्यों नहीं चलाई गलवान घाटी में गोलियां? विदेश मंत्री ने दिया जवाब

India-China Rift: भारतीय सैनिकों ने क्यों नहीं चलाई गलवान घाटी में गोलियां? विदेश मंत्री ने दिया जवाब
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गोली न चलाने के सवालों पर जवाब दिया है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S.Jaishankar) ने कहा है कि भारतीय सैनिकों ने इसलिए गोलियां नहीं चलाईं क्योंकि वो चीन के साथ समझौते का पालन कर रहे थे. लेकिन कई एक्सपर्ट्स ने उनके जवाब की आलोचना की है.

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नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S.Jaishankar)  ने जवाब दिया है कि आखिर क्यों गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारतीय सैनिकों की तरफ से गोली नहीं चलाई गईं. विदेश मंत्री ने एक ट्वीट कर बताया है-'बॉर्डर पर ड्यूटी करने वाले सभी सैनिक अपने साथ हथियार रखते हैं. विशेष तौर पर तब जब वो अपनी पोस्ट छोड़ रहे हों. 15 जून के दिन गलवान घाटी में भी सैनिकों के पास हथियार थे. लेकिन भारतीय सैनिकों ने 1996 और 2005 में चीन के साथ हुए समझौतों की वजह से गोलियां नहीं चलाईं.'

दरअसल राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सवाल खड़े किए हैं कि जब भारतीय सैनिकों के पास बंदूकें थी तो आखिर गोलियां क्यों नहीं चलाई गई. इसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amrinder Singh) ने भी कहा कि भारतीय सैनिकों को हमले की स्थिति में गोलियां चलानी चाहिए थीं.

एक्सपर्ट्स कर रहे आलोचना
इस सवालों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब तो दिया है लेकिन कई एक्सपर्ट्स ने इसकी आलोचना की है. भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने कहा है-इस तरह के समझौते तब लागू नहीं होते जब ऐसे तनाव की स्थिति हो. ऐसे एग्रीमेंट बॉर्डर मैनेजमेंट के लिए लागू होते हैं जब स्थितियां सामान्य होती है. इस तरह की टैक्टिकल मिलिट्री सिचुएशन में इसकी कोई मान्यता नही होती. जब सैनिकों को धमकाया गया तभी इसकी वैधता खत्म हो गई थी.
चीन ने एग्रीमेंट कभी माना ही नहीं


न्यूज 18 के साथ हुई बातचीत में चीनी मामलों के विशेषज्ञ बीआर दीपक ने कहा-20 सैनिकों की शहादत के साथ ही भारत और चीन के बीच में कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मिजर्स खत्म हो गए हैं. 1996 में भारत और चीन के बीच हुए इस समझौते में दोनों देशों की संप्रभुता और अखंडता के सम्मान की बात कही गई थी. दोनों के आंतरिक मसलों में दखल न देने की बात पर समझौत हुआ था.

बीआर दीपक कहते हैं कि इस एग्रीमेंट के 3 और 4 नंबर प्वाइंट्स के मुताबिक सीमा पर सेनाओं की हल्की तैनाती की बाते हैं. लेकिन इन दोनों आर्टिकल का उल्लंघन तो हो चुका है. वर्तमान स्थिति में तो दोनों ही तरफ सेनाओं की संख्या की अच्छी-खासी है. साथ ही दोनों देशों ने इस बात पर भी समझौता किया कि बॉर्डर के नजदीक बड़ी ड्रिल नहीं करेंगे. लेकिन वो भी हो रहा है. चीन की तरफ से तो इसे कई बार तोड़ा जा चुका है.

अपने ट्वीट में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्वाइंट नंबर 6 का हवाला दिया है. इसके मुताबिक चीनी बॉर्डर पर बंदूकें न चलाने की मनाही है. लेकिन 7 नंबर प्वाइंट कहता है कि दोनों तरफ से सैन्य अधिकारियों की बातचीत भी लगातार होती रहनी चाहिए. बीआर दीपक कहते हैं कि विचार ये था कि दोनों तरफ के अधिकारी एक दूसरे से लगातार संपर्क में रहेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दरअसल इन नियमों को बनाया तो गया लेकिन इनका पूरी तरही से पालन नहीं किया गया.

भविष्य और ज्यादा देखने को मिल सकते हैं तनाव
वो कहते हैं-चीन ने लगातार इस एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है. हम सभी जानते हैं कि चीन ने इन इलाकों में किस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है. ये उस एग्रीमेंट की स्पीरिट के खिलाफ है. लेकिन जब भारत ने ऐसा करने की कोशिश की तो चीन की तरफ से एग्रीमेंट का हवाला दिया जाने लगा.

बीआर दीपक कहते हैं कि इन इलाकों में भारत के निर्माण कार्य से चीन चिंतित है. वो नहीं चाहता था कि भारत यहां पर निर्माण करे. लेकिन भारत भी अब इसे लेकर तैयार है. ऐसे में भविष्य में इस तरह तनाव ज्यादा देखने को मिल सकते हैं.

(सुहास मुंशी की स्टोरी से इनपुट के साथ)
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