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भारत के साथ रिश्तों को फिर पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे चीनी विदेश मंत्री वांग, पूर्वी लद्दाख में संघर्ष के बाद से है तनाव

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ चीन के विदेश मंत्री वांग यी. (फाइल फोटो)

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ चीन के विदेश मंत्री वांग यी. (फाइल फोटो)

India China Relations: सितंबर 2020 में, जयशंकर और वांग ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के एक सम्मेलन के इतर मास्को में व्य ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. मई 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पूर्वी लद्दाख में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की आक्रामकता के बाद भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश के तहत चीनी विदेश मंत्री वांग यी 24-25 मार्च को भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं.

समझा जाता है कि स्टेट काउंसलर वांग अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के संग प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक के साथ ही भारतीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे. वांग यी के भारत के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करने की भी संभावना है. पूर्वी लद्दाख में पीएलए और भारतीय सेना के बीच युद्ध के बाद दोनों विदेश मंत्री सितंबर 2020 में मास्को में और सितंबर 2021 में दुशांबे में मिल चुके हैं.

सितंबर 2020 में, जयशंकर और वांग ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के एक सम्मेलन के इतर मास्को में व्यापक बातचीत की थी, जिस दौरान वे पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध को हल करने के लिए पांच सूत्री सहमति पर पहुंचे थे. इसमें सैनिकों को जल्दी पीछे हटाने, तनाव को बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचने, सीमा प्रबंधन पर सभी समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करने और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति बहाल करने के कदम जैसे उपाय शामिल थे.

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दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने पिछले साल जुलाई में ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में एससीओ की एक अन्य बैठक के इतर द्विपक्षीय बैठक भी की थी, जिसमें सीमा रेखा पर ध्यान केंद्रित किया गया था. वे सितंबर में दुशांबे में फिर मिले. भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है.

पूर्वी लद्दाख और चीन में फंसे भारतीय छात्र का मुद्दा
एक ओर, नई दिल्ली और बीजिंग सैन्य कमांडर के स्तर पर पूर्वी लद्दाख एलएसी के पार विवादों को सुलझाने पर चर्चा कर रहे हैं, तो वहीं दिसंबर 2019 में वुहान में कोविड-19 का मामला सामने आने के बाद चीन में फंसे लगभग 12,000 भारतीय छात्रों को लेकर भी कुछ उम्मीद बंधी है. समझा जाता है कि चीन में फंसे लोगों के साथ कई भारतीय परिवारों को कृत्रिम अलगाव (Artificial Separation) का भी सामना करना पड़ रहा है.

पूर्वी लद्दाख के मुद्दे पर 11 मार्च को हुई भारत-चीन की वार्ता
पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में लंबित मुद्दों को हल करने के लिए 11 मार्च को भारत और चीन ने 15वीं दौर की उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता की थी. पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद 5 मई, 2020 को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध शुरू हो गया था. दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ ही भारी हथियारों के साथ अपनी तैनाती बढ़ा दी.

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सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के परिणामस्वरूप, दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे और गोगरा क्षेत्र से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी की थी. प्रत्येक पक्ष के पास वर्तमान में संवेदनशील क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक हैं.

Tags: China, India, S Jaishankar, Wang Yi

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