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पुलवामा हमला: चीन करना चाहता था पाकिस्तान का बचाव, 7 दिन लेट कराया UNSC का बयान

पुलवामा हमला: चीन करना चाहता था पाकिस्तान का बचाव, 7 दिन लेट कराया UNSC का बयान

गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के 15 स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों ने, 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तान के आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद द्वारा 'जघन्य और कायरतापूर्ण' आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की.

गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के 15 स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों ने, 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तान के आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद द्वारा 'जघन्य और कायरतापूर्ण' आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की.

गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के 15 स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों ने, 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तान के आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद द्वारा 'जघन्य और कायरतापूर्ण' आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की.

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पुलवामा हमले पर बयान जारी करने में एक सप्ताह का वक्त क्यों लगाया, इसकी वजह सामने आ चुकी है. नई दिल्ली में शुक्रवार को आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चीन बयान में आतंकवाद शब्द के उल्लेख का विरोध कर रहा था, इस कारण पुलवामा हमले पर UNSC का बयान आने में एक सप्ताह की देरी हुई.

    सूत्रों के अनुसार अमेरिका ने इस मामले को लेकर 'पेन होल्डर' की तरह काम किया और सभी 15 सदस्यों का अनुमोदन प्राप्त करने के लिए कई बदलाव किए. आखिरकार पुलवामा हमले के एक सप्ताह बाद 21 फरवरी को सुरक्षा परिषद का बयान आया.

    चीन जहां पुलवामा पर UNSC के बयान पर पानी फेरने की कोशिश कर रहा था तो वहीं पाकिस्तान कोशिश कर रहा था कि बयान जारी ही न हो. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष से भी मिलीं, लेकिन उनका प्रयास सफल नहीं हो सका.

    गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के 15 स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों ने, 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तान के आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद द्वारा 'जघन्य और कायरतापूर्ण' आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की. इस मामले पर कूटनीतिक तकरार के बारे में बताते हुए सूत्रों ने बताया कि पुलवामा पर सुरक्षा परिषद का बयान 15 फरवरी की शाम को जारी किया जाना था, लेकिन चीन बार-बार वक्त बढ़ाने की मांग कर रहा था.

    सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा परिषद के 14 सदस्य 15 फरवरी को बयान जारी करने के लिए तैयार थे, लेकिन चीन ने इसकी तारीक को 18 फरवरी तक बढ़ा दिया. यहीं नहीं चीन ने बयान में कई संशोधन करने का भी सुझाव दिया. इस मुद्दे से परिचित एक व्यक्ति ने बताया कि सुरक्षा परिषद द्वारा पुलवामा हमले की 'आतंकवाद' के रूप में निंदा के बाद भी चीन ने अपना विरोध जारी रखा.

    सूत्रों ने बताया कि हालांकि चीन और पाकिस्तान के तमाम प्रयासों के बावजूद, सुरक्षा परिषद ने जम्मू कश्मीर में भारतीय सैनिकों पर हमले के संबंध में बयान जारी करने पर सहमति व्यक्त की. बता दें कि गुरुवार को सुरक्षा परिषद द्वारा जारी बयान में आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया गया है. इसके साथ ही बयान में आतंकवाद के फाइनेंसर्स को इनके लिए उत्तरदायी बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है.

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    Tags: China, CRPF, India, Pakistan, Pulwama attack, Terrorism, Trending news

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